वर्ष 2010 में विक्रमादित्य मोटवानी के निर्देशन में बनी फिल्म 'उड़ान' के मुख्य अभिनेता रजत बारमेचा ने अपनी आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया है कि जिस फिल्म के लिए उन्हें चारों दिशाओं में खूब सराहना मिली, उस फिल्म के निर्माता ने ही उन्हें बाद में पहचानने से इंकार कर दिया था।
'उड़ान' के अभिनेता ने सुनाई आपबीती, स्टार किड्स के सामने हुनर का कोई मोल नहीं
फिल्मकारों के प्रति पैदा हुई अपनी हीन भावना जाहिर करते हुए उन्होंने बताया है कि जब वह इस फिल्म के बाद एक रेड कारपेट इवेंट में गए तो वहां उन लोगों को ज्यादा तवज्जो दी जा रही थी जिनके पास कोई काम धंधा नहीं था लेकिन, वह फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखते थे। रजत 17 साल की उम्र में मुंबई में अपने दम पर प्रसिद्धि पाने आए थे। हालांकि छह महीने के अंदर ही उन्हें फिल्म 'उड़ान' में काम करने का मौका मिला और यहीं से उन्होंने अपनेकरियर की पहली उड़ान भरी।
रजत बारमेचा बताते हैं कि इस फिल्म के सकारात्मक रिव्यु आने के बाद अगले साल-छह महीने तक उन्हें हर पुरस्कार समारोह और पार्टी में बुलाया जाता था। वह कहते हैं, 'जहां भी मैं जाता, मुझे अपनी परफॉर्मेंस के लिए तारीफें मिलती। मेरे अंदर एक आशा जाग गई थी। इसके बाद मैंने कई पटकथाएं पढ़ीं लेकिन मुझे कोई भी ऐसी नहीं लगी जो मेरे हुनर में कुछ और जोड़ सके।'
रजत अपनी पहली फिल्म की कामयाबी को याद करते हुए बताते हैं, 'मुझे मेरे काम के लिए अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शर्मा और रणवीर कपूर जैसे कलाकारों से सराहना मिली। लेकिन रेड कारपेट पर उन लोगों के फोटो खींचे जा रहे थे जिनका नाम किसी प्रोजेक्ट से नहीं जुड़ा। लेकिन, वह फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखते थे। यहां तक की जिस निर्माता ने मेरे काम की बहुत तारीफ की, उसने मुझे पहचाना तक नहीं।' पैसे की तंगी को देखते हुए रजत ने हर तरह के प्रोजेक्ट्स करना शुरू कर दिए जिसने उन्हें अंधेरे में धकेलने का काम किया।
वर्ष 2007 में आई हॉलीवुड की बायोग्राफिकल एडवेंचर ड्रामा फिल्म 'इन टू द वाइल्ड' को देखकर रजत ने दुनिया की सैर करने के बारे में विचार किया। वह बताते हैं, 'विक्रमादित्य सर की मां दीपा आंटी ने मुझे बताया था कि जिस तरह का काम तुम ढूंढ रहे हो, अगर वह तुम्हें नहीं मिलता तो तुम उसे खुद बनाओ। दुनिया देखने के बाद मैंने पिछले ही साल पटकथा लिखना शुरू की। मैं थोड़ा आलसी था लेकिन लॉकडाउन ने मुझे खूब समय दिया। एक बार मैं अपनी पटकथा को पंजीकृत करवा लूं, उसके बाद इसे विक्रमादित्य सर और कुछ दोस्तों के साथ साझा करूंगा।'
पढ़ें: इन पांच सितारों के पिता फिल्मों से दूर बिता रहे खुशहाल जिंदगी, कोई डॉक्टर तो कोई है ज्योतिषी
