बदलते वक्त के साथ हिंदी सिनेमा में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दिल को छू लेने वाली कहानियों और यादगार किरदारों के साथ अब महिला लेखिकाएं आगे आ रही हैं। अब वह समय नहीं रहा जब फिल्मों में महिलाओं के किरदार पुरुष की निगाह से लिखे जाते थे और उन्हें एक शोपिस की तरह दिखाया जाता था। ज्यादातर फिल्मों में महिलाओं के किरदार दमदार नहीं होते थे, पुरुषों को ही एक कदम आगे दिखाया जाता था। महिलाओं द्वारा लिखी गई कहानियों में महिलाएं एक अलग अंदाज में दिखाई देती हैं, जो मजबूत और अपने फैसले लेने में सक्षम है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही फिल्मों की तुलना करके बता रहे हैं, जिसमें महिलाओं को पुरुष और महिला लेखक की नजर से लिखा गया है।
Female VS Male Writers: कभी महिलाओं के हाथ में दी कमान तो कभी बना दिया शोपिस, जानिए महिला और पुरुष लेखक का नजरिया
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मां का किरदार निभाती महिलाएं
गौरी शिंदे द्वारा ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में लिखा गया शशि का किरदार एक मां होने के साथ ही अपनी पहचान बनाता है। शशि के माध्यम से गौरी ने दिखाया कि एक मां की भी ख्वाहिशें हो सकती हैं, वह शादी के बाद सिर्फ एक मां और पत्नी बनकर ही नहीं रह जाएगी। साथ ही उसे पूरा सम्मान भी मिलना चाहिए। वहीं, ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कभी खुशी कभी गम’ सहित कई फिल्मों मां का किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियों को पहचान देना ही भूल गई। इनके किरादर बस एक सपोर्टिंग एक्टर की तरह थे, जो भी बहुत कम बोलता है और घर के फैसले भी नहीं ले सकता।
महिला किरदार, जिन्होंने अपनी इच्छाओं को पूरा किया
एक तरफ गौरी शिंदे द्वारा लिखी गई ‘डियर जिंदगी’ में कियारा को दिखाया गया है, जो खुद को और रिश्तों को स्वीकार करती है। अपने माता-पिता से साथ हुए मुद्दों को भी सुलझाती है। कियारा को अपनी इच्छाओं के स्वीकार करते हुए गौरी ने बड़े ही संवेदनशील तरीके से दिखाया था। वहीं, दूसरी ओर फिल्म ‘कॉकटेल’ में इम्तियाज अली और साजिद अली ने महिलाओं को एक ही लड़के के पीछे लड़ते दिखाया। साथ ही उसे कई सारी रिलेशनशिप और शराब पीने के लिए शर्मिंदा भी किया।
देशभक्ति या सामाजिक मुद्दों वाली फिल्मों की महिलाएं
जहां एक तरफ मेघना गुलजार ‘राजी’ को लेकर आईं, तो रोहित शेट्टी सिंबा लेकर आए। दोनों ही फिल्मों में अलग बात ये थी कि राजी में जहां एक लड़की अपने देश के लिए दूसरे मुल्क तक चली जाती है। वहीं, ‘सिंबा’ में सभी महिलाएं हीरो की कहानी में बस एक सहारा थीं। इस फिल्म मुख्य किरदार निभा रही सारा अली खान सिर्फ एक प्रॉप की तरह थी।
पढ़ी-लिखी महिला
जूही चतुर्वेदी द्वारा लिखी गई फिल्म ‘पिकू’ की स्वाभिमानी और स्वतंत्र महिला दीपिका पादुकोण, तो दूसरी ओर शाहिद की ‘कबीर सिंह’ में कियारा आडवाणी का पढ़ा लिखा किरदार, जो अपने बॉयफ्रेंड की प्रताड़ना के बाद भी उससे प्यार करती है। इस फिल्म की कहानी संदीप रेड्डी वांगा ने लिखी थी। यह साउथ की फिल्म का रीमेक थी।