कॉस्ट्यूम डिजाइनर नचिकेत बर्वे को 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उनको यह अवॉर्ड उनकी फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' के लिए मिला है। इस फिल्म को बेस्ट कॉस्ट्यूम के साथ-साथ बेस्ट पॉपुलर फिल्म और बेस्ट एक्टर अवॉर्ड (अजय देवगन) भी मिला। इस फिल्म के लिए महेश शेरला के साथ नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले नचिकेत बर्वे कहते है, 'मुझे तो अवॉर्ड के बारे में पता ही नहीं था। ये तो फिल्म के निर्देशक ओम राउत ने मुझे बधाई देने के लिए फोन किया तो मुझे इसके बारे में पता चला। हमारे लिए तो यह ट्रिपल सेलिब्रेशन है। यह एक बहुत ही सुखद पल है और मुझे तो एक पल को यूं लगा कि मैं चांद पर पहुंच गया हूं।' नचिकेत ने फिल्म के शोध के दौरान की गई तैयारी की तस्वीरें भी अमर उजाला के साथ साझी कीं।
Nachiket Barve: तानाजी की वेशभूषा तैयारी की रोचक तस्वीरें, डॉक्टरों के परिवार से निकला बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नचिकेत बर्वे चिकित्सकों के परिवार से आते हैं, लेकिन लीक से इतर चलने वाले सपूतों की तरह उन्होंने कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग को अपना पेशा चुना। नचिकेत बताते हैं, 'फिल्म 'तानाजी: द असंग वॉरियर' की शूटिंग शुरू होने से दो साल पहले ही हमने फिल्म के किरदारों की वेशभूषा पर शोध शुरू कर दिया था। मेरे साथ करीब एक हजार लोगों ने काम किया। मैं इस अवॉर्ड का श्रेय उन सभी को देना चाहता हूं।'
नचिकेत बताते हैं, 'मैंने दुनिया भर में बहुत सारे संग्रहालयों का दौरा किया, अभिलेखागार गया और तथ्यों को जानने के लिए बहुत सारे निजी वस्त्र संग्रहों की मदद ली। छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे एक प्रतिष्ठित चरित्र के लिए वेशभूषा बनाने के लिए हमने बनारसी ब्रोकेड, मटका रेशम, चंदेरी आदि वस्त्रों का इस्तेमाल किया। आभूषणों को डिजाइन करने के लिए हमने 400 साल पुराने सांचों का इस्तेमाल किया और उन परिवारों से संपर्क किया जिनके पास ये पुश्तैनी सांचे थे।'
नचितेत बर्वे का का अपना खुद का नचिकेत के नाम से फैशन ब्रांड है। 'तानाजी' से पहले वह दो मराठी फिल्में 'कत्यार कलजात घुसाली' और 'डॉक्टर कांशीनाथ घाणेकर' में कास्ट्यूम डिजाइनर कर चुके है। 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' उनकी पहली हिंदी फिल्म है। नचिकेत कहते है, 'बचपन से ही मुझे फैशन में दिलचस्पी थी। मैंने फैशन की पढ़ाई अहमदाबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन से की है। तब इसमें हर बैच में सिर्फ नौ सीटें होती थीं। फिर मुझे पेरिस में पढ़ने के लिए फ्रांस सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप मिला। सिनेजगत में कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की मेरी शुरुआत अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के तनिष्क के विज्ञापन से हुई।'
नचिकेत बर्वे के पिता जयंत बर्वे, माता रेखा बर्वे और बहन देवयानी बर्वे पेशे से डॉक्टर हैं। घर में डॉक्टरी का माहौल होने के बावजूद नचिकेत ने डॉक्टर बनने के बारे में कभी नहीं सोचा। नचिकेत कहते है, 'मुझे भी मेडिकल में एडमिशन मिल रहा था लेकिन मुझे हमेशा से ही फैशन डिजाइनर ही बनाना था। जब पिता जी को इस बारे में बताया तो उन्होंने बहुत सपोर्ट किया। उस समय लोग डॉक्टर या फिर इंजीनियर बनते थे। लेकिन जब पिता जी को बताया तो उन्होंने यही कहा कि जो भी करना हो करो लेकिन अच्छा करो। आज एक अच्छे काम के लिए मुझे जो सम्मान मिला है, उसके पीछे मेरे परिवार का काफी योगदान रहा है।'