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यश चोपड़ा को इंजीनियर बनाना चाहते थे परिजन, जानें दिवंगत निर्देशक के बारे में कुछ खास बातें
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रतीक्षा राणावत
Updated Wed, 21 Oct 2020 06:23 PM IST
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यश चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
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साल 2012 में आज ही के दिन यानी 21 अक्तूबर को सिनेमा की दुनिया का एक जादूगर इस दुनिया को अलविदा कह गया था। बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा का 21 अक्तूबर 2012 को निधन हो गया था। यश चोपड़ा भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनका काम और उनका रचा सिनेमा हमेशा हर सिनेप्रेमी के दिल में मौजूद रहेगा। यश चोपड़ा की पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको बताते हैं यश चोपड़ा के बारे में कुछ खास बातें...
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यश चोपड़ा, रेखा, अमिताभ बच्चन
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
पाकिस्तान में जन्मे यश चोपड़ा पर परिवार से इंजीनियर बनने का दबाव था लेकिन यश चोपड़ा को तो फिल्मों का रोग लग चुका था। सो अपने बड़े भाई बीआर चोपड़ा के पास वो भी मुंबई आ गए। 70 के दशक में उन्होंने एक से एक बेमिसाल फिल्में बनाईं। अमिताभ बच्चन-सलीम जावेद-यश चोपड़ा के घातक तालमेल ने दीवार और त्रिशूल जैसी फिल्में दीं। अमिताभ बच्चन को बुलंदियों पर पहुँचाने में यश चोपड़ा का भी हाथ रहा। दाग में दो पत्नियों के बीच संघर्ष करते व्यक्ति की दास्तां कहने की हिम्मत तब उन्होंने की।
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यश चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
जीवन की वास्तविकता और कठोर सच्चाईयों से रूबरू करवातीं फिल्मों के बीच उन्होंने सिलसिला और कभी कभी भी दी। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि 80 का दशक यश चोपड़ा के लिए भटकाव वाला दौर रहा। 80 के दौर की उनकी ज़्यादातर फिल्मों से सामांजस्य नहीं बना पाई। एक इंटरव्यू में खुद यश चोपड़ा ने कहा था कि 80 के दौर में उन्हें अपनी ही एक फिल्म का पोस्टर देखकर लगा था कि उनकी फिल्मों में केवल पोस्टर पर से सितारों के चेहरे बदल रहे हैं, कहानी वही रहती है। तब उन्होंने चांदनी बनाई।
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यश चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
इसके बाद स्विट्जरलैंड की वादियाँ, खूबसूरत नजारे, रोमांस का ऐसा ताना बाना उन्होंने बुना कि हर ओर वाकई चाँदनी बिखर गई। कहना गलत नहीं होगा कि यश चोपड़ा खूबसूरती के पुजारी थे। रुपहले पर्दे पर हुस्न को कैसे चार चाँद लगाए जाते हैं, इसमें यश चोपड़ा माहिर थे। श्रीदेवी, जूही चावला, माधुरी दीक्षित की फिल्में इसकी मिसाल हैं।
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यश चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला
वैसे ऐसा नहीं है कि सिनेमा के इस जादूगर ने जब भी छड़ी घुमाई तब करिश्मा ही हुआ हो, कई बार यश चोपड़ा की फिल्मों के दर्शकों ने नापसंद भी किया। लेकिन यश ने हर बार एक कदम आगे बढ़कर खुद को साबित किया और दर्शकों का प्यार जीता। बता दें कि आज भले ही यश चोपड़ा को केवल मोहब्बत और रोमांस के लिए याद किया जाता है लेकिन 60 और 70 के दशक में उनकी सृजनशीलता बिल्कुल दूसरे शिखर पर थी।
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