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मीना कुमारी की ये हैं 10 दुखभरी अनुसनी कहानियां, हर कहानी उनके प्रशंसकों को रुलाती है खून के आंसू

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: दीपाली श्रीवास्तव Updated Thu, 01 Apr 2021 09:06 AM IST
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These Are The Ten Sad Untold Stories Of Tragedy Queen Meena Kumari
मीना कुमारी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

'टुकड़े टुकड़े दिन बीता, धज्जी धज्जी रात मिली, जिसका जितना आंचल था, उतनी ही सौगात मिली।' यह फलसफा दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी की उन्हीं की जुबानी है। सिनेमा जगत में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना जिंदगी भर सच्चे प्यार के लिए तरसती रहीं। मीना को पैदा होते ही पिता का पत्थरदिल रवैया, करियर के मुकाम पर महबूब की बेवफाई और पति की अग्निपरीक्षा नसीब हुई। पुरुष के प्रत्येक रूप ने उनके दिल को तार तार ही किया। अपने इस दर्द के बारे में खुद मीना कुमारी भी लिखती हैं, 'न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन, बड़े करीब से उठकर चला गया कोई।'  

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These Are The Ten Sad Untold Stories Of Tragedy Queen Meena Kumari
मीना कुमारी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

1 अगस्त 1933 को जन्मी मीना कुमारी की निजी जिंदगी में एक के बाद एक तमाम कोहराम आते गए। दर्द को झेलते झेलते वह शराब के आगोश में चली गईं और 31 मार्च 1972 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। मीना कुमारी की जिंदगी की कई ऐसी कहानियां है जिन्होंने उन्हें एक अलग शख्सियत प्रदान की। आज हम आपको मीना कुमारी की ऐसी ही दस कहानियों से रूबर करवाने जा रहे हैं-

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मीना कुमारी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अनाथालय में गूंजी पहली किलकारी

मीना कुमारी के पिता घर में एक बेटा चाहते थे। इस वजह से जब मीना का जन्म हुआ तो उनके पिता को यह बात बिल्कुल भी रास नहीं आई। मीना के जन्म के ठीक बाद उनके पिता उन्हें अनाथालय छोड़ आए थे। लेकिन औलाद से बिछड़कर मीना की मां का रो रोकर बुरा हाल हो गया था। जिसके बाद मीना के पिता उन्हें वापस ले आए।

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मीना कुमारी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बाल कलाकार के तौर पर शुरू किया करियर

मीना कुमारी के परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी। घर की सहायता करने के लिए मीना ने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था। छह साल की उम्र से ही उन्होंने साल 1939 में विजय भट्ट की फिल्म लेदरफेस में पहली बार काम किया। इस फिल्म में उन्होंने महजबीं का किरदार निभाया। यह मीना कुमारी का असल नाम भी था। इसके अलावा उन्होंने तमाम टीवी शोज में काम किया जिनमें धार्मिक शोज भी शुमार थे। इन शोज में उन्होंने देवी के किरदार निभाए।

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मीना कुमारी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

100 हफ्तों तक लगी थियेटर में फिल्म

साल 1952 में रिलीज हुई फिल्म बैजू बावरा से मीना कुमारी को असल शोहरत प्राप्त हुई। यह फिल्म लोगों को इतनी पंसद आई थी कि 100 हफ्तों तक थियेटर में लगी रही। 1954 में उन्होंने पहले फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्राप्त किया। इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली वह पहली अभिनेत्री थी।

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