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विलेन के रोल से हीरो बन गए विनोद खन्ना, एक दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर ले लिया संन्यास
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Tue, 27 Apr 2021 01:20 PM IST
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विनोद खन्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
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विनोद खन्ना बॉलीवुड के ऐसे एक्टर रहे जिन्होंने शुरुआत तो विलेन के किरदार से की लेकिन बाद में हीरो बन गए। आज के ही दिन 2017 में विनोद खन्ना इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। वो काफी सालों से कैंसर से जूझ रहे थे। विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले विनोद खन्ना ने अपने करियर में 150 से ज्यादा फिल्में कीं।
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विनोद खन्ना
- फोटो : instagram/akshayekhanna.ak
विनोद खन्ना बचपन में इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। कॉलेज के दौरान उन्होंने थियेटर करना शुरू कर दिया था। विनोद खन्ना ने 1968 में 'मन का मीत' फिल्म से करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया। सुनील दत्त से ऑफर मिलने के बाद जब ये बात विनोद खन्ना ने घर पहुंचकर अपने पिता को बताई तो वे बहुत गुस्सा हुए। यहां तक कि उनके पिता ने उन पर पिस्तौल भी तान दी और कहा कि यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा। विनोद खन्ना के पिता उन्हें बिजनेसमैन बनाना चाहते थे।
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विनोद खन्ना
फिल्मों में स्टारडम, दौलत शौहरत पाने के बाद भी विनोद खन्ना अंदर से संतुष्ट नहीं थे। अचानक विनोद खन्ना ने अपने परिवार के साथ मुंबई में प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुलाई और मीडिया के सामने संन्यास लेने का फैसला किया। अमरीका के ओरेगोन स्थित रजनीशपुरम आश्रम में विनोद खन्ना रजनीश की माला पहने घूमते थे। इसीलिए मीडिया ने उन्हें सेक्सी संन्यासी की संज्ञा दी थी। विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन के कड़े प्रतिद्वंदी माने जाते थे। दोनों सुपरस्टार्स ने ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘परवरिश’, ‘अमर अकबर एंथॉनी’ जैसी फिल्मों में साथ में काम किया था।
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विनोद खन्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी फिल्मों में छोटे-मोटे और विलेन का रोल करने वाले विनोद खन्ना ने बाद में खुद को टॉप सितारा साबित किया। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने गीतांजलि से शादी कर ली। लेकिन गीतांजली से 1985 में तलाक के बाद अपने अकेलेपन से विनोद खन्ना ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया। लेकिन फिल्मों में फिर से काम और सफलता मिलने और फिर 1990 में कविता दफ्तरी से दूसरी शादी कर वो पुराने विनोद खन्ना बन लौटे।
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विनोद खन्ना
- फोटो : instagram/akshayekhanna.ak
विनोद खन्ना अभिनेता होने के अलावा, निर्माता और सक्रिय राजनेता भी थे। वे भाजपा के सदस्य थे और कई चुनाव जीत चुके थे। वे मंत्री भी रहे। विनोद खन्ना ने 'मेरे अपने', 'इंसाफ', 'परवरिश', 'मुकद्दर का सिकन्दर', 'कुर्बानी', 'दयावान', 'मेरा गांव मेरा देश', 'चांदनी', 'द बर्निंग ट्रेन', 'अमर अकबर एंथनी' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिका निभाई। उन्हें भारत सरकार ने 2018 में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया।
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