बेनामी संपत्ति मामला एक बार फिर से शाहरुख खान (Shahrukh Khan) के गले की हड्डी बन गया है। कुछ समय पहले बेनामी संपत्ति के आरोप में किंग खान पर केस दर्ज किया गया था। उस वक्त सहायक प्राधिकरण ने जांच के बाद शाहरुख खान के खिलाफ आरोप खारिज कर दिए थे। इसके बाद यह मामला आयकर विभाग ने अपने हाथ में ले लिया और जांच शुरू कर फैसले को चुनौती दी। यह पूरा मामला शाहरुख खान के फॉर्म हाउस से संबंधित है। शाहरुख पर आरोप है कि उन्होंने इस जमीन को खेती के उद्देश्य से खरीदा लेकिन बाद में फॉर्म हाउस बना दिया। बेनामी संपत्ति कानून में बदलाव के बाद यही फॉर्म हाउस अब जांच के घेरे में है।
शाहरुख खान की मुश्किलें बढ़ीं, बेनामी संपत्ति मामले में आयकर विभाग ने फैसले को दी चुनौती
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दरअसल, साल 2016 में बेनामी संपत्ति मामले में कुछ बदलाव किए गए थे। इन बदलाव के बाद शाहरुख खान इसमें फंसने वाले सबसे फेमस हस्ती हैं। बेनामी संपत्ति में जो बदलाव किए गिए हैं उसके मुताबिक अगर कोई शख्स बेनामी संपत्ति मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे 7 साल की सजा हो सकती है। यहां तक की उसी बेनामी संपत्ति की मार्केट वेल्यू के हिसाब से 25 फीसदी जुर्माना भी लग सकता है।
इसके साथ ही बेनामदार और जिसे फायदा पहुंचा दोनों को सजा दिए जाने का प्रावधान है। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के डिप्टी कमिश्नर 87 प्रॉपर्टी के बारे में जानना चाहते थे जिन पर कोस्टल रेगुलेशन कानून के उल्लंघन का आरोप है। इन्हीं 87 प्रॉपर्टी में से एक शाहरुख खान का फॉर्म हाउस भी है। महाराष्ट्र टेनेसी एंड एग्रीकल्चर लैंड्स एक्ट के तहत कृषि योग्य इन जमीनों को गैर-कृषि कार्य के लिए ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
शाहरुख खान ने यह जमीन खेती के लिए खरीदी थी लेकिन उन्होंने फॉर्म हाउस बना लिया। जिसकी वजह से शाहरुख खान की मुसीबतें बढ़ गई। साल 2018 में 15 करोड़ के इस बंगले सहित कई जमीनों को जब्त कर लिया था। आयकर विभाग ने डेजा वु फाम्स्र प्राइवेट लिमिटेड को बेनामदार घोषित कर दिया। इसके साथ ही शाहरुख खान को फायदा लेने वाला बताया था।
बाद में न्यायिक निर्णय प्राधिकरण ने इस केस को खारिज कर दिया था जिसमें शाहरुख खान और गौरी खान हिस्सेदार थे। वहीं इस पूरे मामले पर आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक, विभाग के पास पर्याप्त आधार हैं जिससे यह पूरा लेनदेन बेनामी साबित होता है।