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Sriram Raghavan: बस पांच मिनट में समझिए श्रीराम की पांचों फिल्मों का तिलिस्म, हर फिल्म मील का पत्थर

Wed, 23 Jun 2021 08:07 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 23 Jun 2021 08:07 AM IST
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Sriram Raghavan World Of Cult Crime Films Ek Hasina Thi Johnny Gaddaar Agent Vinod Badlapur Andhadhun
श्रीराम राघवन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी सिनेमा में गिनती के ही निर्देशक हुए हैं जिनके प्रशंसक उनकी हर फिल्म का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 23 जून 1963 को जन्मे निर्देशक श्रीराम राघवन की पहली फिल्म ‘एक हसीना थी’ साल 2004 में रिलीज हुई और उनकी पिछली फिल्म ‘अंधाधुन’ साल 2018 में। इन दिनों वह मशहूर अभिनेत्री कैटरीना कैफ और दक्षिण भारत के सुपरस्टार विजय सेतुपति के साथ फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ की तैयारियों में जुटे हैं। यह फिल्म अप्रैल में शुरू होनी थी लेकिन अब इसकी शूटिंग कैटरीना और सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर 3’ के बाद शुरू होगी। श्रीराम की इस फिल्म की तैयारियां जोरों पर हैं और सब कुछ ठीक रहा तो श्रीराम इसी साल परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल की बायोपिक ‘इक्कीस’ पर भी काम शुरू कर देंगे। उनके जन्मदिन पर आइए समझते हैं कि आखिर उनकी हर फिल्म हिंदी सिनेमा के लिए एक कल्ट फिल्म कैसे बनती रही है। उससे पहले एक खास बात ये भी नोट करने लायक है कि इंटरनेट पर अधिकतर वेबसाइट्स उनका जन्मदिन 22 जून बताती हैं लेकिन खुद श्रीराम के मुताबिक उनका जन्मदिन 23 जून को ही होता है। 

Sriram Raghavan World Of Cult Crime Films Ek Hasina Thi Johnny Gaddaar Agent Vinod Badlapur Andhadhun
फिल्म एक हसीना थी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एक हसीना थी (2004)
श्रीराम राघवन को अपराध कथाओं से खास लगाव है। टेलीविजन पर उन्होंने ‘आहट’ और ‘सीआईडी’ के तमाम एपिसोड्स लिखे हैं। स्टार बेस्ट सेलर की कहानी ‘फर्स्ट किल’ और उससे पहले रघुवीर यादव के साथ बनाई अपनी डॉक्यूफिक्शन ‘रमन राघव’ के निर्देशन से उन्होंने  फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा का ध्यान अपनी तरफ खींचा। रामगोपाल वर्मा के साथ श्रीराम ने लंबा वक्त बिताया और तब जाकर उन्हें मौका मिला अपनी पहली फिल्म ‘एक हसीना थी’ बनाने का। ये फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर के करियर की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है। इसमें उर्मिला ने एक ऐसी प्रेमिका का रोल निभाया जिसे उसका प्रेमी धोखे से जेल पहुंचा देता है। जेल से छूटने के बाद वह कैसे उससे योजनाबद्ध तरीके से बदला लेती है और कैसे उसका अंत करती है, इसे बहुत ही रोचक तरीके से श्रीराम ने इस फिल्म में दर्शाया है। ये पहली फिल्म है जिसमें अभिनेता सैफ अली खान ने निगेटिव किरदार निभाया और खूब वाहवाही लूटी।

