सुशांत सिंह राजपूत के निधन को 14 अक्तूबर को पूरे चार महीने हो गए हैं। सुशांत की मौत की गुत्थी अब तक सुलझ नहीं पाई है। मामला इस समय सीबीआई के हाथों में है, वहीं एनसीबी भी इस मामले की जांच में जुटी हुई है। इस बीच अभिनेता के निधन को चार महीने का समय बीतने पर उनका परिवार भावुक नजर आया। सुशांत सिंह राजपूत के जीजा विशाल कीर्ति ने सोशल मीडिया के द्वारा अपना दर्द बयां किया है।
Sushant Singh Rajput: सुशांत सिंह राजपूत की मौत के चार महीने बीतने पर छलका जीजा का दर्द, बताईं परिवार की मुश्किलें
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सुशांत के जीजा विशाल कीर्ति सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति और जीजा विशाल कीर्ति दोनों विदेश में रहते हैं। ऐसे में दोनों ही सोशल मीडिया के जरिए लगातार सुशांत के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। विशाल अक्सर सुशांत से जुड़ी कई बातें सोशल माडिया के जरिए साझा करते रहते हैं। अब हाल ही में उन्होंने सुशांत की मौत के चार महीने बीत जाने पर परिवार ने इतने समय में क्या- क्या मुश्किलें झेली हैं, इस बारे में बताया है।
विशाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के जरिए एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में विशाल ने तीन प्वॉइंट्स लिखे हैं। जिसके जरिए उन्होंने बताया है कि परिवार इस समय किन मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहा है। विशाल ने लिखा, 'अगर किसी के खिलाफ जुर्म हुआ है और वे केस फाइल करते हैं और हम उन्हीं की ही छवि खराब करने लगते हैं तो इसका मतलब है कि हम उन्हें न्याय देने से इनकार कर रहे हैं। हमेशा ऐसी योजनाओं पर गौर करें। ये योजनाएं शक के बीज डालने के लिए होती हैं ताकि सच जानने से ध्यान हट सके।'
If a crime‘s committed against someone & they file a case & we start maligning the plaintiff,we are trying to deny them justice.Always be watchful of such plans.Such plans work by spreading seeds of doubt so that the focus moves away from the quest4 truth & towards victim blaming pic.twitter.com/Nd0qbKv962
विशाल ने तीन प्वॉइंट भी शेयर किए हैं। इनमें लिखा है, उस भयानक दिन को चार महीने बीत गए। आज मेरा सिर्फ यही संदेश है कि जब पीड़ित या पीड़ित के परिवार को निशाना बनाया जाता है तो यह उनको सहानुभूति ना देने और दुनिया को ये फील कराने के लिए होता है कि वे न्याय पाने के काबिल नहीं। जब कोई अपराध होता है तो पीड़ित के परिवार के भावनात्मक उतार-चढ़ाव को समझना बेहद जरूरी है। जरा रुककर सोचिए।
परिवार को सिर्फ दुख और हानि से ही नहीं जूझना बल्कि उन्हें जांच एजेंसियों और कोर्ट सिस्टम को भी सपोर्ट करना है। केस कुछ दिन चल सकता है, लोग आगे बढ़ जाएंगे लेकिन परिवार नहीं। अगर आपको लगता है कि परिवार के लिए ये मनचाही स्थिति है तो फिर से सोचिए। पीड़ित को ही प्रताड़ित करना किसी देश की न्याय प्रणाली को चोट पहुंचाने और हर किसी के लिए न्याय पाने को मुश्किल बनाने जैसा है।
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