बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता सौमित्र चटर्जी पिछले साल नवंबर में ही इस दुनिया से विदा हो गए। लेकिन, पीछे छोड़ गए हैं अपनी फिल्मों की खूबसूरत विरासत जिसके दम पर वह इस दुनिया में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस विरासत को सौमित्र ने अकेले नहीं बनाया, बल्कि इसमें हाथ रहा सत्यजीत रे, मृणाल सेन, तपन सिन्हा, असित सेन, तरुण मजूमदार जैसे फिल्मकारों का। इन सबके साथ सौमित्र ने लाजवाब काम किया लेकिन वह सबसे ज्यादा पसंदीदा रहे फिल्मकार सत्यजीत रे के। इन दोनों ने साथ में कुल 14 फिल्मों में काम किया और हर एक फिल्म के साथ नया इतिहास रचा। आज मौका है सौमित्र के जन्मदिन का तो उनकी सत्यजीत रे के साथ 10 बेहतरीन फिल्मों की बात करते हैं।
Soumitra Chatterjee: सौमित्र चटर्जी की ये हैं 10 कालजयी फिल्में, एक तो मार्टिन स्कोर्सेसे ने लपक ली
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अपूर संसार (1959)
फिल्मों में सौमित्र और सत्यजीत रे की जोड़ी बनना इत्तेफाक से शुरू हुई थी। दरअसल, सौमित्र एक बार सत्यजीत की फिल्म 'जलसाघर' की शूटिंग देखने गए थे। जब सत्यजीत की नजर सौमित्र पर पड़ी तो उन्होंने अपने मन ही मन उन्हें अपनी अगली फिल्म 'अपूर संसार' में साइन कर लिया था। हालांकि, इस बारे में सौमित्र नहीं जानते थे। सत्यजीत ने अचानक से सौमित्र का लोगों से परिचय सौमित्र चट्टोपाध्याय कहकर करवाया और बताया कि यह उनकी अगली फिल्म के हीरो है। इस बात ने किसी और को तो कम लेकिन सबसे ज्यादा सौमित्र को ही आश्चर्य में डाल दिया। आगे फिर सब इतिहास है।
देवी (1960)
सौमित्र ने अपने करियर की दूसरी फिल्म 'देवी' भी सत्यजीत रे के निर्माण और निर्देशन में ही की। यहां भी सौमित्र के साथ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिका में नजर आईं। यह कहानी शर्मिला टैगोर के किरदार दोयमोई की है जिसके ससुर कालिकिंकर चौधरी उसे देवी समझकर पूजने लगते हैं। जब दोयमोई के पति उमाप्रसाद को भनक लगती है तो वह दोयमोई को अपने घर से ले जाने की तैयारी कर लेता है ताकि मोहल्ले में उसकी देवी होने की अफवाह खत्म हो सके। यहां उमाप्रसाद का किरदार सौमित्र ने निभाया है। सौमित्र और सत्यजीत की यह फिल्म बड़ी हिट हुई।
तीन कन्या (1961)
कहानियों के संकलन वाली फिल्मों का चलन तो आजकल ज्यादा है लेकिन सत्यजीत रे ने तो वर्ष 1961 में ही 'तीन कन्या' शीर्षक वाली एंथोलॉजी फिल्म बनाई है। जैसा कि फिल्म का शीर्षक है, उस हिसाब से इस फिल्म की कहानियां भी तीन रहीं। हालांकि, फिल्म को जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किया गया तो इसमें सिर्फ दो ही कहानियां 'द पोस्टमास्टर' और 'समाप्ति- द कन्फ्यूजन' दिखाई गईं। दूसरे नंबर की कहानी 'मोनिहारा- द लॉस्ट ज्वेल' को अंतर्राष्ट्रीय वर्जन में छोड़ दिया गया। सौमित्र इस फिल्म की अंतिम कहानी का हिस्सा रहे जिसमें उन्होंने अमूल्य नाम का किरदार निभाया।
अभिजान (1962)
सौमित्र चटर्जी और सत्यजीत रे की जोड़ी एक बार फिर से बनी वर्ष 1962 की फिल्म 'अभिजान' में। इस फिल्म में सत्यजीत की फिल्मों के वह सभी तत्व मिलते हैं जिनके लिए सत्यजीत को जाना जाता है। फिल्म में सौमित्र चटर्जी ने मुख्य अभिनेता की भूमिका निभाई। उनका किरदार नारा सिंह का रहा जो एक कैब ड्राइवर है। नारा सिंह के किरदार से प्रेरित होकर मार्टिन स्कोर्सेसे ने वर्ष 1976 में अपनी फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' बनाई जिसमें कैब ड्राइवर की मुख्य भूमिका निभाई अभिनेता रॉबर्ट डे नीरो ने। मार्टिन ने खुद भी अपने काम को सत्यजीत से प्रेरित बताया।