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किस्सागोई: जोहरा की सहगल से शादी पर इसलिए होते होते बचा था दंगा, एक टेलीग्राम ने बदल दी जिंदगी

Mon, 27 Apr 2020 01:39 AM IST
Mishra Mishra पंकज शुक्ल, मुंबई
पंकज शुक्ल, मुंबई Published by: Mishra Mishra Updated Mon, 27 Apr 2020 01:39 AM IST
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Untold stories of famous actor zohra sehgal by Pankaj Shukla from first break till last breath
zohra sehgal - फोटो : Social Media

यकीन कर सकते हैं आप कि किसी कलाकार ने पृथ्वीराज कपूर के साथ काम करना शुरू किया हो और उनके परिवार की चौथी पीढ़ी रणबीर कपूर तक के साथ अदाकारी के जलवे बिखेरे हों! या फिर कि जिस कलाकार की मां ने अपनी बेटी को कभी बुर्के से बाहर न आने की तमाम कसमें खिलाई हों, वह पहली कोशिश में ही जर्मनी के मशहूर बैले स्कूल में एडमीशन पाने में सफल रही। और, ये भी कि हिंदुस्तान में मुसलमानों की हिंदुओं से भी ज्यादा आबादी वाले जिले रामपुर में पैदा होने के बाद भी उसने जमाने से बगावत कर शादी की तो एक पंजाबी हिंदू से। तो जनाब, मेहरबान, कद्रदान ये किस्सा है उस मशहूर हस्ती का जिसकी जिंदगी दुनिया के सबसे काबिल नाचने वालों में से एक रहे उदय शंकर के एक टेलीग्राम ने बदल दी।

Untold stories of famous actor zohra sehgal by Pankaj Shukla from first break till last breath
zohra sehgal - फोटो : Social Media

रामपुर के नवाबी खानदान में जन्म
हिंदी सिनेमा में ऐसे किस्से तमाम हैं जिनमें किसी कलाकार ने आधी सदी से ज्यादा फिल्मों में काम किया हो लेकिन जोहरा मुमताज सहगल का किस्सा इसलिए नायाब है क्योंकि वह फिल्मों से मशहूर नहीं हुईं बल्कि फिल्मों में उन्हें लोगों ने लिया ही इसलिए कि वह दुनिया भर में मशहूर हो चुकी थीं। तो 27 अप्रैल 1912 को रामपुर रियासत के नवाबी खानदान में पैदा हुईं साहिबजादी जोहरा मुमताजुल्ला खान बेगम की पहली ही फिल्म नीचा नगर के कान फिल्म फेस्टिवल का सबसे बड़ा अवार्ड जीतने के किस्से से हम उनका फिल्मी सफरनामा शुरू करें, उससे पहले ये जान लेना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर जोहरा के कदम अमेरिका, जापान और  ब्रिटेन पहुंचने से पहले हिंदुस्तान में कहां कहां पड़े?

Untold stories of famous actor zohra sehgal by Pankaj Shukla from first break till last breath
zohra sehgal - फोटो : Social Media

चकराता में गुजरा बचपन
तो जनाब किस्सा कुछ यूं है कि रामपुर की रोहिल्ला पठान फैमिली के दो बच्चों जकुल्लाह और हजराह की पैदाइश के बाद तीसरे नंबर पर पैदा हुईं मुमताजुल्लाह ने अपने बाद पैदा हुए इकरामुल्लाह, उजरा, एना और साबिरा के साथ अपना बचपन अब के उत्तराखंड की हरियाली से भरी मशहूर जगह चकराता में गुजारा। पेड़ों पर कूदना, उधम मचाना, बागों से फल तोड़कर खाना और आसपास गुजरते लोगों को परेशान करना जोहरा के बचपन की आदतों में शुमार रहा। जोहरा सहगल की फिल्में अगर आपने देखी हैं तो आपको समझ आएगा कि वह कैमरे की तरफ देखते समय थोड़ा असहज महसूस करती थीं। वजह ये कि उनको बाईं आंख से कुछ दिखाई न देता था, और ये कहर उन पर बचपन में ही टूटा। ग्लूकोमा वैसे तो डायबिटीज के मरीजों को बड़े होने पर होती है, लेकिन जोहरा को ये बीमारी बचपन में ही लग गई। उनकी लंदन विदेश यात्रा भी बताते हैं कि इसी के इलाज के चक्कर में हुई। बहुत तकलीफें सहीं जोहरा ने साल भर की उम्र से ही।

