18 मार्च 1938 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्में शशि कपूर ने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी थीं। हिंदी सिनेमा में शशि कपूर ने अपने परिवार की विरासत को जिस तरह संभाला और अपने दम पर खुद को इंडस्ट्री में स्थापित किया था वो वाकई काबिले तारीफ है। शशि कपूर उस 'कपूर' खानदान के बेटे थे जिसका शुरू से ही हिंदी सिनेमा में एक अलग रुतबा रहा है। हालांकि कपूर खानदान के बाकी सदस्यों की तरह ही उनकी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ निजी जिंदगी भी दर्शकों के लिए बेहद खास रही। आज उनके बर्थ एनिवर्सिरी के मौके पर आपको बताते हैं वो किस्सा जब शशि की पत्नी जेनिफर उन्हें गे समझ बैठी थीं।
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पत्नी जेनिफर केंडल के साथ शशि कपूर
जेनिफर और शशि कपूर की प्रेम कहानी बॉलीवुड में बहुत मशहूर थी। उनके प्रेम के कई दिलचस्प किस्सों के बारे में लोग जानते हैं, लेकिन कुछ किस्से ऐसे हैं जिनसे आज भी लोग बेखबर हैं। ऐसा ही एक किस्सा जेनिफर की छोटी बहन फैलिसिटी केंडल ने अपनी किताब 'व्हाइट कार्गो' में बताया था। इस किताब में उन्होंने जेनिफर और शशि कपूर की प्रेम कहानी का भी जिक्र किया था।
फैलिसिटी की किताब के अनुसार जेनिफर अपने एक दोस्त के साथ ओपेरा हाउस में नाटक देखने गईं थी जब शशि की निगाहें उन पर टिक गईं थीं। शशि ने जेनिफर को देखा और उसी वक्त अपना दिल उनके नाम कर बैठे। हालांकि तब शशि बड़ा नाम नहीं थे इसलिए उन्हें जेनिफर से जान पहचान करने में वक्त लगा था।
इस बात का खुलासा खुद शशि कपूर ने भी अपनी किताब में किया था। उन्होंने लिखा, 'मैंने जेनिफर के कई नाटक भी देखे, लेकिन उन्होंने कोई नोटिस नहीं लिया। एक दिन रॉयल ओपरा हाउस में उन्होंने कहा कि मैं बंबई में रहती हूं और हम लोग मिल सकते हैं'। इसके बाद ये मुलाकात का सिलसिला आगे बढ़ने लगा और धीरे धीरे ये मुलाकात दोस्ती और फिर प्यार में तब्दील हो गई।
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पत्नी जेनिफर केंडल के साथ शशि कपूर
हालांकि शशि कपूर अपने टीनएज में बहुत शर्मीले थे। उन्हें जेनिफर से बात करते हुए भी शर्म आ जाया करती थी। जेनिफर जब शुरूआती मुलाकात में शशि का ये स्वभाव नहीं जान पाईं थीं तो उन्हें गे समझती थीं। शशि कपूर ने अपनी किताब में लिखा था, 'जेनिफर ने मुझे बाद में बताया कि वो मुझे गे समझने लगी थीं'। हालांकि फिर उनकी गलतफहमी दूर हुई और जब दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो उन्होंने शादी कर ली। उनकी शादी केवल 3 घंटे में पृथ्वी राज कपूर के माटुंगा स्थिर घर में आर्य समाजी रीति रिवाज से हुई थी।