रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ इन दिनों सिनेमाघरों में बनी हुई है। फिल्म को लेकर काफी उत्साह था और रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हालांकि, इस बार फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हासिल हुई हैं। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हो, लेकिन ‘धुरंधर 2’ की कहानी वो कमाल नहीं दिखा पाई, जो ‘धुरंधर’ ने दिखाया था। यही कारण है कि कई लोगों ने फिल्म को बोरिंग, पकाऊ और कम प्रभावशाली बताया है। जानते हैं उन पांच प्रमुख कारणों के बारे, जिन्होंने ‘धुरंधर 2’ को बना दिया बोरिंग।
Dhurandhar 2: इन पांच वजहों ने ‘धुरंधर 2’ को बना दिया उबाऊ, जानिए पहले पार्ट के मुकाबले कहां चूक गए आदित्य धर
Dhurandhar The Revenge: साल की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म मानी जाने वाली ‘धुरंधर 2’ इन दिनों सिनेमाघरों में बनी हुई है। हालांकि, इस बार फिल्म को वैसी प्रतिक्रियाएं नहीं मिल रही हैं, जैसी पहले पार्ट के समय मिली थीं। जानिए इस बार कहां चूक गए आदित्य धर…
पहली फिल्म के मुकाबले कमजोर कहानी
कहानी के आधार पर ‘धुरंधर 2’ वो कमाल नहीं कर पाती, जो ‘धुरंधर’ ने किया था। इस बार फिल्म की कहानी पहले पार्ट के मुकाबले काफी कमजोर है। इस बार पूरी फिल्म सिर्फ रणवीर सिंह को हीरो बनाने में लगी रहती है।
कई मौकों पर ऐसा लगता है, जैसे आदित्य धर के पास दूसरे पार्ट लायक कहानी थी ही नहीं। सिर्फ कन्क्लूजन के लिए दूसरा पार्ट बनाना पड़ा। ‘धुरंधर 2’ के फर्स्ट हाफ में इतना ज्यादा खूनखराबा और हिंसा है, मानो निर्देशक का मकसद सिर्फ रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ को पीछे छोड़ना हो। जबकि सेकेंड हाफ तो सिर्फ गुणगान और एक पक्षीय बनकर ही रह जाता है। कुल मिलाकर कहानी के मामले में आदित्य धर अपने पहले ही पार्ट से मात खा जाते हैं। कई चीजें कहानी में ऐसी जोड़ी गई हैं, जो अनर्गल प्रतीत होती हैं।
कोई यादगार किरदार नहीं
‘धुरंधर’ देखने के बाद अगर कोई आपके दिमाग में रह जाता है, तो वो था रहमान डकैत का किरदार। जिसकी लिखाई भी शानदार थी और अक्षय खन्ना ने उस किरदार को निभाया नहीं बल्कि जिया था। लेकिन ‘धुरंधर 2’ में यही कमी खलती है। कोई भी किरदार ऐसा नहीं है, जो आपके दिमाग में रह जाए।
इसकी वजह ये ही है कि इस बार पूरा फोकस सिर्फ रणवीर सिंह पर था, लेकिन उनका किरदार भी वो काम नहीं कर पाता जो रहमान डकैत कर जाता है। बेशक राकेश बेदी का जमील जमाली का किरदार और उसका ट्विस्ट फिल्म में रोचकता पैदा करता है।
लेकिन इस किरदार को और भी दमदार बनाया जा सकता है। इस बार निर्देशक ने बाकी किसी कलाकार को उनका स्क्रीन टाइम भी नहीं दिया है। फिर वो चाहें अर्जुन रामपाल हों, संजय दत्त हों या फिर सिर्फ शो पीस बनकर रह गईं सारा अर्जुन हों। अर्जुन रामपाल को तो इस बार पूरी तरह से बर्बाद ही किया है। कम समय में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग से माहौल बनाने का पूरा प्रयास किया। लेकिन अगर उन्हें और भी स्क्रीनटाइम मिलता या उनके किरदार को और भी मजबूत बनाया गया होता, तो वो 'धुरंधर 2' के रहमान डकैत बन सकते थे।
एक समय के बाद फिल्म जल्दी भागती है और कई अधूरे सवाल छोड़ जाती है
आपको सुनकर भी हैरानी होगी कि 3 घंटा 49 मिनट की फिल्म में भी मेकर्स कई सवालों के जवाब नहीं दे पाते हैं। बल्कि खुद ही पैदा किए गए सवाल अधूरे छोड़ जाते हैं। जैसे- रणवीर सिंह भारत लौटने के बाद अपने परिवार से नहीं मिलता है। घर तक जाता है, लेकिन दूर से ही देखकर लौट जाता है। वो ऐसा क्यों करता है?
दूसरा- हमजा (रणवीर सिंह) अपने ल्यारी आने का मकसद बताने के बाद आलम (गौरव गेरा) से पूछता है कि वो कैसे आया? इस पर आलम किसी और दिन बताने की बात कहता है। लेकिन फिर वो दिन आदित्य धर की फिल्म में कहीं आता ही नहीं है और इसका पता ही नहीं चलता है।
इसी तरह, एक सीन में रिजवान अर्शद पप्पू के साइड दिखता है और दूसरे ही पल उजैर बलोच के गुट में शामिल हो जाता है। अंत में दिखाया जाता है कि उसकी ट्रेनिंग भी रणवीर सिंह के साथ हुई थी। लेकिन वह क्यों आया, कब आया, कुछ नहीं बताया गया।
जबकि सारा अर्जुन और उजैर बलोच की कहानी को एक दम से फास्ट फॉर्वर्ड में ही समझा दिया गया। पूरा फोकस सिर्फ रणवीर सिंह पर ही रहा।
पिछले भाग के मुकाबले कम गाने और कमजोर संगीत
'धुरंधर' के गाने और संगीत फिल्म की जान थे। टाइटल ट्रैक से लेकर ‘Fa9La’, ‘लुट ले गया’, ‘कारवां की तलाश’ और ‘शरारत’ तक हर गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया था। जबकि रील्स में भी हर ओर 'धुरंधर' के ही गाने सुनाई देते थे।
लेकिन इस बार फिल्म का संगीत वो जादू बिखेरने में नाकाम रहता है। फिल्म देखने के बाद आपके जेहन में कोई गाना नहीं गूंजता है। सिर्फ एक ‘आरी आरी’ को 'धुरंधर' के टाइटल ट्रैक और ‘कारवां की तलाश’ की तरह बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वैसा असर होता दिख नहीं रहा है।