तमिल फिल्मों के सुपरस्टार अभिनेता विजय सेतुपति ने अपने पूरे करियर में बहुत ज्यादा फिल्में नहीं की हैं लेकिन फिर भी उन्होंने अपने अभिनय के दम पर समीक्षकों और दर्शकों के दिल पर ऐसा प्रभाव छोड़ा है कि लोग उनके काम को सराहे बिना नहीं रहते। शुरुआती चार-पांच फिल्मों में तो लोगों ने उन्हें न तो जाना और न पहचाना। लेकिन, जब उन्हें पहली बार एक बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिला तो फिर लोग उन्हें भूल नहीं पाए। फिर तो विजय ने चुन चुनकर ऐसे किरदार पकड़े कि हर किरदार के साथ सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए। तो चलिए जानते हैं आजकल 'मास्टर' फिल्म के साथ सिनेमाघरों में धूम मचा रहे विजय सेतुपति के कुछ बेहतरीन किरदारों के बारे में।
साउथ का यह सितारा है 'सुपर डीलक्स', एक के बाद एक किरदारों से प्रयोग करके बन गया पैन इंडिया सुपरस्टार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किरदार : मुरुगन
फिल्म : थेनमेरकु पारुवाकात्रु (2010)
विजय ने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत कुछ छोटे-मोटे किरदारों को करके की। उन्हें कभी हीरो के खासम खास दोस्त के किरदार में देखा जाता तो कभी किसी ऐसे किरदार में जहां उन्हें उसका श्रेय भी नहीं मिलता। एक तमिल-कन्नड़ भाषा की फिल्म 'अखाड़ा' में उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला भी तो यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज ही नहीं हो पाई। निर्देशक सीनू रामासामी ने पहली बार विजय के हुनर को पहचाना और अपनी फिल्म 'थेनमेरकु पारुवाकात्रु' में मुख्य भूमिका निभाने का मौका दिया। इस फिल्म में विजय एक गडरिए मुरुगन की भूमिका में नजर आए। फिल्म में उनके काम को बहुत सराहा गया और उनका इतना नाम हो गया कि अब उन्हें बेहतरीन फिल्में मिलने लगीं। और, इस फिल्म ने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते।
किरदार : जगन
फिल्म : सुंदरपंडियन (2012)
विजय सेतुपति के लिए वर्ष 2012 की तो शुरुआत ही बहुत शानदार हुई। इस साल रिलीज हुई उनकी पहली ही फिल्म 'सुंदरपंडियन' ने विजय को तमिलनाडु राज्य का फिल्म पुरस्कार दिलवाया। वह भी फिल्म में नकारात्मक भूमिका निभाने के लिए। एसआर प्रभाकरण के निर्देशन में बनी यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसमें शशि कुमार और लक्ष्मी मेनन भी विजय के साथ मुख्य भूमिकाओं में हैं। विजय ने फिल्म में जगन नाम का किरदार निभाया है जो शशि कुमार के किरदार सुंदरपंडियन का दोस्त है और लक्ष्मी के किरदार अर्चना का दूर का रिश्तेदार। इन तीनों के बीच में ही एक लव ट्रायंगल बनता है जिसमें जगन विलेन है।
किरदार : सी प्रेम कुमार
फिल्म : नादेवुला कोनजम पाककथा कानोम (2012)
विजय के लिए वर्ष 2012 में रिलीज हुई उनकी दूसरी फिल्म 'नादेवुला कोनजम पाककथा कानोम' भी पुरस्कार विजेता साबित हुई। इस फिल्म के लिए विजय को विजय अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड से नवाजा गया। विजय के साथ इस फिल्म में गायत्री शंकर, भगवती पेरूमल और राजकुमार जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। बालाजी थरनिथरण के निर्देशन में बनी इस कॉमेडी थ्रिलर फिल्म की कहानी भी बहुत अनोखी है। विजय के किरदार प्रेम की शादी गायत्री के किरदार धनलक्ष्मी से होने वाली है। अचानक से प्रेम को क्रिकेट खेलने का जुनून उठता है और वह हाथ आजमाने के लिए चल पड़ता है। क्रिकेट खेलते हुए एक दुर्घटना में उसके सिर पर चोट लगती है और उसे शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस की दिक्कत शुरू हो जाती है। बस यही घटना होती है सभी घालमेल की जननी।
किरदार : माइकल कार्थिकेयन
फिल्म : पिज्जा (2012)
वर्ष 2012 में रिलीज हुईं विजय की तीनों ही फिल्में सुपरहिट रहीं। विजय और राम्या नम्बीसन की फिल्म 'पिज्जा' तो इतनी लोकप्रिय हुई कि इसका रीमेक वर्ष 2014 में अक्षय अक्कीनेनी ने विवेक ओबेरॉय को लेकर बनाया। प्रभु देवा को लेकर 'मरकरी' और रजनीकांत की 'पेटा' फिल्म बनाने वाले कार्थिक सुब्बाराज ने निर्देशन में अपने करियर की शुरुआत इसी फिल्म से की है। जैसा कि फिल्म का शीर्षक है, विजय ने फिल्म 'पिज्जा' में पिज्जा डिलीवरी करने वाले एक लड़के माइकल कार्थिकेयन का किरदार निभाया है। एक दिन पिज्जा की डिलीवरी देते समय माइकल एक रहस्यमय स्थिति में फंस जाता है जहां से उसकी जिंदगी बदल जाती है। फिल्मों में शानदार अभिनय के लिए विजय को दक्षिण भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता क्रिटिक्स के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।