अभिनेता धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर ने कभी अपने पति की दूसरी शादी का बचाव करते हुए कहा था कि यह दौर ही ऐसा है जब सब बड़े अभिनेता अपनी पहली पत्नियों को छोड़कर दूसरी और तीसरी शादियां कर रहे हैं। इसमें उनके पति का क्या दोष? दोष इसीलिए कभी किसी ने राज बब्बर को भी नहीं दिया। उनकी दूसरी प्रेम कहानी का अंत दुखद रहा। निशानी के तौर पर एक बेटा तो मिला लेकिन प्रेम साथ नहीं रहा। चलिए शुरू से आपको सुनाते हैं, स्मिता पाटिल और राज बब्बर की ये अनोखी प्रेम कहानी।
Smita Patil: न जमाने की सुनी, न सुनी घरवालों की, मोहब्बत की इस बागी ने लिखी अनोखी प्रेम कहानी
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राज बब्बर की पहली शादी
अभिनेता राज बब्बर ने पहली शादी नादिरा जहीर से की। ये दोनों एक साथ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के छात्र थे। नादिरा राज बब्बर की सीनियर थीं। नाटक लिखने और निर्देशित करने का काम करती थीं। राज बब्बर नए-नए आए थे। जब उन्हें नादिरा की एक नाटक में काम करने का मौका मिला तो यहीं से इन दोनों के बीच प्यार का बीज पनप गया। आगे चलकर यह प्रेम कहानी शादी में तब्दील हो गई। वर्ष 1975 में नादिरा जहीर का नाम नादिरा बब्बर हो गया।
मुंबई आकर मेरी दूसरी खुशी
शादी के बाद राज और नादिरा दिल्ली में ही रहते थे। जब इनके यहां एक बेटी जूही बब्बर ने जन्म लिया तो राज की जिम्मेदारी बढ़ गई। अब उन्हें ऐसे काम की तलाश थी जो उन्हें पैसा भी दे सके। उन्होंने अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और मुंबई चले आए। आने से पहले उन्होंने नादिरा को अपना स्कूटर बेचकर छह हजार रुपये थमाए। जिससे कि वह अपना खर्चा चला सकें। मुंबई आने के बाद अभिनय में राज का करियर चल पड़ा और उन्होंने अपने परिवार को भी मुंबई बुला लिया। यहीं आकर आर्य बब्बर का जन्म हुआ।
राज और स्मिता की पहली मुलाकात
राज बब्बर की स्मिता पाटिल से पहली मुलाकात वर्ष 1982 में आई फिल्म 'भीगी पलकें' के सेट पर हुई। इस फिल्म में ये दोनों ही कलाकार मुख्य भूमिकाओं में रहे। पहली मुलाकात बहुत खास नहीं थी। एक इंटरव्यू में खुद राज बब्बर ने बताया है कि उस समय इस फिल्म की शूटिंग उड़ीसा के राउरकेला में चल रही थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उनकी पहली मुलाकात स्मिता से हुई। इस मुलाकात के दौरान ही इन दोनों में पहले कुछ हंसी मजाक हुआ और फिर बाद में थोड़ी सी तकरार हो गई। हालांकि, राज बब्बर को स्मिता की जुबान से निकले हुए शब्द काफी पसंद आए। वह उसी वक्त स्मिता पर फिदा हो गए थे।
राज से मिलने से पहले ही मशहूर थीं स्मिता
राज बब्बर के स्मिता की जिंदगी में आने से पहले स्मिता ने काफी फिल्मों में काम कर लिया था। उन्होंने श्याम बेनेगल की फिल्म 'चरणदास चोर' से शुरुआत की और 1977 में आई फिल्म 'भूमिका' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार में नामांकन पाया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1981 में आई फिल्म 'चक्र' के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार पाया। साथ ही राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता। 'नमक हलाल', 'बाजार', 'अर्थ' जैसी फिल्में भी उनके राज से मिलने से पहले ही रिलीज हो चुकी थीं। उस समय राज बब्बर जितने बड़े अभिनेता थे, उतना ही नाम इस इंडस्ट्री में स्मिता पाटिल का भी हो चुका था।