साल की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म 'धुरंधर 2' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही ऐसा माहौल बना हुआ था, जिसने पूरी इंडस्ट्री को चौंका दिया। ‘धुरंधर’ की सफलता ने जहां ऑडियंस की उम्मीदें बढ़ा दी थीं, लेकिन अब ‘धुरंधर 2’ उन उम्मीदों से कहीं आगे जाती नजर आ रही है। एडवांस बुकिंग का आलम यह रहा कि रिलीज से एक दिन पहले ही शो हाउसफुल हो गए थे।
‘मैंने ऐसा कभी नहीं देखा’, ‘धुरंधर 2’ का क्रेज देख हैरान हुए राकेश बेदी; ‘टॉक्सिक’ की रिलीज टलने पर कही ये बात
Rakesh Bedi Interview Dhurandhar 2: ‘धुरंधर 2’ में जमील जमाली का किरदार निभाने वाले राकेश बेदी फिल्म को लेकर लोगों का उत्साह देखकर हैरान हैं। जानिए ‘धुरंधर 2’ को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा…
50 साल हो गए इंडस्ट्री में ऐसा कभी नहीं देखा
बातचीत के दौरान राकेश बेदी ने कहा, 'देखिए… मैं ये बात बहुत सोच समझकर कह रहा हूं और दिल से कह रहा हूं कि मैं सच में हैरान हूं। तकरीबन 50 साल हो गए इस इंडस्ट्री में काम करते करते, न जाने कितनी फिल्में देखीं, कितनी रिलीज देखीं।
लेकिन पहली बार मेरी आंखों के सामने ऐसा हो रहा है कि फिल्म रिलीज से एक दिन पहले ही हर शो हाउसफुल हो गया। एक भी सीट खाली नहीं। मैं खुद बार बार पूछ रहा था कि क्या सच में एक भी टिकट नहीं बचा। क्योंकि आज के दौर में ऐसा होना कोई छोटी बात नहीं है, यह लगभग नामुमकिन माना जाता है।’
यह सिर्फ कमाई नहीं, लोगों का प्यार है
एक्टर ने आगे कहा, 'सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह सिर्फ कमाई नहीं है, यह लोगों का प्यार है, उनकी भावना है। ऐसा लग रहा है कि लोगों ने फिल्म को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उसे जी लिया है, उसमें अपना कुछ ढूंढ लिया है। आज के समय में ऑडियंस इतनी जल्दी जुड़ती नहीं है, लेकिन यहां जो हो रहा है, वह दिल से हो रहा है।'
यह मेरी नहीं, पूरी टीम की जीत है
राकेश बेदी ने इस सफलता का श्रेय पूरी टीम को देते हुए कहा, 'मैं एक बात बहुत साफ कहना चाहता हूं कि यह किसी एक की जीत नहीं है। यह उस पूरी टीम की जीत है, जिसने इस फिल्म में अपनी जान लगा दी। हर किरदार, हर सीन, हर छोटा सा पल मिलकर यह जादू बना रहा है। मैंने अपने रोल में थोड़ा सा हास्य डालने की कोशिश की थी, लेकिन जो प्रतिक्रिया मिल रही है, वह मेरी कल्पना से भी बहुत आगे है। कभी कभी ऑडियंस आपको इतना दे देते हैं कि आप खुद सोच में पड़ जाते हैं कि क्या मैं सच में इसके लायक हूं।'
इस फिल्म ने मुझे फिरसे जगा दिया
अपने अनुभव साझा करते हुए राकेश ने कहा, 'सच कहूं तो इतने कई साल के बाद हम लोग एक आरामदायक स्थिति में चले जाते हैं। हमें लगता है कि हम सब जान गए हैं, कैसे करना है, क्या करना है और फिर हम बिना सोचे समझे काम करने लगते हैं। लेकिन अचानक कोई फिल्म आती है और आपको झटका देती है, आपको हिलाकर रख देती है और आपको फिर से जगा देती है। धुरंधर 2 मेरे लिए वही झटका है। इसने मुझे फिर से वही भूख दी है, वही जोश दिया है जैसे मैं अपने करियर के पहले दिन खड़ा हूं।'
ऐसा जुनून मैंने तीन बार देखा है
अभिनेता ने कहा, 'मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा जुनून, ऐसा पागलपन बहुत कम बार देखा है और सच कहूं तो सिर्फ तीन बार ही महसूस किया है। पहली बार फिल्म एक दूजे के लिए के समय, जब मेरे किरदार की वजह से लोगों ने मुझे धमकियां तक दे दी थीं।
लोग इतने ज्यादा इमोशनल हो गए थे कि वे स्क्रीन और असल जिंदगी के बीच का फर्क ही भूल गए थे। कई लोग तो मुझसे कहते थे कि आपने ऐसा क्यों किया, जैसे वह सब सच में हुआ हो। उस दौर में न सोशल मीडिया था, न इतनी तेजी से खबरें फैलती थीं, लेकिन फिर भी ऑडियंस का जुड़ाव इतना गहरा था कि उनकी भावनाएं सीधे हमारे तक पहुंचती थीं।
दूसरी बार मैंने वैसा ही जुनून ‘शोले’ के दौरान देखा, जब सिनेमा सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया था और किरदार उनके दिलों में बस गए थे।
अब तीसरी बार, इतने साल बाद, मैं वही आग, वही दीवानगी, वही पागलपन धुरंधर 2 के साथ देख रहा हूं। फर्क बस इतना है कि अब वक्त बदल गया है, माध्यम बदल गए हैं, लेकिन ऑडियंस का प्यार और उनका जुड़ाव वैसा ही है। यकीन मानिए, इतने लंबे करियर के बाद भी इस तरह का अनुभव मिलना बहुत बड़ी बात है और यह किसी कलाकार के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है।'
दूसरी फिल्मों का हटना समझदारी है
दूसरी फिल्मों के रिलीज टलने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'जहां तक दूसरी फिल्मों के पीछे हटने की बात है, तो मैं इसे डर नहीं कहूंगा। यह समझदारी है, यह बिजनेस है। जब एक फिल्म का इतना जबरदस्त असर दिखता है, तो लोग सोचते हैं कि अभी क्यों टकराना। थोड़ा इंतजार करते हैं और जब मैदान खाली होगा तब आते हैं। यह एक रणनीति है और इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए रणनीति बहुत जरूरी है।'
आज भी वही पहली बार जैसा एहसास
बातचीत के अंत में राकेश बेदी ने कहा, 'मेरे लिए इतने साल के बाद भी जब मेरी फिल्म रिलीज होती है तो अंदर से वही एहसास आता है जैसे जिंदगी में कुछ पहली बार हो रहा हो। वही उत्साह, वही घबराहट, वही इंतजार और शायद यही इस काम की सबसे खूबसूरत बात है कि आप कितने भी पुराने हो जाएं, अंदर का कलाकार कभी मरता नहीं है।'