शबाना आजमी को देखने से ज्यादा उनको सुनने में आनंद आता है। वह जब अभिनय नहीं कर रही होती हैं तो कलाकारी बतिया रही होती हैं। उनकी बातों में एक अलग तरह का रस है। अभिनेता उनकी बातों में नवरस ढूंढते हैं और श्रोताओं को उस रस की तलाश रहती है जिसका स्वाद लेने में अक्सर वो सिनेमाघर में चूक जाते हैं। उनके चेहरे पर एक अलग तरह की दृढ़ता दिखती है। परदे की मासूम शबाना जब समाजसेवी शबाना बनती है, तो अपने निर्देशकों को डरा देती है। और, खुद शबाना आजमी ये मानती हैं कि सामाजिक सरोकारों की पैरवी के दौरान उनकी इस सार्वजनिक सख्ती ने उनसे कई किरदार छीन भी लिए।
MAMI Film Festival 2024: मेरे पास कोई स्क्रिप्ट नहीं थी, कपड़े भी मेरे अपने थे, लेकिन वो भी क्या दिन थे..
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मुंबई में चल रहे मामी मुंबई फिल्म फिल्म फेस्टिवल में इस साल शबाना आजमी को उनकी अदाकारी की आधी सदी पूरी होने पर विशेष सम्मान दिया गया है। आम तौर ऐसे मौकों पर मुंबई फिल्म जगत की शख्सियतों से अनुपमा चोपड़ा या फिर कोमल नाहटा जैसे सेलेब्रिटी पत्रकार ही बातें करते हैं। अनुपमा अपने पति विधु विनोद चोपड़ा के साथ बीती शाम किसी और कार्यक्रम में व्यस्त रहीं तो शबाना आजमी की मास्टरक्लास में ये काम किया अभिनेत्री विद्या बालन ने। हो सकता है कि इससे पहले से तैयार सवालों के पहले से तैयार जवाब देने में मदद मिलती हो। सब कुछ तात्कालिक है, ऐसा अभिनय करने में शबानी कहीं से कम हैं और न ही विद्या बालन।
ख़ैर, सवाल-जवाब आशुकविता बनें न बनें, उनमें अगर लहर है तो सुनने वालों पर उनका असर होता ही है। शबाना के उस संस्मरण को लोगों ने अपलक और सांसें रोके रखने से उपक्रम में सुना जो उन्होंने फिल्म ‘अर्थ’ में जगजीत सिंह के गाने गाने ‘तुम इतना क्यूं मुस्कुरा रहे हो..’ की शूटिंग को लेकर सुनाया। गाने की शूटिंग कोई तीन दिन तक चली और इस दौरान जो कुछ हुआ, वह शबाना के लिए कभी न भूलने का वाकया बन गया। शबानी बताती हैं कि कैसे महेश भट्ट की एक फिल्म की शूटिंग उन्होंने बिना किसी स्क्रिप्ट के कर डाली और कपड़े तक उन्होंने उसमें अपने ही पहने।
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जिस सीन का शबाना यहां जिक्र कर रही थीं, वो ‘तुम इतना क्यूं मुस्कुरा रहे हो..’ की शूटिंग के तीसरे दिन हुआ, जब जो किरदार शबाना निभा रही हैं, उसे अपने जन्मदिन के दिन अपने पति के तलाक के कागज मिलते हैं। वह निकलती है। राज किरन उसे समेटते हैं। कागज बिखरते हैं और उसका सारा सच साफ साफ सामने आ जाता है। शबाना बताती हैं, ‘मैं तो जैसे पत्थर की तरह जम गई थी, उस दिन। समझ ही नहीं आया कि करना क्या है। महेश भट्ट ने मुझे कहा कि तुम्हारी पोल खुल चुकी है। यू आर एक्पसोज्ड! इससे बेहतर निर्देशकीय दिशानिर्देश मुझे फिर कभी नहीं मिला।’
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महेश भट्ट के अलावा शबाना आजमी ने श्याम बेनेगल, सत्यजीत रे, गौतम घोष, मृणाल सेन, बासु चटर्जी, सई पंरजपे, सईद अख्तर मिर्जा, शेखर कपूर, तपन सिन्हा, दीपा मेहता, विशाल भारद्वाज, मीरा नायर, विधु विनोद चोपड़ा और करण जौहर के साथ काम करने के लम्हे भी श्रोताओं के साथ साझा किए। शबाना ने इस मौके पर खुलासा किया कि उनके पति जावेद अख्तर ने बतौर अभिनेत्री उनके विकास में खूब मदद की और पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट ने उन्हें वह सब सिखाया जो किसी अभिनय के लिए जरूरी होता है। वह कहती हैं, ‘अभिनय एक सतत चलते रहने वाली प्रक्रिया है और जो लोग 15 दिन में एक्टिंग सिखा देने का दावा करने वाले स्कूल खोलते हैं, जी करता है कि उनका खून कर दूं।’
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