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फिल्म जॉनी गद्दार - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जॉनी गद्दार (2007)
श्रीराम राघवन की दूसरी फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ साल 2007 में रिलीज हुई। हिंदी सिनेमा में अपनी तरह की ये भी एक अनोखी फिल्म रही। मशहूर गायक मुकेश के पौत्र व गायक नितिन मुकेश के पुत्र नील नितिन मुकेश की ये डेब्यू फिल्म है। फिल्म में धर्मेंद्र, जाकिर हुसैन, विनय पाठक, गोविंद नामदेव, दयानंद शेट्टी, अश्विनी कलसेकर के अलावा रिमी सेन भी एक खास भूमिका में हैं। श्रीराम फ्रेंच सिनेमा से काफी प्रभावित रहे हैं। इस फिल्म में भी वह ‘सिम्फनी पोर उन मैसेकर’ से प्रेरित दिखते हैं। इस फिल्म की पटकथा ही इसकी जान है। कैसे फिल्म का हीरो अपने ही साथियों को लूटने की योजना बनाता है और कैसे इस लूट में अपना नाम आने से बचाने के लिए गोवा, पुणे और मुंबई के बीच यात्राएं करता रहता है, यही फिल्म की जान है। इसी फिल्म से श्रीराम ने पुरानी हॉलीवुड और हिंदी फिल्मों के दृश्यों और गानों को अपनी कहानी में पिरोना शुरू किया। ये फिल्म जिस साल रिलीज हुई, उस साल दर्शक ‘ओम शांति ओम’, ‘वेलकम’, ‘चक दे इंडिया’, ‘पार्टनर’ और ‘तारे जमीन पर’ जैसी एक लाइन पर चलने वाली कहानियों पर फिदा थे। श्रीराम की ये फिल्म समय से पहले की फिल्म रही और बाद में इसी फिल्म को दर्शकों ने एक कल्ट फिल्म का दर्जा दिया।

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फिल्म एजेंट विनोद - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एजेंट विनोद (2012)
सैफ अली खान ने श्रीराम राघवन के टैलेंट को अपनी फिल्म ‘एक हसीना थी’ में ही पहचान लिया। वह फिल्म निर्माता बने तो उन्होंने श्रीराम को ही फिल्म ‘एजेंट विनोद’ निर्देशित करने के लिए साइन किया। करीना कपूर फिल्म की हीरोइन बनीं, लेकिन श्रीराम राघवन ने इस फिल्म में अपने करियर में पहली बार वह सब कुछ किया जो फिल्म के हीरो सैफ अली खान चाहते थे। श्रीराम मानते भी हैं कि वह इस फिल्म की मेकिंग के दौरान भावनाओं में बह गए थे। सलमान खान के ‘टाइगर’ बनने से पहले सैफ अली खान इस फिल्म में रॉ के एजेंट बने थे। जासूसी दुनिया के भीतर की कहानी कहने की कोशिश करती फिल्म ‘एजेंट विनोद’ बहुत बड़े बजट की फिल्म थी और दिखावा श्रीराम राघवन की फितरत में ही शामिल नहीं है। जाहिर है दूसरे के मन से बनाई श्रीराम की ये फिल्म फ्लॉप रही। दिनेश विजन इस फिल्म के सह निर्माता थे, जिनके साथ श्रीराम राघवन के रिश्ते आज भी बहुत अच्छे हैं। वह ही श्रीराम की फिल्म ‘बदलापुर’ के निर्माता बने, उनकी निर्माणाधीन फिल्म ‘इक्कीस’ भी श्रीराम ही बना रहे हैं।

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फिल्म बदलापुर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बदलापुर (2015)
साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म ‘बदलापुर’ ने श्रीराम राघवन को फिर एक बार हिंदी सिनेमा के चोटी के निर्देशकों में ला खड़ा किया। इटालियन उपन्यास ‘डेथ्स डार्क एबिस’ पर बनी ये फिल्म वरुण धवन को सितारों की पहली कतार में आगे लाने करने में सफल रही। वरुण धवन को इसी फिल्म के बाद गंभीर अभिनेता भी माना गया हालांकि अपनी बाद की फिल्मों से वरुण ने खुद ही इस ब्रांडिंग को पलीता लगा दिया। वरुण का किरदार रघु इस फिल्म में अपनी पत्नी और बेटे की मौत के जिम्मेदार दो बैंक लुटेरों के पीछे लगा हुआ है। एक प्राइवेट जासूस की मदद से वह मुख्य लुटेरे लियाक की गर्लफ्रेंड तक पहुंचता है। लियाक का पार्टनर बैंक लूट के पैसे लेकर कहीं अलग रह रहा है। जिस तरह श्रीराम ने सैफ अली खान को ‘एक हसीना थी’ में उनकी इमेज के बिल्कुल विपरीत परदे पर पेश किया था, वही काम यहां उन्होंने वरुण धवन के साथ किया। फिल्म सुपरहिट रही और श्रीराम एक बार फिर रातोंरात हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा निर्देशक बन गए।

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