हिंदी सिनेमा की सबसे सुपरहिट फिल्म शोले की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। इस फिल्म को रिलीज हुए 43 साल हो चुके हैं, लेकिन यह फिल्म आज भी कई दर्शकों की पहली पसंद है। साल 1975 में रिलीज हुई शोले के अनेकों किस्से भी हैं जो अक्सर फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों द्वारा सुनने को मिलते हैं। इस बीच शोले के 43 साल पूरे होने पर इसको एक बार फिर से बड़े परदे पर दिखाया गया है।
अंग्रेजी वेबसाइट डीएनए ही खबर के अनुसार बीते दिनों फिल्म शोले की दिल्ली के खास ऑडिटोरियम में स्पेशल स्क्रीनिंग की गई। बताया जा रहा है कि शोले की यह स्पेशल स्क्रीनिंग एक हजार दृष्टि बाधित दिव्यांग बच्चों के लिए की गई। खास बात यह है कि शोले को स्पेशल ऑडियो, शीर्षक, उपशीर्षक के साथ प्रदर्शित किया गया। इस मौके पर दिल्ली-एनसीआर के तकरीबन सभी सरकारी और एनजीओ से जुड़े दृष्टिबाधित बच्चे मौजूद थे।
खबरों की मानें तो दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में शोले की यह स्पेशल स्क्रीनिंग एक एनजीओ द्वारा की गई। इस एनजीओ ने कई बॉलीवुड फिल्मों का ऑडियो-वर्णन किया है और शिक्षा, सहायक प्रौद्योगिकी समाधान और समावेशी मनोरंजन के क्षेत्र में प्रयासों के लिए इस एनजीओ को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है।
बता दें कि ऐसा पहला मौका है जब फिल्म शोले के साथ खास दर्शकों के लिए ऐसा प्रयोग किया गया है। इस फिल्म के साउंड से लेकर ऑडियो डिस्क्रिप्टर तक हर स्तर पर काफी काम किया गया है। दृष्टी बाधित दिव्यांग बच्चों ने फिल्म का न केवल आनंद लिया बल्कि शोले की जमकर तारीफ भी की है।
आपको बता दें कि फिल्म शोले हिंदी सिनेमा की यह एक ऐतिहासिक फिल्म मानी जाती है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई यह फिल्म 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में धमेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी और संजीव कुमार मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था।