'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज’ दोनों फिल्मों में एएसपी ओमर हैदर बने आदित्य उप्पल चर्चा में हैं। पहले पार्ट में उनका सामना अक्षय खन्ना के साथ एक्शन सीन्स में हुआ, जबकि दूसरे पार्ट में रणवीर सिंह के साथ उनका इंटेंस टकराव देखने को मिला। वहीं संजय दत्त के साथ काम करने का अनुभव इस सफर को और खास बना गया।
Dhurandhar 2: रणवीर को मारते वक्त डर गए थे आदित्य, अक्षय खन्ना ने दिया यह सुझाव; संजय दत्त को लेकर कही ये बात
Dhurandhar 2 Actor Aditya Uppal Interview: ‘धुरंधर 2’ में संजय दत्त के किरदार का राइट हैंड बने अभिनेता आदित्य उप्पल ने फिल्म में काम करने का अपना अनुभव साझा किया है। एक्टर ने बताया कि रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना से लेकर संजय दत्त सरीखे स्टार्स से क्या कुछ सीखने को मिला और सेट पर कैसा था उनका व्यवहार…
रणवीर सिंह के चोट लगने का था डर
रणवीर सिंह के साथ अपने इंटेंस सीन को याद करते हुए आदित्य उप्पल ने कहा कि इस सीन में काफी वक्त लगा। हम लोग रात के करीब 3-4 बजे शूट कर रहे थे, क्योंकि हमें ऐसा एनवायरमेंट चाहिए था, जहां पूरा माहौल शांत हो और एक कोने में ये इंटेंस इंटरैक्शन चल रहा हो।
उस वक्त सेट पर आदित्य धर भी थे। मुझे रणवीर को मारना करना था, लेकिन मैं बिल्कुल भी कंफर्टेबल नहीं था। मैंने इससे पहले कभी ऐसा एक्शन नहीं किया था। मेरे लिए ये पूरी तरह नया था और मैं अंदर से नर्वस भी था कि कहीं सच में चोट न लग जाए। जबकि निर्देशक आदित्य धर ने मुझे पूरे सीन को काफी डिटेल में बताया था।
उन्होंने ये भी बताया कि मैं कोई गुंडा नहीं हूं, बल्कि एक ट्रेंड ऑफिसर हूं। इसलिए हर मूवमेंट में एक तरीका और डिसिप्लिन होना चाहिए। वो छोटी-छोटी चीजों पर भी बहुत ध्यान देते हैं।
रणवीर ने दिया हौसला, बोले- कस के मार
हालांकि, इतने सबके बावजूद जब कैमरा ऑन हुआ तो पहले दो शाट बिल्कुल खराब चले गए। आदित्य ने कहा कि मैं रणवीर को पूरी ताकत से मार ही नहीं पा रहा था। मैं चीट करने की कोशिश कर रहा था कि कहीं ज्यादा जोर से न लग जाए या सच में चोट न लग जाए। लेकिन रणवीर ने मुझे कंफर्टेबल किया।
उन्होंने कहा कि ‘मार, डोंट वरी यार, मैं इसके लिए ट्रेनिंग करता हूं।’ फिर मैंने खुद को पूरी तरह उस सीन में डाला और जैसा सीन की जरूरत थी, वैसे ही किया। सीन खत्म होने के बाद रणवीर ने मुझसे पूछा ‘तू डर क्यों रहा था?’
मैंने कहा कि मैं डर नहीं रहा था, बस पहली बार ऐसा कर रहा था इसलिए थोड़ा नर्वस था। अगर गलती से भी कुछ हो जाता, तो बहुत सारी चीजें रुक सकती थीं, इसलिए मैं खुद को थोड़ा रोक रहा था।
अक्षय खन्ना से काफी कुछ सीखने को मिला
अक्षय खन्ना के साथ फिल्म के पहले पार्ट मे इंटेंस सीन को याद करते हुए आदित्य उप्पल ने कहा कि मैं सच में बहुत डरा हुआ था। मैंने उन्हें बचपन से स्क्रीन पर देखा है। अचानक आप उनके सामने खड़े हैं, उन्हें हथकड़ी पहनानी है, जीप में डालना है और मारना भी है, ये सब मेरे लिए बहुत बड़ा मोमेंट था।
इस सीन में सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि खुद पर कंट्रोल बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। मेरी कोशिश यही थी कि मैं अपने कैरेक्टर के कोड ऑफ कंडक्ट में रहूं। हालांकि, लोग कहते हैं कि अक्षय खन्ना ज्यादा बात नहीं करते, लेकिन मेरा अनुभव अलग रहा।
उन्होंने कई बार मुझे साइड में अकेला खड़ा देखा तो खुद बुलाया। वो कहते थे ‘तू आज मेरे साथ बैठ जा।’ गाड़ी में भी मुझे अपने साथ बैठाते थे और अपनी टीम से कहते थे कि इसकी मदद करो। उनके साथ बातचीत काफी सीख भरी रहती थी। हमने पॉलिटिकल सिनेरियो से लेकर कई चीजों पर बात की। लेकिन जब वो काम कर रहे होते हैं, तो उनका पूरा फोकस सिर्फ काम पर होता है।
खुलकर खेलने का मौका देते हैं संजय दत्त
फिल्म में आदित्य ने संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के राइट हैंड का किरदार निभाया है। संजय दत्त के साथ काम करने को सपना पूरा होने जैसा बताते हुए आदित्य ने कहा कि मैं बचपन से उनका फैन रहा हूं। मैंने उनकी फिल्में वीसीआर पर बार-बार देखी हैं।
जब मुझे बताया गया कि मैं इस फिल्म में उनका राइट हैंड हूं, तो मैंने बिना सोचे हां कर दी। संजय दत्त आपको एक अलग ही तरह की फ्रीडम देते हैं। वो आपको आगे बढ़ाते हैं। वो कहते हैं - ‘तू खेल यार, तू कर।’
उनकी ये बात सिर्फ डायलॉग नहीं होती, वो आपको सच में एक ऐसी एनर्जी देते हैं कि आप खुलकर, बिना डर के काम कर पाते हैं। वो एक बार सीन समझाने पर तुरंत पकड़ लेते हैं। जब वो अपनी लाइन्स बोल रहे होते हैं, तो आपका रिएक्शन अपने आप बेहतर हो जाता है।
अंत में तीनों कलाकारों की तारीफ करते हुए आदित्य कहते हैं कि हम अक्सर सुनते हैं कि एक्टर्स इनसिक्योर होते हैं, चाहते हैं कि उनका स्क्रीन स्पेस ज्यादा हो। लेकिन यहां बिल्कुल उल्टा था। अक्षय खन्ना, संजय दत्त और रणवीर सिंह तीनों ने मुझे अच्छा करने के लिए प्रेरित किया।
ये लोग सिर्फ अपना सीन अच्छा करने में नहीं लगे थे, बल्कि ये चाहते थे कि सामने वाला भी उतना ही अच्छा करे। रणवीर मॉनिटर से गाइड कर रहे थे। अक्षय खन्ना बातचीत के जरिए सिखा रहे थे और संजय दत्त आपको खुलकर खेलने की आजादी दे रहे थे। ये सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां आप खुद बेहतर बन जाते हैं।