भारतीय सिनेमा में बाहर से जितनी चकाचौंध दिखती है, अंदर जाकर उतना ही अंधेरा है। यहां पर स्टार किड्स के लिए रास्ता तो बहुत आसान है लेकिन जिनका इस इंडस्ट्री से कोई लेना देना नहीं रहा है उनके लिए यह रास्ता बहुत मुश्किल है। हॉटस्टार की वेब सीरीज 'हंड्रेड' में नजर आ रहे अभिनेता राजीव सिद्धार्थ भी बहुत मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि जो व्यक्ति एक्टिंग के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तैयार हो, इसके बारे में ही सोचता हो, और सिर्फ इसी के लिए मरता हो, तो ही वह अभिनय की दुनिया में अपना कदम रखे।
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अपने एक दोस्त का उदाहरण देते हुए राजीव ने बताया, 'मेरा एक दोस्त एक बार एमबीए की परीक्षा देने के लिए गया और वह उसमें फेल हो गया। वह मेरे पास वापस आया और फेल होने की वजह से मेरे सामने रोने लग गया। अब मैं उसे देख कर हंस रहा था। मैं उससे कह रहा था कि जहां तू सिर्फ एक बार फेल होने पर ही रो रहा है, ऐसे रिजेक्शन मैं न जाने कितनी बार झेल चुका हूं। सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि इस लाइन में बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को संघर्ष करना ही पड़ता है।'
अभिनय की तरफ अपनी रुचि पैदा होने के बारे में राजीव ने बताया, 'मैंने अपना कॉलेज खत्म करने के बाद एमबीए किया और मैं एक इन्वेस्टमेंट बैंक में नौकरी करने लगा। उस वक्त मेरी नौकरी बहुत अच्छी चल रही थी लेकिन फिर भी हर रोज कुछ अधूरा सा लगता था। मैं सोचता था कि पता नहीं ऐसा कब तक चलेगा? अचानक से मेरा मन पर्दे पर काम करने का करने लगा था। हालांकि, ऐसा नहीं है कि मैं उन दिनों कोई हीरोइन की एक्टिंग या फिर किसी हीरो का अभिनय देख रहा था। ऐसा कुछ नहीं था। बस अचानक से यह महसूस होने लगा कि मुझे भी ऐसा करना चाहिए।'
राजीव ने बिना सोचे समझे अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़ दिया था। वह कहते हैं, 'अभिनय करने की बात जब मैंने अपने बॉस को बताई तो उन्होंने मुझसे मजाक में कहा कि क्या हीरो बनना है? तब मैंने ऐसा कुछ कहा नहीं था और ना ही सोचा था। मैंने बिना सोचे समझे नौकरी छोड़ दी। मेरा भाग्य अच्छा था उस नौकरी को छोड़ने के आठ महीने बाद ही मुझे एक नाटक में 'आधे अधूरे' में काम मिल गया। इसे मोहन राकेश ने लिखा था और इसमें लिलेट दुबे ने भी काम किया। ऐसे बेहतरीन कलाकारों के साथ काम करने का वह पहला ही मौका मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी।'
राजीव को अपनी पहली फिल्म कॉलेज से ही मिल गई थी। वह बताते हैं, 'जिस वक्त मुझे मेरी पहली फिल्म 'दिल दोस्ती ईटीसी.' मिली, उस वक्त मैं कॉलेज में पढ़ रहा था। जब इस फिल्म की शूटिंग के लिए लोग हमारे कॉलेज में आए तब उन्होंने हमसे पूछा है कि अभिनय कौन-कौन करना चाहता है? तो हम सभी ने हाथ उठा दिया। और जब उसके लिए ऑडिशंस हुए तो मैंने भी दिया। उन्हें मेरा काम अच्छा लगा और उन्होंने मुझे इस फिल्म के लिए साइन कर लिया। वहां से मुझे लगा कि यह काम बहुत अच्छा है। इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है।'
ऑल्ट बालाजी की एक वेब सीरीज में समलैंगिक व्यक्ति का किरदार निभाने के बारे में राजीव ने कहा, ''रोमिल और जुगल' समलैंगिक संबंधों पर आधारित जरूर है लेकिन मेरे सामने उसमें कोई परेशानी नहीं आई। इसकी जो निर्देशक हैं नूपुर अस्थाना, उनकी इस मुद्दे पर बहुत अच्छी पकड़ थी। उन्होंने इस पूरी वेब सीरीज को बहुत ही अच्छे से फिल्माया। यह किरदार मेरे लिए एक नया अनुभव था और मैंने उसको बहुत अच्छे से करने की कोशिश भी की। यह बहुत अच्छा रहा कि ऐसा किरदार निभाने के बाद भी इस बारे में किसी ने मुझपर कोई टिप्पणी नहीं की। शूटिंग के दौरान सेट पर भी माहौल काफी अच्छा था और सब कुछ बहुत अच्छे से हो गया।'
राजीव का नाम दो नामों से मिलकर बना है। सामान्यतः बच्चों के नाम के पीछे उनके पिता का नाम जोड़ दिया जाता है। लेकिन, राजीव के साथ उल्टा हुआ। वह बताते हैं, 'मेरा नाम तो वैसे सिद्धार्थ है। लेकिन, मेरी मां के दिल में ना जाने क्या बात आई होगी कि उन्होंने मेरे नाम के आगे राजीव लगा दिया। दरअसल मेरे पिताजी का नाम राजीव है। उन्होंने मेरे भले के लिए कुछ सोचा हो या फिर वह इसको शुभ मानती हों, उन्होंने मेरे पिताजी का नाम मेरे नाम के आगे लगा दिया। इसके आगे मुझे कुछ नहीं पता।'
