हिंदी सिनेमा में कलाकारों ने अलग-अलग तरह की बीमारियों से पीड़ित होने के चुनौतीपूर्ण किरदार पर्दे पर निभाए हैं। हिंदी फिल्मों में शाहरुख खान, राजेश खन्ना जैसे कई ऐसे कलाकार भी रहे जिन्होंने कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित किरदारों का दर्द परदे पर जीकर दिखाया और अपने अभिनय के लिए खूब तालियां बटोरीं। कैंसर दिवस के मौके पर हम आपको बताते हैं उन फिल्मों के बारे में जिनमें कलाकारों ने निभाए कैंसर पीड़ित के किरदार...
World Cancer Day: कैंसर पीड़ित का रोल कर सुपरहिट हुए राजेश खन्ना, सुशांत ने किया सभी को भावुक
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सफर (1970)
बेहतरीन अदाकारी की जब बात होगी तो राजेश खन्ना का नाम तो लिया ही जाएगा। उन्होंने असित सेन के निर्देशन में वर्ष 1970 में रिलीज हुई फिल्म 'सफर' में एक कैंसर पीड़ित का किरदार निभाया। फिल्म में राजेश के किरदार का नाम अविनाश है जो शर्मिला टैगोर के किरदार डॉक्टर नीला से प्रेम करता है। सब कुछ ठीक होने के बावजूद अविनाश कभी नीला से शादी करने की बात नहीं कहता। सबको लगता है कि शायद अविनाश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए, वह ऐसा कर रहा है। जबकि हकीकत बाद में पता चलती है कि अविनाश को अंतिम स्तर का कैंसर है।
आनंद (1971)
अगले ही साल एक बार फिर से राजेश खन्ना ने वर्ष 1971 की फिल्म 'आनंद' में कैंसर पीड़ित का किरदार निभाया। राजेश खन्ना का इस फिल्म में किरदार आनंद सहगल का है जिसे आंतों में दुर्लभ कैंसर है। आनंद जानता है कि वह छह महीने से ज्यादा जी नहीं सकता। लेकिन, फिर भी वह खुश रहता है और अपने आसपास के लोगों को भी खुश करता है। यहां भास्कर बनर्जी नाम का एक किरदार है जिसे अमिताभ बच्चन ने निभाया। भास्कर भी आनंद के व्यक्तित्व से प्रभावित होता है और ये दोनों दोस्त बन जाते हैं। राजेश खन्ना की यह फिल्म उनकी बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इसके लिए राजेश खन्ना ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।
याद रखेगी दुनिया (1992)
वर्ष 1989 की तेलुगू भाषा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गीतांजलि' का रीमेक दीपक आनंद ने वर्ष 1992 में 'याद रखेगी दुनिया' नाम से बनाया। मणि रत्नम की इस कहानी को जब हिंदी में बनाया गया तो इसमें मुख्य भूमिका निभाई आदित्य पंचोली और रुखसार रहमान ने। आदित्य पंचोली का किरदार फिल्म में विक्की आनंद का रहा जो एक सड़क दुर्घटना होने के बाद अस्पताल में जाता है। वहां से उसे पता चलता है कि उसे कैंसर है। इतना सुनते ही विक्की दुनियादारी को छोड़कर पहाड़ों में जीवन व्यतीत करने चल देता है। वहां उसकी मुलाकात होती है नैना से। नैना एक हंसमुख लड़की है। दोनों एक दूसरे से मिलते हैं और प्यार कर बैठते हैं। फिर विक्की को पता चलता है कि नैना को भी वही बीमारी है जो खुद विक्की को है।
कल हो न हो (2003)
हिंदी फिल्मों के बादशाह रह चुके अभिनेता शाहरुख खान ने भी निखिल आडवाणी की फिल्म 'कल हो ना हो' में एक कैंसर पीड़ित की भूमिका निभाई है। इस फिल्म में शाहरुख के साथ सैफ अली खान और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में रहे। यह कहानी मुख्य रूप से प्रीति जिंटा के किरदार नैना कपूर की है जो बहुत निराशावादी है। उसे अपने पड़ोस में रहने वाले लड़के अमन माथुर से प्रेम हो जाता है। अमन माथुर का किरदार शाहरुख खान ने निभाया है। अमन पहले से ही कैंसर का मरीज है इसलिए वह कोशिश करता है कि नैना उसके करीब न आकर उसके दोस्त रोहित पटेल से नजदीकियां बढ़ाए। शाहरुख खान का काम यहां काबिले तारीफ रहा। शाहरुख को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।