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Women Equality Day: 'परिवार में बेटियों की आवाज न दबाई जाए', महिला समानता दिवस पर श्वेता त्रिपाठी की अपील
Shweta Tripathi Exclusive Interview: आज 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जा रहा है। 'मिर्जापुर' की गोलू यानी श्वेता त्रिपाठी ने इस विषय में अपने विचार साझा किए हैं।
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श्वेता त्रिपाठी
- फोटो : इंस्टाग्राम@ battatawada
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26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मकसद सिर्फ महिलाओं के अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि बदलाव कहां से शुरू होता है। इसी मौके पर अमर उजाला ने बात की अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी से, जिन्होंने अपनी बेबाक राय रखी।
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श्वेता त्रिपाठी
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बराबरी घर से शुरू होती है
श्वेता कहती हैं, 'आज भी हमें ऐसी खबरें मिलती हैं कि कोई 28 साल की लड़की को उसके पति ने जिंदा जला दिया। ये बहुत दुखद है। इसलिए बराबरी की बात सिर्फ बड़ी-बड़ी नीतियों से नहीं, घर से शुरू होनी चाहिए। अगर परिवार ही बेटियों के सपनों और आवाज को दबा देगा तो फिर बाहर की संस्थाएं या सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी।'
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श्वेता त्रिपाठी
- फोटो : इंस्टाग्राम@ battatawada
'मैं खुशनसीब रही हूं'
वह अपने बचपन को याद करते हुए कहती हैं, 'मैं खुशनसीब रही कि मेरे घर में हमेशा शिक्षा और सोच को अहमियत मिली। पापा आईएएस ऑफिसर रहे, मम्मी टीचर और दीदी हेडमिस्ट्रेस। ऐसे माहौल ने मुझे सिखाया कि सही चीज के लिए खड़ा होना जरूरी है, चाहे मुश्किल ही क्यों न हो।'
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श्वेता त्रिपाठी
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'सवाल उठाइए, तभी बदलाव होगा'
श्वेता मानती हैं कि बराबरी की लड़ाई रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होनी चाहिए। 'लोग सोचते हैं कि इक्वलिटी पर बात करना भारी-भरकम मुद्दा है। लेकिन असल में इसे रोज की बातचीत का हिस्सा बनाना होगा। जब तक ये नॉर्मल नहीं बनेगा, तब तक बदलाव नहीं आएगा। सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए।'
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श्वेता त्रिपाठी
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'सिनेमा समाज का आईना है'
सिनेमा और समाज के रिश्ते पर श्वेता कहती हैं, 'ऑडियंस जो देखना चाहती है, वही बनेगा। इसलिए कहानियों पर फोकस करना होगा। चाहे हीरो हो या हीरोइन - कहानी अच्छी होगी तो लोग देखेंगे। मुझे अलग-अलग तरह की लड़कियों का किरदार निभाना पसंद है, जो हमें सोचने पर मजबूर करें, जो स्टीरियोटाइप तोड़ें। यही सिनेमा की ताकत है।'
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