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लता मंगेशकर: ‘आनंद’ के लिए मिला था संगीत निर्देशन का न्यौता, राजेश रोशन के लिए इस फिल्म में अड़ गई थीं लता

Sun, 06 Feb 2022 02:53 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sun, 06 Feb 2022 02:53 PM IST
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when Lata Mangeshkar supported musician Rajesh Roshan in the film Kala Patthar, know Lata Mangeshkar's journey in Hindi cinema
लता मंगेशकर - फोटो : फाइल

तीसरी लहर के दौरान घर में आए कर्मचारी से संक्रमित हुई गायिका लता मंगेशकर ने कोरोना संक्रमण के बीते दो साल बहुत हिम्मत के साथ गुजारे। इस दौरान लगातार वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहीं। बीते साल ही अक्टूबर में संगीतकार विशाल भारद्वाज ने उनकी आवाज में एक गाना रिलीज किया। फिल्म ‘83’ रिलीज हुई तो लोगों को वह कार्यक्रम भी याद आया जब मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में विश्व विजेता क्रिकेट टीम के स्वागत में हुए कार्यक्रम में लता मंगेशकर ने ‘भारत विश्व विजेता..’ गाया और करीब 30 लाख रुपये का चंदा क्रिकेट टीम के लिए जुटाया। क्रिकेट से उनका बहुत लगाव रहा और घर परिवार से उनकी डोर हमेशा बंधी रही।

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लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे कहती हैं, "लता मंगेशकर हमारे युग की एक धरोहर रहीं और जिन्हें हमने अब खो दिया है।” साल 1973 में लता मंगेशकर को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला अपने गाने ‘बीती ना बिताई रैना..’ के लिए। इसे लिखा गुलजार ने और संगीत से संवारा संगीतकार आर डी बर्मन ने। फिल्म ‘कोरा कागज़’ के लिए लता मंगेशकर ने जीता सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिए अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार। ये गाना था ‘रूठे रूठे पिया मनाऊं कैसे...’ और इसे लिखा था एम जी हशमत ने। संगीतकार थे कल्याणजी आनंद जी। लता मंगेशकर ने एक और नेशनल फिल्म अवार्ड अपनी ही प्रोडक्शन कंपनी की फिल्म ‘लेकिन’ के गाने ‘यारा सीली सीली...’ के लिए भी जीता।
 

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लता मंगेशकर - फोटो : PTI

लता के लिए स्थापित हुआ पुरस्कार

लेकिन पुरस्कारों का असली किस्सा जो लता मंगेशकर के नाम के साथ जुड़ा है वह है फिल्मफेयर पुरस्कारों का। ये तो सबको पता है कि लता मंगेशकर ने तमाम पुरस्कार हासिल करने के बाद ये पुरस्कार इसलिए और लेने से मना कर दिया कि युवाओँ को इसका मौका मिलना चाहिए। लेकिन, कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक (महिला) का पुरस्कार लता मंगेशकर को फिल्म ‘गाइड’ के लिए पुरस्कार न मिलन पाने के बाद ही शुरू किया गया। उस साल संगीत श्रेणी के सारे पुस्कार फिल्म ‘सूरज’ को मिले जिसके गीतकार थे हसरत जयपुरी और संगीतकार शंकर जयकिशन। इसी फिल्म के गाने ‘बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है’ के लिए मोहम्मद रफी को बेस्ट सिंगर का अवार्ड मिला और लता मंगेशकर फिल्म ‘गाइड’ के गाने ‘कांटो से खींच के ये आंचल..’ के लिए ये पुरस्कार न पा सकीं। तब मोहम्मद रफी ने ये पुरस्कार ही लेने से मना कर दिया था। इस पुरस्कार को लेकर इतना बवाल मचा कि अगले साल से फिल्मफेयर को पार्श्वगायन पुरस्कारों में महिला और पुरुष गायकों की श्रेणियां अलग अलग करनी पड़ीं।

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लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

‘आनंद’ के संगीत निर्देशन का न्योता

सबको फिल्म ‘आनंद’ के बारे में पता ही है। इसके संवाद गुलजार ने लिखे हैं। फिल्म में गाने भी उनके ही हिस्से आए। लेकिन इन गानों का संगीत ऋषिकेश मुखर्जी दरअसल सलिल चौधरी से पहले लता मंगेशकर से संगीतबद्ध कराना चाहते थे। उन दिनों ज्यादा लोगों को तो पता नहीं था लेकिन ऋषि दा को ये खबर हो चुकी थी कि लता मंगेशकर मराठी फिल्मों के लिए संगीत दे रही हैं और वह भी एक काल्पनिक नाम आनंदघन का प्रयोग करके। खैर लता मंगेशकर ने पूरी विनम्रता के साथ इस काम के लिए मना कर दिया। हां, फिल्म में गाने जरूर गाए।

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स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

50 साल पुरानी धुनों पर गूंजे सुर
यश चोपड़ा की फिल्म ‘वीर जारा’ की धुनें अपने कंपोज किए जाने के करीब 50 साल बाद रिकॉर्ड की गईं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था और बिलबोर्ड मैगजीन ने इसके महत्व के बारे में विस्तार से लिखा। उस वक्त सॉन्ग ऑफ द इयर बन जाने वाले गाने ‘तेरे लिए’ को दरअसल 1975 की फिल्म ‘मौसम’ के एक गाने ‘दिल ढूंढ़ता है’ के लिए बनाया गया था। यश चोपड़ा की फिल्म ‘सिलसिला’ से बतौर गीतकार अपना डेब्यू करने वाले जावेद अख्तर ने लगभग दो दशक बाद यश चोपड़ा के साथ फिल्म ‘वीर जारा’ के लिए दोबारा काम किया। उस वक्त लता मंगेशकर की उम्र 75 वर्ष हो चुकी थी लेकिन इन गीतों को लता की आवाज मिलना ही उचित और उपयुक्त ही था क्योंकि मूल रूप से मदन मोहन ने ये धुनें दशकों पहले अपनी पसंदीदा गायक लता मंगेशकर के लिए ही कंपोज की थीं।

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