इस दुनिया में आकर हमें यही लगता है कि यहां जो भी कुछ है वो बस हमारा है। ये पेड़, पहाड़, नदी, हवा, जानवर सब कुछ हमारा है। हम जैसे चाहें इसका इस्तेमाल कर सकते हैं और जब चाहें उसे नष्ट कर देते हैं। सर्व शक्तिमान मानव बनने की राह में हम सब कुचलते जा रहे हैं। केरल में इंसानों ने अपनी यही ताकत दिखाकर एक गर्भवती हथिनी को खाने में पटाखे रखकर खिला दिए। उसके मुंह के अंदर वो फट गए। जिसके बाद तड़प- तड़पकर उसने अपनी जान दे दी।
गर्भवती हथिनी के मुंह में पटाखे फोड़कर ली जान, श्रद्धा कपूर और अथिया शेट्टी ने जताई नाराजगी
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कुछ लोग हैं जिन्हें इस घटना से फर्क पड़ता है। वो मानते हैं कि प्रकृति की दी हुई हर चीज हमारी नहीं है। हमें कोई हक नहीं है कि इसे नुकसान पहुंचाएं। श्रद्धा कपूर ने इस घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए ट्वीट किया है, 'ऐसा कैसे हो सकता है ? क्या इन लोगों के पास दिल नहीं हैं ? मेरा दिल टूट कर बिखर गया है। अपराधियों को कठोर तरीके से दंडित करने की आवश्यकता है।'
सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी भी इस घटना से बेहद नाराज हैं। उन्होंने ट्वीट किया है, 'यह बहुत बर्बर है। किसी का भी ऐसा करने का दिल कैसे कर सकता है? बहुत घृणित, मुझे आशा है कि कार्रवाई की गई है।'
बता दें कि ये घटना पिछले हफ्ते की है। खाने की तलाश में हथिनी मल्लापुरम जिले में शहर की ओर आ गई थी। यहां कुछ लोगों ने फलों के भीतर छिपाकर उसे पटाखे खिला दिए। उस बेचारी ने जैसे ही उसे खाने की कोशिश की, उसके मुंह के भीतर धमाका हो गया। वो बेतहाशा दर्द से कराहती हुई इधर-उधर भागने लगी। धमाके की वजह से मुंह के भीतर बहुत ज्यादा चोटें आई थीं। इसके बावजूद उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। किसी पर हमला नहीं किया। न ही कोई घर तोड़ा। जब दर्द सहा नहीं गया तो एक नदी में अपनी सूंड को डालकर कुछ आराम दिलाने की कोशिश की। वन विभाग के कर्मी भी उसे बचाने के लिए पहुंचे। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 27 मई की शाम को उस हथिनी ने पानी में खड़े खड़े ही अपने जान दे दी।
इस घटना से बहुत ज्यादा दुखी वन अधिकारी मोहन कृष्णन ने पूरी दास्तां को साझा किया। उन्होंने लिखा, 'उसने सभी पर विश्वास किया। जब उसने अनानास खाया तो उसे नहीं पता था कि इसमें पटाखे हैं। उसका मुंह और जीभ बहुत ही बुरी तरह से चोटिल हो गई थी। भीषण दर्द में भी उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। आखिरकार वो वेलियार नदी में आकर खड़ी हो गई। वन विभाग ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन शायद उसे अंदाजा हो गया था कि उसका वक्त आ गया है। उसने ऐसा नहीं करने दिया। मोहन कृष्णन ने बताया कि उसे सम्मानजनक विदाई देने के लिए हमने एक ट्रक मंगवाया। हमने उसे उसी जंगल में हमने अंतिम विदाई दी, जहां उसका बचपन बीता और वो बड़ी हुई।'
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