अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रंगनाथन माधवन बड़े परदे के साथ-साथ निजी जीवन में भी आदर्श स्थापित करते चलते हैं। इस साल की उनकी पहली फिल्म ‘शैतान’ में उनके दुष्ट किरदार को सबने खूब पसंद किया। अब उनकी नई तमिल फिल्म ‘अदृष्टसाली’ के इन दिनों हर तरफ चर्चे हैं। माधवन की हाल के दिनों में चर्चा एक पान मसाला का विज्ञापन नकारने को लेकर भी खूब हुई। इन सब मुद्दों पर उनके ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की खास बातचीत।
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आर माधवन, सरिता बिरजे, वेदांत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपने हाल ही में उत्तर प्रदेश की एक बड़ी पान मसाला कंपनी का ब्रांड अंबेसडर बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। क्या सोच रही इसके पीछे?
मैं देश का एक जिम्मेदार नागरिक हूं। अभिनेता होने से पहले मैं एक पिता हूं, एक बेटा हूं और एक पति हूं। मैं ऐसा कोई काम नहीं करना चाहता जिसकी वजह से मेरे घरवाले असहज हों। जितना मैंने मांगा होगा, ईश्वर ने मुझे उससे कहीं ज्यादा दिया है। इसके लिए मैं अपने प्रशंसकों का और ऊपरवाले का आभारी हूं।
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अदृष्टशाली
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी नई फिल्म ‘अदृष्टसाली’ का भी कुछ कुछ ऐसा ही मतलब है शायद हिंदी में?
(हंसते हुए) हां, इसका हिंदी में अर्थ होगा, किस्मतवाला। तमिल फिल्म है ये और इसे बनाने में हमें बहुत ही आनंद आया। अभिनय का असली आनंद इसी में हैं कि आपको अपने किरदार से प्यार हो जाए।
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शैतान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन, कभी दर्शकों का किरदार से नफरत करना भी जरूरी है...
आपका इशारा मेरी इस साल की पहली फिल्म ‘शैतान’ की तरफ है तो हां बिल्कुल। ऐसा किरदार हिंदी सिनेमा में मैंने पहली बार किया और जहां भी मैं जाता हूं लोग मुझसे इस किरदार के बारे में पूछते जरूर हैं। परदे पर किरदारों के साथ प्रयोग करते रहना मुझे अच्छा लगता है। मैं अपनी हर फिल्म में प्रशंसकों को चौंकाना चाहता हूं।
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डिकपल्ड
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
छोटे परदे से आपने सफर शुरू किया, बड़े परदे पर खूब राज किया और ओटीटी वाले आपके पीछे पड़े रहते हैं, अब क्या?
मेरा मानना है कि मनुष्य को हमेशा अनदेखे के लिए तैयार रहना चाहिए। सिनेमा ने मुझे एक ऐसा आसमान दिया है जहां मैं हर फिल्म में एक नया जीवन जीता हूं। ओटीटी पर मुझे खूब कहानियों के प्रस्ताव आते हैं, पर मै वहां ऐसा कुछ नहीं करना चाहता जिससे मेरे फिल्मों के प्रशंसकों की भावनाएं आहत हों।