सुरेश ओबेरॉय फिल्मी गलियारों में हीरो बनने का सपना लेकर आए थे। हालांकि, हीरो के बजाए वह विलेन की भूमिका में फिट बैठ गए। उन्होंने कई फिल्मों में रोल प्ले कर अपने जमाने के कई स्टार्स को मात दी। सुरेश राष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम कर चुके हैं। अनुभवी अभिनेता विवेक ओबेरॉय के पिता हैं। आइए सुरेश ओबेरॉय के जन्मदिन के खास अवसर पर उनके जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं-
Suresh Oberoi Birthday: विलेन बन हीरो पर भारी पड़े सुरेश ओबेरॉय, पाकिस्तान से रहा ये खास नाता
बॉलीवुड फिल्मों के दमदाम विलेन में से एक सुरेश ओबेरॉय आज अपना 78वां जन्मदिन मना रहे हैं। आइए उनके जीवन के कुछ अनकहे पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं-
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400 रुपये लेकर मुंबई आए थे सुरेश
बॉलीवुड फिल्मों के दमदार विलेन में से एक सुरेश ओबेरॉय का जन्म 17 दिसंबर, 1946 को अभी के बलूचिस्तान स्थित क्वेटा में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। 1947 में देश का विभाजन हुआ, जिसके बाद उनका परिवार भारत आ गया। भारत आने के बाद वो और उनका परिवार शुरुआत में पंजाब में रहा। फिर वो हैदराबाद शिफ्ट हो गए। अदाकारी में दिलचस्पी होने के कारण सुरेश मायानगरी मुंबई आ गए। जब वह मुंबई आए थे, तब उनकी जेब में मात्र 400 रुपये थे। आज अपने अभिनय के दम पर वह करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक हैं।
'जीवन मुक्त' से की करियर की शुरुआत
सुरेश ओबेरॉय बॉलीवुड का एक ऐसा नाम है जो फिल्मों में छोटे रोल निभाएं या बड़े, उनकी दमदार आवाज हीरो पर भारी पड़ जाती थी। सुरेश ओबेरॉय ने अपना करियर रेडियो से शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग की शुरुआत और फिर फिल्मों में हाथ आजमाया। सुरेश ओबेरॉय ने 1977 में फिल्म 'जीवन मुक्त' से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘काला पत्थर’ सुरक्षा, कर्तव्य जैसी फिल्में में सहायक अभिनेता के तौर पर काम किया।
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'मिर्च मसाला' के लिए जीता राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
1980 में आई फिल्म 'एक बार फिर' में उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला। इस फिल्म में उनके काम को तो सराहा गया, लेकिन उनकी ये फिल्म कमाल नहीं दिखा पाई। सुरेश ओबेरॉय को 1987 में 'मिर्च मसाला' फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग रोल के लिए राष्ट्रीय फिल्म का पुरस्कार मिला था। इन्हें फिल्म 'घर एक मंदिर' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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सुरेश ओबेरॉय की निजी जिंदगी
साल 2000 से पहले सुरेश ओबेरॉय हर एक साल में पांच फिल्में देते थे। करीब 150 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले सुरेश ने साल 2009 से फिल्मों से दूरी बनानी शुरू कर दी। साल 2009 में उन्होंने फिल्म 'वर्ल्ड कप' में काम किया था। इसके बाद साल 2013 में एक कन्नड़ फिल्म भी की थी। अभिनेता को साल 2019 में फिल्म 'मणिकर्णिका' में देखा गया था। हालांकि, अब वह लाइमलाइट से दूर हैं। सुरेश ओबेरॉय ने 1 अगस्त 1974 को यशोधरा से मद्रास में शादी की थी। उनकी पत्नी पंजाबी परिवार से हैं। कपल के बेटे का नाम विवेक ओबेरॉय है जो कि खुद भी पेशे से एक अभिनेता हैं और उनकी एक बेटी भी हैं, जिनका नाम मेघना ओबेरॉय है।