सुशांत सिंह राजपूत मामले में रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत सिंह के मैनेजर रहे सैमुअल मिरांडा को 9 सितंबर तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में भेज दिया गया है। ड्रग्स सप्लाई करने के संदिग्ध कैजान को भी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इसके बाद एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत के घरेलू सहायक दीपेश सावंत को भी ड्रग्स खरीदने और उसके लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया। एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने बताया है कि सावंत को डिजिटल सबूतों और बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।
सुशांत सिंह राजपूत मामले में सामने आया ड्रग्स कनेक्शन, जानिए दोष साबित होने पर कितनी मिल सकती है सजा?
क्या है एनडीपीएस एक्ट
इन मामले से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) जैसी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां और एनडीपीएस ऐक्ट भी सुर्खयों में आ गए हैं। बीबीसी के लिए कीनूनी मामलों को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती बताते हैं कि शौविक चक्रवर्ती और सैमुअल मिरांडा को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज ऐक्ट, 1985 (एनडीपीएस) के सेक्शन 20बी, 28 और 29 के तहत गिरफ्तार किया गया है। एनडीपीएस ऐक्ट का सेक्शन 20बी के तहत ड्रग्स की खरीदारी, उत्पादन, अपने पास रखने, खरीद-फरोख्त करने और इसे ट्रांसपोर्ट करने को अपराध माना गया है। एनडीपीएस एक्ट के सेक्शन 28 में अपराध करने की कोशिश के तहत सजा दिए जाने का प्रावधान है। सेक्शन 29 उकसाने और आपराधिक षड्यंत्र के लिए सजा देना शामिल है।
सुचित्र मोहंती कहते हैं कि शौविक चक्रवर्ती, सैमुअल मिरांडा पर इन्हीं चीजों के आरोप लगाए गए हैं, और दोषी पाए जाने पर उन्हें 10 साल तक की सजा दी जा सकती है। एनसीबी को 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी।
पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्व के देशों में ड्रग्स के इस्तेमाल और इसके कारोबार में लगे लोगों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय दुबे कहते हैं कि भारत में एनडीपीएस एक्ट के तहत कनविक्शन रेट (सजा जिए जाने की दर) काफी ज्यादा है। वे कहते हैं, "इसमें तकरीबन 95 फीसदी कनविक्शन रेट है। हालांकि, वे कहते हैं कि कई बार ऐसा होता है कि लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जाता है और निचली अदालतों में उन्हें दोषी ठहरा दिया जाता है। दुबे कहते हैं, "जब केस ऊपरी अदालतों में पहुंचता है तो फैसले बदल जाते हैं।"
एनडीपीएस के तहत सजा के प्रावधान
एनडीपीएस एक्ट की धाराएं अफीम-18(ग), कैनबिस-20, कोका-16 के तहत लाइसेंस के बिना अफीम, भांग या कोका के पौधों की खेती करने पर 10 साल तक की सजा या 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस एक्ट की धारा 24 के तहत देश के बाहर से ड्रग्स लाने और इसकी आपूर्ति करने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 10 से 20 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
ड्रग्स ट्रैफिकिंग पर लगाम लगाने के मकसद से नारकोटिक्स ड्रग्स की खेती करने, इसके उत्पादन, खरीद-फरोख्त, अपने पास रखने, इस्तेमाल करने, आयात-निर्यात करने के लिए कड़ी सजा रखी गई है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 31ए के तहत ड्रग्स से जुड़े अपराधों को दोहराने के लिए सबसे सजा यानी मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। अब तक दुनिया के 32 देशों में नारकोटिक्स से जुड़े अपराधों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।
एडवोकेट संजय दुबे कहते हैं, "हमारे यहां एनडीपीएस एक्ट 1985 में आया और इसके बाद से इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ है। वक्त की जरूरत को समझते हुए इसमें बदलाव करने की जरूरत है।" सुचित्र मोहंती कहते हैं, "भारत में ड्रग्स के धंधे से जुड़े या इसका इस्तेमाल करने वाले शायद ही किसी शख्स को सजा मिल पाती है।" वे कहते हैं कि शौविक और सैमुअल को कैसी सजा हो पाती है यह पुलिस की छानबीन पर निर्भर करता है।