किसी नए टेलीविजन धारावाहिक को शुरू करने से पहले जितनी माथापच्ची सीरियल की निर्माता टीम के लेखकों और टीवी चैनल की क्रिएटिव टीम के बीच होती है, उसे एक बार खुद देख लें तो हो सकता है आपको लगे कि इससे बढ़िया तो कोई दूसरा रियलिटी शो भी नहीं हो सकता। तमाम ‘ज्ञान’ लगाने के बाद भी जब धारावाहिक चल नहीं पाता तो भला किसे अच्छा लगता होगा, लेकिन यही दरअसल किसी चैनल की क्रिएटिव टीम का असली टेस्ट होता है और इस टेस्ट में इस बार फेल होने की बारी जीटीवी की टीम की है।
जीटीवी की क्रिएटिव टीम को भारी पड़ी नकल, जोर शोर से शुरू हुए इस धारावाहिक का अंत करीब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जी टीवी का धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' बड़े अरमानों से शुरू हुआ। लेकिन, इस कार्यक्रम को शुरू करने से पहले न तो दर्शकों की पसंद का कोई सर्वे हुआ और न ही कोई रिसर्च। ये मानकर कि कंपनी के दूसरे चैनल एंडटीवी पर चल रहे शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ जैसा ही कोई सीरीयल बना दिया जाए तो ये टीआरपी में जलवे काट देगा, जी टीवी का धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' शुरू हुआ।
लेकिन धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' को शुरू हुए ठीक से दो महीने भी नहीं हो पाए हैं और अब इसके बंद होने की भी खबरें आ रही हैं। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि यह धारावाहिक बहुत ही जल्द टीवी को अलविदा कह देगा। चैनल के फैसले की खबरें बोर्ड रूम मीटिंग से बाहर आ चुकी हैं और इस बारे में टेलीविजन जगत में तरह तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं।
बताया गया कि इस कॉमेडी शो को दर्शक नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से टीआरपी नहीं आ रही है। धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' की शुरुआत में ही ‘अमर उजाला’ ने इसे अपने रिव्यू में ओरीजनल सीरियल की भोंडी नकल बताया था। जी टीवी के सूत्रों के अनुसार धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' का आखिरी एपीसोड 4 दिसंबर को होगा। इस शो की जगह चैनल की योजना अपने पुराने शो ‘कुबूल है’ को लगाने की है और धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' की जगह 'क्यों रिश्तो में कट्टी बट्टी' नाम के नए धारावाहिक को प्रसारित करने की योजना बनाने के निर्देश चैनल की मार्केटिंग टीम को दिए गए हैं। धारावाहिक 'रामप्यारे सिर्फ हमारे' को दर्शकों ने कई कारणों से नापसंद किया है।
धारावाहिक 'राम प्यारे सिर्फ हमारे' के बारे में कानपुर की सुबोध बताती हैं कि ये धारावाहिक धार्मिक अस्थाओं का मजाक उड़ाता है और उन्होंने इसे पहले एपीसोड के बाद दोबारा कभी नहीं देखा। वहीं, वाराणसी की डिंपल का कहना है कि इस तरह के धारावाहिक बनते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब ओटीटी की तरह टेलीविजन पर भी सेंसरशिप के बारे में विचार करना पड़ेगा। शो के बंद होने की खबरों के बारे में जी टीवी की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश भी की गई, लेकिन चैनल की टीम ने न तो ये बताया कि ये धारावाहिक कब से बंद हो रहा है और न ही इन चर्चाओं को झूठ ही ठहराया।