बदलते समय के साथ बॉलीवुड में भी काफी चीजें बदल गई हैं। पहले के समय में लगभग सभी फिल्में पुरुषों पर केन्द्रित होती थीं। उनमें महिलाओं के किरदार अबला, मजबूर मां, सीधी सादी पत्नी और अपनी हद में रहने वाली एक बेटी तक ही सीमित थे। बदलते समय में बॉलीवुड में भी बदलाव आया है। महिलाओं पर आधारित कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जिनमें दिखाया गया है कि समाज में जितना योगदान एक पुरुष का है उतना ही योगदान महिला का भी है। इन फिल्मों के जरिए बॉलीवुड ने ये दिखाने की कोशिश की है औरतों ने अपनी हिम्मत के आगे किस्मत को पैरों पर झुकने के लिए मजबूर कर दिया है। आज हम आपको कुछ ऐसी चुनिंदा नारी प्रधान फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको इस महिला दिवस पर जरुर देखना चाहिए।
International Women's Day: लज्जा से राजी तक, इन फिल्मों में महिलाओं ने मनवाया अपने किरदार का लोहा
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लज्जा
राजकुमार संतोषी की यह फिल्म उस समय उन लोगों के मुंह पर एक तमाचा थी जो पहले तो नारी को देवी की तरह पूजते थे, बाद में उसे बोझ समझकर मां के गर्भ में ही मार देते थे। फिल्म में दिखाया गया है कि जहां पर महिलाओं का रेप होता है, उन्हें मारा-पीटा जाता है, दहेज के लिए जिंदा जला दिया जाता है, ऐसे में यही महिलाएं अगर काली का रुप धारण कर लें तो उस दाकियानूसी सोंच का और अत्याचारी लोगों का विनाश तय है।
नीरजा
यह फिल्म एक फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट पर बनी है। 2015 में आई इस फिल्म में सोनम कपूर ने दमदार अभिनय किया है। यह एक जीवनी पर आधारित फिल्म है, जिसके फॉक्स स्टार स्टूडियो के बैनर तले अतुल कशबेकर ने बनाया है। फिल्म में दिखाया गया है कि 5 सितंबर 1986 को मुंबई-न्यूयार्क उड़ान के दौरान प्लेन को कराची में आतंकवादियों द्वारा हैक कर लिया गया था। जिसके बाद नीरजा ने फ्लाइट में मौजूद लोगों की जान बचाने के लिए खुद की जान दे दी थी।
पिंक
अनिरुद्ध चौधरी द्वारा निर्देशित ये फिल्म 2016 में आई थी। इसमें दिखाया गया था कि समाज चाहे कितना भी मॉर्डन क्यों न हो जाए फिर भी लड़कियों के कपड़ों के जरिए ही उन्हें जज किया जाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि अगर कोई लड़की किसी लड़के के साथ हंस-हंसकर बात करती है या फिर छोटे कपड़े पहनती है तो उसका चरित्र ठीक नहीं है। इस फिल्म में एक और जरुरी मैसेज दिया गया है और वह ये है कि यदि कोई लड़की किसी लड़के को न बोलती है तो उसे सिर्फ और सिर्फ 'न' ही समझें।
इंग्लिश-विंग्लिश
श्रीदेवी की इस फिल्म का डायरेक्शन गौरी शिंदे ने किया था। ये एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसे अंग्रेजी नहीं आती है। वह अंग्रेजी सीखने के लिए क्लास ज्वाइन करती है क्योंकि उसके बच्चे और पति उसकी इस कमजोरी का मजाक बनाते हैं। बाद में श्रीदेवी अंग्रेजी सीखकर परिवार में सभी के अपनी वैल्यू बताती हैं।