अपने शानदार अभिनय से सभी का दिल जीत लेने वालीं अभिनेत्री स्मिता पाटिल (Smita Patil Death Anniversary) की आज पुण्यतिथि है। महज 31 साल की उम्र में 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया। चाइल्डबर्थ कॉम्प्लिकेशंस के चलते उनकी डेथ हुई थी। स्मिता पाटिल भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपनी फिल्मों के जरिए वो हमेशा प्रशंसकों के दिलों में रहेंगी।
महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वालीं स्मिता पाटिल दे बैठी थीं किसी और के पति को दिल, कम उम्र में इस वजह से हुई थी मौत
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स्मिता पाटिल को जहां उनकी फिल्मों के लिए सराहा गया वहीं दूसरी तरफ एक्टर और पॉलिटिशियन राज बब्बर से जुड़े उनके सम्बन्ध को लेकर उनकी आलोचना भी की गई। उनके बारे में लोगों ने कहा कि उन्होंने राज बब्बर और नादिरा बब्बर का घर तुड़वा दिया। राज बब्बर की स्मिता पाटिल से पहली मुलाकात वर्ष 1982 में आई फिल्म 'भीगी पलकें' के सेट पर हुई। इस फिल्म में ये दोनों ही कलाकार मुख्य भूमिकाओं में रहे।
धीरे-धीरे स्मिता और राज के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। स्मिता पाटिल की मां दोनों के रिश्ते के खिलाफ थीं। उनका कहना था कि जो स्मिता महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ती है वो किसी का घर कैसे तुड़वा सकती है। लेकिन राज बब्बर से अपने रिश्ते को लेकर स्मिता ने मां की एक भी नहीं सुनी। दरअसल साल 1975 में राज बब्बर ने नादिरा से शादी की थी। यानी की स्मिता से मुलाकात से करीब सात साल पहले ही राज बब्बर शादी कर चुके थे।
80 के दशक में ही यह दोनों लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने लगे थे। बीबीसी के मुताबिक राज बब्बर कहते थे कि वो अपनी पत्नी नादिरा को तलाक देकर स्मिता से शादी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और स्मिता को वो धीरे धीरे अपने फ्रेंड सर्किल से भी दूर रखने लगे थे। कई लोग ऐसा कहते हैं कि उन्हें इस बात का अंदाजा था कि वो ज़्यादा नहीं जी पाएंगी। (प्रतीक बब्बर) बच्चे को जन्म देते वक्त हुई दिक्कतों के चलते 13 दिसंबर 1986 को महज 31 साल की उम्र में स्मिता का निधन हो गया था। बता दें कि स्मिता की मौत से 15 दिन पहले ही यानी 28 नवंबर 1986 को प्रतीक बब्बर का जन्म हुआ था।
बता दें राज बब्बर के स्मिता की जिंदगी में आने से पहले स्मिता ने काफी फिल्मों में काम कर लिया था। उन्होंने श्याम बेनेगल की फिल्म 'चरणदास चोर' से शुरुआत की और 1977 में आई फिल्म 'भूमिका' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्म फेयर पुरस्कार में नामांकन पाया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1981 में आई फिल्म 'चक्र' के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार पाया। साथ ही राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता।