इन दिनों फिल्में डिजिटल कैमरे पर शूट होती हैं और उनकी साथ के साथ एडीटिंग भी वहीं लोकेशन पर होती रहती है। लेकिन, ज्यादा दिन नहीं हुए जब फिल्में रील पर शूट होती थीं और उनकी एडीटिंग रीलों को काटकर होती थी। महीनों की मेहनत के बाद जितनी भी फिल्म तैयार होती, निर्माता, निर्देशक और फिल्म के खास लोग इसे देखते और जहां कहीं भी कमी दिखती थी, उसमें सुधार करते। आज का किस्सा एक ऐसी ही फिल्म से जुड़ा है जिसके 75 फीसदी बन जाने के बाद निर्माता को लगा कि ये फिल्म तो रिलीज करना ही मुश्किल है।
बाइस्कोप: जीतेंद्र, राजेंद्र कुमार के झगड़े में बिग बी को मिली ये फिल्म, पूनम ढिल्लों का हुआ डेब्यू
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तो मैं बात कर रहा था कि कैसे त्रिशूल के 75 फीसदी के करीब बन जाने के बाद इस फिल्म में कोई करंट ही इसके निर्माता गुलशन राय को नजर आ रहा था। हुआ यूं कि राजकमल स्टूडियो में फिल्म का ट्रायल रखा गया। फिल्म खत्म हुई तो गुलशन राय, निर्देशक यश चोपड़ा और फिल्म की लेखक जोड़ी सलीम-जावेद सब एक ही गाड़ी से निकले। काफी लंबा रास्ता तय करने के बाद गुलशन राय ने पूछा कि इस फिल्म का क्या कर सकते हैं, इसे रिलीज करेंगे तो पिक्चर चलेगी ही नहीं। इस पर सलीम खान बोले, तो मत रिलीज कीजिए ये फिल्म। सबसे आसान तरीका यही है इसको फ्लॉप होने से बचाने का। उस वक्त तो गुलशन राय कुछ बोले नहीं। बाद में यश चोपड़ा को उन्होंने फोन किया और इसकी शिकायत की कि ये क्या तरीका होता है बात करने का। तो यश चोपड़ा ने बात बनाई कि सलीम खान की आदत है मजाक करने की। चिंता मत कीजिए।
अगले दिन यश चोपड़ा और सलीम जावेद होटल हॉलीडे इन में मिले और ये तय हुआ कि इसमें कुछ एक्शन और डाल दिया जाए। कुछ और बदलाव भी तय हुए और 15 दिन की शूटिंग यश चोपड़ा ने फिल्म की और की। हालांकि, गुलशन राय को बताया यही गया कि सिर्फ पांच दिन की शूटिंग और करेंगे तो फिल्म ठीक हो जाएगी। ये पांच दिन खत्म हुए तो फिर पांच दिन और फिर पांच दिन और, इस तरह से गुलशन राय को मनाया गया। फिल्म त्रिशूल एक तरह से सलीम जावेद का भी लिटमस टेस्ट रही। अमिताभ के साथ वह जंजीर, दीवार और शोले जैसी सुपरहिट फिल्में बना चुके थे और यहां एक निर्माता को ये शक था कि फिल्म रिलीज हुई तो चलेगी नहीं।
सलीम जावेद ने होटल हॉलीडे इन में अपना तुरुप का पत्ता फेंक दिया था और फिल्म में आया वो एंबुलेंस वाला सीन जिसमें दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। फिल्म से ही लॉन्च हो रही पूनम ढिल्लो को घायल हालत में उठाकर जब अमिताभ घर ले जाते हैं तो उस पर भी दर्शकों की खूब प्रतिक्रिया मिलती है। बरसों बाद पूनम ढिल्लों ने ये राज खोला था कि तब उनकी सहेलियां उनसे पूछा करती थीं कि आखिर कैसा महसूस होता है अमिताभ बच्चन की बाहों में होना। पूनम तब सिर्फ 16 साल की थीं जब उन्होंने मिस इंडिया का खिताब जीता। यश चोपड़ा ने उनका एक मैगजीन के कवर पर देखा और पहुंच गए उनके घर पर पूनम को साइन करने। पूनम ढिल्लों के माता पिता कतई नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिल्मों में काम करे लेकिन यश चोपड़ा ने किसी तरह उन्हें मना ही लिया। फिल्म में पूनम की जोड़ी बनी थी सचिन के साथ और दोनों ने अपनी मोहब्बत के इजहार में जो गाना गाया, गापूची गापूची गम गम, वो उस साल का सुपर हिट गाना हुआ। फिल्म में मोहब्बत के इजहार के दो और गानों की बात हम करेंगे लेकिन पहले बात सलीम खान और मिथुन चक्रवर्ती की पहली मुलाकात की।
मिथुन चक्रवर्ती फिल्मों में एक खास तरह के कपड़े शुरू से पहनते आए हैं। और, अपने कपड़े वह सिलवाते थे एक खास दुकान पर। ये दुकान सितारों के कपड़े सिलने के लिए पहचानी जाती थी। मिथुन तब तक स्टार नहीं बने। सलीम खान भी वहीं अपने कपड़े सिलवाने आते थे। उन्होंने मिथुन को देखा तो देर तक टकटकी लगाकर देखते रहे। उन्हें इस लड़के के चेहरे में एक अजीब सा आकर्षण नजर आया। उनसे रहा नहीं गया। वह मिथुन के पास गए और बोले, माफ करना, मैं खुद को रोक नहीं पाया। तुम्हारे अंदर एक अलग किस्म का आकर्षण है। तुम हीरो क्यों नहीं बन जाते? मिथुन ने जवाब दिया कि मैं पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से अभी अभी निकला हूं और हीरो बनने के लिए ही ठोकरें खा रहा हूं। मिथुन ने ये भी कहा कि वह सलीम खान को जानते हैं और उन्होंने जो बात कही, उसके लिए वह उनके शुक्रगुजार हैं। सलीम खान ने कहा कि अपनी नई फिल्म के लिए यश चोपड़ा को एक नए चेहरे की तलाश है और उन्होंने मिथुन को यश चोपड़ा का नंबर दिया। यश चोपड़ा से मिलने मिथुन गए भी लेकिन तब तक इस रोल के लिए वह सचिन को साइन कर चुके थे।
