Teaser Review: तांडव (वेब सीरीज)
टीजर से ट्रेलर और ट्रेलर से पिक्चर तक आते आते वैसे तो तमाम कहानियों का आयोडीन उड़ जाता है लेकिन बतौर निर्माता अपनी पहली ही फिल्म ‘खाली पीली’ से हाथ जला बैठे चर्चित निर्देशक अली अब्बास जफर की ये वापसी दमदार दिखती है। अली अब्बास जफर अच्छे स्टोरीटेलर हैं, ये वह अपनी फिल्मों ‘सुल्तान’, ‘टाइगर जिंदा है’ और ‘भारत’ से साबित भी कर चुके हैं। लेकिन, इस बार वह ये भी साबित करते दिख रहे हैं कि सृजन के मामले में उनको ज्यादा दबाव में न रखा जाए तो वह ‘तांडव’ फिर से कर सकते हैं।
#TandavOnPrime: खाली पीली नहीं दिल्ली में रचा गया ‘तांडव’, ये होगा जब किसानों से आ मिलेंगे छात्र
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अली ने अपनी इस वेब सीरीज की शुरूआत के समय ही बताया था कि ये एक पॉलीटिकल थ्रिलर है। और, इसकी कहानी दिल्ली की सियासत के आसपास घूमती है। सीरीज का टीजर गुरुवार को सामने आया तो ये दिखता भी है। एक अहाते में इकट्ठा भीड़ नारे लगा रही है। हाथ में छात्र किसान एकता के पोस्टर भी लिए है। और, नेपथ्य से तिगमांशू धूलिया की भारी आवाज उभरती है, “हिंदुस्तान को सिर्फ एक ही चीज चलाती है, राजनीति। इस देश में जो प्रधानमंत्री है वही राजा है...!”
पूरे माहौल का खुलासा सिर्फ एक लाइन से कर देने वाले इस टीजर में सैफ अली खान के साथ सितारों की पूरी बारात बहुत ही दमदार पार्श्व संगीत के साथ एक एक कर परदे पर उभरती है। डिंपल कपाड़िया ‘टेनेट’ के बाद फिर एक बार सत्ता की दलाली सी करती नजर आ रही हैं। तिगमांशू धूलिया और कुमुद मिश्रा के चेहरे कहानी के चौखाने सेट करते दिखते हैं और इसमें हुस्न का तड़का लगाती हसीनाएं भी हैं।
वेब सीरीज ‘तांडव’ का टीजर मोहम्मद जीशान अयूब की मौजूदगी से जवानी का उन्वान पाता है तो डीनो मोरिया, अनूप सोनी और परेश पाहूजा जैसे कलाकार इसका नाता एक पीढ़ी के पहले के दर्शकों से भी जोड़ते हैं। कृतिका कामरा, गौहर खान और सारा जेन डायस की इस कहानी में क्या भूमिकाएं होंगी, ये तो शायद ट्रेलर में खुलासा हो लेकिन बतौर निर्माता एक नई यात्रा पर निकले अली अब्बास जफर ने वेब सीरीज के क्षेत्र में नया पैमाना अपने टीजर से ही सेट कर दिया है।
अमेजन प्राइम वीडियो ने सीरीज ‘तांडव’ का टीजर ऐसे समय में रिलीज किया है जब देश की राजधानी के प्रवेशद्वारों पर किसान हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में जमे हुए हैं। देश का सर्वोच्च न्यायालय मामले की सुनवाई कर रहा है। जानकार बता भी रहे हैं कि किसानों के इस आंदोलन से अगर बेरोजगारों की मजबूरी भी आ जुड़ी तो फिर मामला किसी ‘तांडव’ से कम नहीं होगा।
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