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Zakir Hussain: वाह उस्ताद! जाकिर हुसैन ने दी तबला को नई पहचान, अपने संगीत से बनाई दुनिया में पहचान
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: तनु चतुर्वेदी
Updated Mon, 16 Dec 2024 10:11 AM IST
सार
तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। जाकिर हुसैन को तबले और संगीत से बहुत प्रेम था, आइए आपको बताते हैं कि किस तरह दुनिया भर में तबले को और संगीत को उन्होंने एक अलग पहचान दी।
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उस्ताद जाकिर हुसैन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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जाकिर हुसैन को तबला वादन का उस्ताद माना जाता है। भारत के इस मशहूर सितारे ने संगीत की दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार को सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में फेफड़े की बामारी 'इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस' के चलते उनका निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे।
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उस्ताद जाकिर हुसैन
- फोटो : PTI
60 साल से अधिक दिया संगीत में योगदान
उस्ताद जाकिर हुसैन को पूरी दुनिया में एक शानदार कलाकार के रूप में जाना जाता था। उन्होंने संगीत की दुनिया में 60 साल संगीत में योगदान दिया है। तालवादक ने अपने प्रदर्शनों की सूची जैज और संगीत कार्यक्रमों सहित विभिन्न शैलियों और विधाओं में संगीत रचा।
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जाकिर हुसैन
- फोटो : एएनआई (फाइल)
संगीत को लेकर रखें अपनी राय
अपने संगीत कला प्रदर्शन को लेकर खुद जाकिर हुसैन ने कहा था, "जब मैं बड़ा हो रहा था तो मेरी मानसिकता इस विचार के साथ तालमेल बिठा रही थी कि संगीत तो संगीत है, यह भारतीय संगीत या वह संगीत नहीं है, इसलिए जब मैंने गैर-भारतीय संगीतकारों के साथ काम करना शुरू किया तो यह एक स्वाभाविक हाथ मिलाने जैसा लगा।"
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तबला वादक जाकिर हुसैन
- फोटो : एक्स
सात साल की उम्र में किया पहला कार्यक्रम
उस्ताद जाकिर हुसैन ने सात साल की उम्र में अपना पहला कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने 12 साल की उम्र में दुनिया भर में दौरे करना शुरू कर दिया। मास्टर्स ऑफ़ पर्क्यूशन, प्लैनेट ड्रम और मिकी के साथ ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट में भी अपना योगदान दिया।
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तबला वादक जाकिर हुसैन
- फोटो : एक्स
तीन बार मिला ग्रैमी पुरस्कार
उस्ताद जाकिर हुसैन को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन और सर्वश्रेष्ठ समकालीन वाद्य एल्बम के लिए तीन ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारत के पहले संगीतकार बने।
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