संयम उनमें कूट कूट कर भरा है। अभिनेत्री उषा किरण की नातिन, मॉडल पिता अद्वैत खेर की बेटी, अभिनेत्री मौसी तनवी आजमी की भांजी और अपने बूते सब कुछ पा लेने की जिद रखने वाली अभिनेत्री हैं संयमी। जी हां, सैयमी या सैयामी खेर नहीं, इनका नाम संयमी खेर है। संयमी जल्द ही अमेजन प्राइम पर प्रसारित होने वाली फिल्म ‘अग्नि’ में नजर आने वाली हैं। ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की संयमी से एक खास बातचीत।
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अग्नि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘अग्नि’ के सेट पर तो सारे कलाकारों और तकनीशियनों में आप ही सबसे फिट रही होंगी?
आप शायद आयरनमैन रेस से इसे जोड़ रहे हैं। वह मेरा पसंदीदा खेल है और यहां फिल्म की शूटिंग की जरूरतें अलग रहीं। इस किरदार के लिए हमें अलग से ट्रेनिंग मिली। हमने खूब मेहनत की। असल जिंदगी के फायरफाइटर्स के साथ दिन बिताए और इस सबको करते हुए समझ आया कि इस पेशे के बारे में अब तक सिनेमा का कैमरा न घूमना हम सबके लिए शर्म की बात है।
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संयमी खेर
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और, मैराथन दौड़ना या कहें कि सिर्फ दौड़ना आपने शुरू किया पहली बार दिल टूटने के बाद?
मैराथन दौड़ना एक तरह से मेरा नशा बन चुका है। जो लोग मुझे करीब से जानते हैं, वे ये भी जानते हैं कि मैंने कब और क्यों दौड़ना शुरू किया? काफी पहले की बात है ये। कॉलेज के दिनों की। मेरा किसी से मन लगा हुआ था और उसने मेरा दिल तोड़ दिया। पहला हार्ट ब्रेक बहुत मुश्किल होता है और मैंने इससे उबरने के लिए दौड़ना शुरू कर दिया। अब मेरी हर मुश्किल का एक ही इलाज है, दौड़ना।
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संयमी खेर
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और, संयम तो आपके नाम में ही है?
जी हां, और इसी का विशेषण है संयमी। मेरा असल नाम संयमी ही है। अनुस्वार की वर्तनी अंग्रेजी में नाम लिखते समय एन होनी चाहिए लेकिन फिर शायद नाम कुछ और ही लिखा जाता। अब भी मैं जब भी मौका मिलता है, अपना सही नाम बताती ही हूं। लेकिन, कम लोग ही हैं जो इस पर इतना ध्यान देते हैं।
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संयमी खेर
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परिवार का साथ मनोरंजन की दुनिया में काम करने वालों के लिए कितना जरूरी है?
मनोरंजन की दुनिया में टिके रहना आसान नहीं हैं। यहां स्वीकृतियों से ज्यादा हमारा सामना नकारे जाने से होता है। ऐसे में कलेजा मजबूत न हो तो वह बैठने लगता है। मेरे साथ भी ऐसा हुआ है। लेकिन, मेरा मानना है कि घरवालों का साथ हो तो फिर कोई भी मानसिक स्थिति हो, हमें उबरने में मदद मिल ही जाती है।