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IFFI: दिवंगत सीएम मनोहर पर्रिकर को गार्ड ने फेस्टिवल में नहीं करने दिया था प्रवेश, यह थी वजह
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकांक्षा गुप्ता
Updated Sat, 18 Nov 2023 04:28 PM IST
सार
जब एक सीआरपीएफ जवान ने सीएम मनोहर पर्रिकर को आईएफएफआई परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था, क्योंकि वह एक निजी मारुति 800 कार में आए थे और उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था।
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा में अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इसके साथ ही राज्य में आईएफएफआई के पहले संस्करण से जुड़े लोगों की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। उन्होंने इस घटना को भी याद किया, जब गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। 1952 में स्थापित आईएफएफआई ने 2004 में नई दिल्ली से तटीय राज्य गोवा की यात्रा की। उत्सव का स्थल वहीं पर विकसित किया गया, जहां पर कभी पुराना गोवा मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) परिसर हुआ करता था।
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आईएफएफआई 2023
- फोटो : सोशल मीडिया
महोत्सव के 54वें संस्करण और गोवा में 20वें संस्करण का उद्घाटन 20 नवंबर को किया जाएगा। विशेष उद्देश्य वाली एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीत रोड्रिग्स ने याद करते हुए कहा, 'हमारे पास संपूर्ण बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए केवल छह महीने थे और हमें शून्य से शुरुआत करनी थी। हमने सचमुच एक तंबू से काम करना शुरू किया था।' विशेष उद्देश्य वाली एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, संजीत रोड्रिग्स ने याद करते हुए कहा, "हमारे पास संपूर्ण बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए केवल छह महीने थे और हमें शून्य से शुरुआत करनी थी। हमने सचमुच एक तंबू से काम करना शुरू किया था।"
संजीत रोड्रिग्स ने याद किया कि कैसे समय-सीमा कागज पर थी और उन्हें बिना किसी देरी के उन पर अमल करना था। उन्होंने कहा, 'चुनौती बहुत बड़ी थी। उस वर्ष बहुत भारी बारिश भी हुई। उन्होंने कहा, ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल ने उनकी चिंताओं को और ज्यादा बढ़ा दिया था। हमें इसकी निगरानी रखनी थी कि निर्माण सामग्री समय पर पहुंचेगी या नहीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री पर्रिकर ने परिसर और वास्तुशिल्प महत्व की अन्य इमारतों को बरकरार रखा। जबकि फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए मल्टीप्लेक्स बनाने के लिए बाकी हिस्से को तोड़ दिए गए थे।'
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आईएफएफआई 2004
- फोटो : सोशल मीडिया
पर्रिकर के करीबी सहयोगी और पणजी के पूर्व विधायक सिद्धार्थ कुनकोलिएनकर ने कहा कि जब वह जीएमसी की जर्जर संरचना में दाखिल हुए तो उनका सामना सांपों और अन्य जानवरों से हुआ। उन्होंने याद किया कि कैसे मल्टीप्लेक्स का निर्माण 180 दिनों में किया गया था और दो नए पुल भी उसी समय में तैयार हुए थे। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार वामन प्रभु ने कहा कि यह असंभव लगता है कि गोवा 2004 में आईएफएफआई की मेजबानी कर पाया। उन्होंने कहा, 'ऐसी आशंका थी कि इसे मुंबई या फिर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। लेकिन पर्रिकर ने यह सुनिश्चित किया कि बुनियादी ढांचे का काम समय रहते पूरा हो जाए।'
कुनकोलिएनकर ने कहा, 'हर किसी के लिए यह पहली बार अनुभव था। मुझे एक उदाहरण याद है जब एक सीआरपीएफ जवान ने सीएम मनोहर पर्रिकर को आईएफएफआई परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था, क्योंकि वह एक निजी मारुति 800 कार में आए थे और उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था। पर्रिकर ने जवान को समझाने की कोशिश की कि वह मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जवान ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। यह प्रकरण तब समाप्त हुआ जब मुख्यमंत्री की आधिकारिक कार पहुंची और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी ने जवान को बताया कि वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं।'
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