सुशांत सिंह राजपूत के निधन को ढाई महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है। मुंबई पुलिस, बिहार पुलिस से होते हुए अब इस केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय भी कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। वहीं ड्रग एंगल सामने आने के बाद नारकोटिक्स ब्यूरो भी जांच में जुट गई है। मामला सुलझने की जगह दिनों दिन और उलझता दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस केस को अंजाम तक पहुंचने में कितना वक्त लगेगा इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। सुशांत और अमेरिकी अभिनेत्री मर्लिन मुनरो का केस देखें तो कई समानताएं नजर आती हैं। मर्लिन मुनरो की जिंदगी के जितने राज सामने आए उससे ज्यादा पर्दे के पीछे छुपे रहे।
आज तक नहीं सुलझी मर्लिन मुनरो की मौत की गुत्थी, जानिए जिंदगी के अनसुने किस्से
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मर्लिन मुनरो सदाबहार खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं। वो कैमरे के सामने हमेशा जवान ही रहीं। उनकी मौत भी बहुत जल्दी हो गई थी। हॉलीवुड की अन्य अभिनेत्रियों एलिजाबेथ टेलर, डेबी रेनॉल्ड्स और जेन रसेल की तरह वो कभी बुजुर्ग नहीं दिखीं। इस वजह से भी उनकी खूबसूरती एक पैमाना बन गई। उनके भूरे बाल, अलसाई आंखें और दिलकश मुस्कान उनके किरदार को बाकी सबसे अलग करती थीं। वो बेफिक्र दिखकर भी लुभावनी लगती थीं हालांकि वो असल में कितनी बेफिक्र थीं, इस पर आज भी उनकी फिल्मों से ज्यादा बहस होती है।
मर्लिन मुनरो की चकाचौंध भरी जिंदगी रहस्यमयी मौत पर खत्म हो गई। उनका नाम अमरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी से लेकर गायक फ्रैंक सिनात्रा और बेसबाल खिलाड़ी जो डिमैगियो तक से जुड़ा। मुनरो ने कई शादियां भी कीं जो नाकाम रहीं। उनकी जीवनी लिखने वालों ने उनकी तमाम लतों और दिमागी बीमारी के बारे में काफी लिखा है। उनका बचपन अभाव के बीच बीता, फिर अनाथालय में पालन हुआ। जवानी के दिनों में मर्लिन के संबंध तमाम पुरुषों से थे। उनके साथ शोषण हुआ। प्यार के लिए तरसती मुनरो की संदिग्ध मौत की बातें भी जगजाहिर हैं।
मर्लिन मुनरो की जिंदगी के कई किस्से तब उजागर हुए जब 2010 में उनके निजी कागजात छपे थे। इन दस्तावेजो में मुनरो के अपने हाथ से लिखे खत, कविताएं और रोजाना के किस्से शामिल हैं। मर्लिन मुनरो ने 40 के दशक में जेम्स डोहर्टी से अपनी शादी के बारे में काफी कुछ लिखा है। उन्होंने लिखा है, ''ये सारे ख्याल बयां करते हुए, ये लफ्ज लिखते-लिखते मेरे हाथ कांप रहे हैं। मगर मैं रुकूंगी नहीं, तब तक लिखती रहूंगी जब तक मेरे दिल के सारे एहसास बयां नहीं हो जाते।''
अपनी नोटबुक में एक जगह मुनरो लिखती हैं, ''मैं कभी-कभी इंसानों का साथ बर्दाश्त नहीं कर पाती। मुझे पता है कि उनकी अपनी दिक्कतें हैं, ठीक उसी तरह जैसे कि मेरी अपनी परेशानियां। फिर भी मैं उनकी बातें सुन-सुनकर थक गई हूं। उनकी परेशानियां समझने, उन्हें हौसला और मदद दे-देकर मैं थक गई हूं।''
एक अभिनेत्री होने पर मर्लिन मुनरो लिखती हैं, ''मेरी पहली ख्वाहिश हीरोइन बनना था, बिना इस बारे में शर्मिंदा हुए मैं ये काम करना चाहती थी। मैं इसके लिए तकलीफ बर्दाश्त करने को भी तैयार हूं।'' वो एक जगह ये भी लिखती हैं कि उन्हें पता है कि वो कहां से आती हैं। उन्हें हवा में उड़ने की कल्पना करते हुए ये पता है कि जमीन पर उनके पांव कहां पर थे।

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