भारतीय सिनेमा में कभी आधे से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले हिंदी सिनेमा की भागीदारी बीते दो साल में घटकर चौथाई हो जाने के बाद से हिंदी फिल्मों के मुख्य निर्माण शहर मुंबई में अफरातफरी सी मची है। अमिताभ बच्चन से लेकर अजय देवगन, अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम और रणवीर सिंह तक की फिल्मों को दर्शक सिरे से नकार दे रहे हैं। वजह इसकी यही मानी जा रही है कि हिंदी सिनेमा एक ऐस भ्रमजाल में उलझ गया है जहां निर्माताओं में असली कहानियों तक पहुंचने की दिलचस्पी ही नहीं रही। कहा ये भी जाता है कि अच्छी और देशज कहानियां निर्माताओं तक पहुंच नहीं पा रहीं। ऐसे में मुंबई में सिर्फ कहानियों की तलाश करने वाली एक कंपनी खुली है जो देश भर के गांव, गली और कूचे से ये कहानियां निकालकर फिल्म निर्माताओं तक पहुंचाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: हर्षिता सक्सेना
Updated Fri, 20 May 2022 06:43 PM IST
सार
भारतीय सिनेमा में कभी आधे से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले हिंदी सिनेमा की भागीदारी बीते दो साल में घटकर चौथाई हो जाने के बाद से हिंदी फिल्मों के मुख्य निर्माण शहर मुंबई में अफरातफरी सी मची है।
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