वैसे, यहां पर बात ये भी बता देने लायक है कि फिल्म त्रिशूल में संजीव कुमार के रोल के लिए पहले यश चोपड़ा दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के पास गए थे लेकिन उनको रोल जमा नहीं। इसके बाद इस रोल के लिए संजीव कुमार को साइन किया गया। संजीव कुमार असल जिंदगी में शशि कपूर से कोई चार-पांच महीने छोटे हैं, लेकिन फिल्म में उन्होंने किया शशि कपूर के पिता का किरदार। और सिर्फ चार साल बड़ी हैं वहीदा रहमान, अमिताभ बच्चन से जिनकी मां का रोल उन्होंने फिल्म त्रिशूल में किया। और, इन्हीं वहीदा रहमान ने इससे पिछली दो फिल्मों अदालत और कभी कभी में अमिताभ बच्चन की पत्नी का रोल किया था। फिल्म त्रिशूल में वहीदा रहमान पत्नी बनीं संजीव कुमार की और दोनों के गहराई लिए हुए प्यार की खातिर मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखा एक बेहद सारगर्भित और शालीन रोमांटिक गाना। मशहूर गायक येसुदास और लता मंगेशकर ने इसे क्या खूब गाया भी है..
आप की महकी हुई जुल्फ को कहते हैं घटा
आप की मदभरी आंखों को कंवल कहते हैं
मैं तो कुछ भी नहीं तुम को हसीं लगती हूँ
इस को चाहत भरी नजरों का अमल कहते हैं...
येसुदास, लता मंगेशकर और किशोर कुमार भारतीय संगीत की तीन अनमोल धरोहरें हैं। तीनों ने एक साथ बस एक ही बार गाना गाया और वह गाना है फिल्म त्रिशूल का गाना, मोहब्बत बड़े काम की चीज है। अमिताभ के नाम पूरी फिल्म में बस इसी गाने का एक अंतरा आया। सलीम जावेद ने पहले फिल्म जंजीर, फिर दीवार, उसके बाद शोले और फिर त्रिशूल में अमिताभ बच्चन के भीतर सुलगते गुस्से को अपना हथियार बनाया और नाच गाने से उन्हें दूर रखा। एक ऐसी इमेज जिसने अमिताभ को एंग्री यंगमैन का नाम दिया। शोले में भी अमिताभ बस होली सॉन्ग में जरा देर को ठुमके लगाते हैं और महफिल लूट लेते हैं। सलीम जावेद का करिश्मा कुछ था ही ऐसा, हालांकि उनको महारत हासिल थी पहले से मौजूद फिल्मी कहानियों को नया तड़का लगाकर पेश करने में। ओरिजनल की फिल्मी दुनिया को समझ नहीं है, ये बात दोनों को बहुत पहले पता चल गई थी। उसके बाद से वह फिल्म निर्माताओं को वही सुनाते जो उनकी समझ के स्तर का हो और जिसका रेफरेंस उनको कहीं न कहीं जरूर मिल सके। फिल्म त्रिशूल की कहानी साल 1968 में रिलीज हुई इज्जत की याद दिलाती है।
वैसे फिल्म त्रिशूल के बनने की एक और कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। इस फिल्म को जीतेंद्र और राजेंद्र कुमार दोनों बनाना चाहते थे। फिल्म की कहानी थी ही इतनी असरदार, जिसमें एक बेटा अपने पिता को नाजायज बाप कहकर बुलाता है और तालियां बटोर ले जाता है। फिल्म की कहानी एक बिजनेसमैन की कहानी है जो अपनी गर्भवती प्रेमिका को छोड़ एक रईस की बेटी से शादी कर लेता है। बिजनेमैन के शादी के बाद और शादी से पहले के बच्चे जब आमने सामने होते हैं, तो क्या तूफान आता है, इसी की कहानी है त्रिशूल। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दिल्ली में हुई है और इसका क्लाइमेक्स फिल्माया गया प्रगति मैदान में।
फिल्म का ये प्लॉट ही इतना जबर्दस्त था कि जीतेंद्र और राजेंद्र कुमार दोनों ने इस कहानी को पहली बार में ओके कर दिया। बस, निर्देशक दोनों ने एक ही चुन लिया, दुलाल गुहा। कहते हैं कि जीतेंद्र ने दुलाल गुहा को साइनिंग अमाउंट देने के दो दिन बाद सलीम जावेद के साथ फिल्म की कहानी सुनने के लिए बुलाया। यहीं गुहा को पता चला कि ये तो वही कहानी है जो राजेंद्र कुमार उनको सुना चुके हैं। जीतेंद्र और राजेंद्र कुमार में फिल्म कौन बनाएगा, इस बात को लेकर लंबी बहस हुई। आखिर में दुलाल गुहा ने ही साइनिंग अमाउंट लौटाकर इस फिल्म से तौबा कर ली। यही फिल्म बाद में गुलशन राय तक पहुंची और बनी यश चोपड़ा निर्देशित अमिताभ बच्चन स्टारर त्रिशूल। तकरीबन, इसी कहानी पर बाद में 1981 में बनी कमल हासन की फिल्म कादल मीनगल और 1986 में बनी रजनीकांत की फिल्म मिस्टर भारत।