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zohra sehgal - फोटो : Social Media

जर्मन स्कूल में बैले सीखने वाली पहली भारतीय
तकलीफें जोहरा सहगल ने अपने जीवन में बेहिसाब सहीं लेकिन मजाल की कोई फोटो उनका आप पा सकें, गमगीन चेहरे वाला। छोटी सी थीं कि मां गुजर गईं। अम्मी का बड़ा मन था कि जोहरा लाहौर जाकर पढ़े तो अपनी बहन के साथ वह चली गईं क्वीन मेरी कॉलेज में दाखिला लेने। कॉलेज में सख्त पर्दा होता था। तमाम पर्दादारी के बाद भी शादी के बाद बहन की हालत देख जोहरा ने तय किया कि उसे पहले अपनी जिंदगी बसानी है फिर देखा जाएगा कि घर बसाना भी है कि नहीं। बात एडिनबर्ग वाले मामू तक पहुंची और उन्होंने उनकी अप्रेंटिस का इंतजाम कर दिया एक ब्रिटिश एक्टर की शागिर्दी में। जहाज से तो जा नहीं सकते थे तो ये लोग लाहौर से कार से निकले। ईरान, फिलिस्तीन, सीरिया और मिस्र पहुंचे और वहां से पानी के रास्ते यूरोप जा पहुंचे। जर्मनी के मैरी विगमैन बैले स्कूल में एडमीशन पाने वाली वह पहली भारतीय महिला बनीं। तीन साल तक यहां जोहरा ने नए जमाने का डांस सीखा और इसी दौरान किस्मत से उन्हें मौका मिला वह नृत्य नाटिका देखने का जिसने उनका जीवन बदल दिया। इस नृत्य नाटिका का नाम था, शिव पार्वती और इसे लेकर उन दिनों विश्वभ्रमण पर निकले थे भारत के मशहूर नर्तक उदय शंकर। नाटिका खत्म हुई तो जोहरा पहुंच गईं मंच के पीछे उदयशंकर से मिलने। विदेश में इतनी खूबसूरत भारतीय युवती की पारंपरिक नृत्य में दिलचस्पी देख उदय शंकर बहुत खुश हुए और बोले कि वतन पहुंचते ही वह उनके लिए काम देखेंगे।

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zohra sehgal - फोटो : Social Media

और, फिर आया वो टेलीग्राम
उदय शंकर से मिलने के बाद बात आई गई हो गई लेकिन जैसा कि कामयाब लोगों की अक्सर आदत होती है, उदय ने जोहरा में एक अलग काबिलियत देख ली थी। जोहरा तब यूरोप में ही थीं कि उन्हें एक दिन टेलीग्राम मिला। और, 8 अगस्त 1935 को जोहरा सहगल ने उदय शंकर को जापान में ज्वाइन कर लिया। जापान के बाद मिस्र, यूरोप और अमेरिका होते हुए जोहरा ने उदय शंकर के साथ खूब दुनिया देखी। सब वतन वापस लौटे तो जोहरा ने उदय शंकर के अल्मोड़ा स्थित स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया। और, यहीं उनको मिले कमलेश्वर सहगल। इंदौर के रहने वाले सहगल साइंटिस्ट थे, पेटिंग भी करते थे और भारतीय नृत्य के बड़े वाले शौकीन थे। अल्मोड़ा की वादियों ने दोनों के दिलों में मोहब्बत के गुल खिलाए। जोहरा से कमलेश्वर आठ साल छोटे थे। पर, वो जवानी ही क्या जिसने कभी बगावत न की हो।

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