अभिनेत्री जिया खान आत्महत्या मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 10 साल चले मुकदमे के बाद अभिनेता सूरज पंचोली को बरी कर दिया। ‘अमर उजाला’ से एक खास मुलाकात में सूरज पंचोली कहते हैं, ‘एक इंसान के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय वह होता है जब वह 20 साल का होता है। लेकिन इस उम्र में मुझे एक आतंकवादी की तरह जेल में डाल दिया गया। अब मेरे बीते 10 साल कौन लौटाएगा?’ इस पूरे मामले में उनकी दलीलें क्या रहीं और किस वजह से वह बरी हुए, पढ़िए सूरज पंचोली का ये इंटरव्यू।
Sooraj Pancholi Interview: सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग पर सनसनीखेज खुलासा, इस एक वजह से बरी हो गए सूरज पंचोली
जिया खान को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए आपको आरोपी बनाया गया तो उस समय आपकी क्या मनोदशा रही होगी?
उस समय तो मुझे समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है? 20-21 साल का था जब मुझे जेल में डाल दिया गया। मैंने पिछले 10 साल से यह सब क्यों झेला आज तक मुझे समझ में नहीं आया। ये मेरे 10 साल कौन वापस करेगा। 10 साल से मैं एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा था जिसका मुझे लग रहा था कि कोई अंत ही नहीं होगा। कोर्ट ने जो भी फैसला लिया और कोर्ट में जो कुछ भी हुआ है। उन दो घंटों के फैसले में मेरी 10 साल की लड़ाई थी। यह दूसरों के लिए एक दिन की न्यूज हो सकती है लेकिन जो जिया के साथ हुआ है,वह किसी के साथ, किसी की फैमिली के साथ नहीं होना चाहिए।
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फिर भी आपने इस मुद्दे पर कभी सार्वजनिक तौर पर बात नहीं की?
मेरे दिमाग में बार- बार यही सवाल आता था कि गुनहगार मैं क्यों? मैं तो जिया को सिर्फ पांच महीने से जानता था। उस समय तो जिया के बारे में मुझे बहुत कम पता था। उनकी मानसिक स्थिति और उनकी पारिवारिक समस्या के बारे में मुझे कुछ नहीं पता था। जब यह हुआ तो सिर्फ मुझ पर ही उंगली क्यों उठाई गई, क्योंकि मैं उसका बॉयफ्रेंड था? मैं अंदर ही अंदर घुटन महसूस कर रहा था और खुद से ही सवाल करता था कि क्या किसी के साथ एक रिलेशनशिप में रहना, किसी से दोस्ती करना गुनाह है? मुझे एक ऐसा विलेन बनाया गया जो मैं नहीं हूं। मैं 10 साल से चुप था। कभी मैंने मीडिया में इस केस को लेकर बात नहीं की, क्योंकि वहां बात करने से मैं निर्दोष साबित नहीं होता।
और, अदालत में ऐसा क्या हुआ कि आप निर्दोष साबित हुए?
मैंने जिया के साथ जो पांच महीने बिताए सिर्फ वह पांच महीने ही तफ्तीश में चेक किए गए कि सूरज क्या था? मुझे एक सुसाइड लेटर के नोट पर गिरफ्तार कर लिया गया। और, 10 साल के बाद कोर्ट में यह साबित होता है कि वह सुसाइड लेटर जिया की लिखावट में है ही नहीं, वह लिखावट तो उनकी मां के लिखावट से मैच हो रही है।
थोड़ा विस्तार से बताइए इसे..
जिस डायरी से छह पेज का सुसाइड लेटर मैच किया गया, वह डायरी किसकी थी, इसका कभी भी पुलिस, सीबीआई या फिर जांच अधिकारी टीम ने पता ही नहीं लगाया। कोर्ट में यह बात साबित हुआ है कि वह डायरी राबिया खान की थी, जिया खान की नहीं। डायरी में जितने भी नोट्स लिखे गए थे, वे जिया खान की मां राबिया खान के लिखे हुए थे। और, डायरी में जितने भी नोट्स लिखे गए थे उसकी लिखावट सुसाइड लेटर से मैच हो रही थी। अगर पुलिस और सीबीआई टीम इसकी जांच पहले ही कर ली होती तो मुझे 10 साल पहले 21 साल की उम्र में जेल नहीं जाना पड़ता। अदालत ने यही कहा कि यह लिखावट जिया खान की नहीं बल्कि उनकी मां राबिया खान की लिखावट है और मुझे निर्दोष साबित कर दिया गया।