अभिनेता फारूक शेख का नाम आते ही आंखों के सामने मोहक इंसान, संजीदा अभिनेता की छवि उभर कर सामने आती है। फारूक ने जिस सादगी से फिल्मों में किरदार निभाए, उसे देखकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं। और, यही बात उन्हें एक उम्दा कलाकार बनाए रही। 25 मार्च 1948 जमींदार परिवार में जन्मे फारूक शेख के पिता चाहते थे कि वह वकील बने, पिता की ख्वाहिश को पूरी करने के लिए उन्होंने वकालत पढ़ाई तो की, लेकिन राह उन्होंने अभिनय की चुनी। फारुक शेख ने फिल्म 'गर्म हवा' से अपना डेब्यू किया। बताया जाता है कि फारूक शेख को अभिनय का जुनून ऐसा था कि उन्होंने इस फिल्म के लिए फीस तक नहीं ली। पहली फिल्म से ही फारूक शेख ने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था। 25 मार्च 1948 को अमरोली, वडोडरा (बड़ौदा) में जन्मे फारूक का 65 साल की उम्र में 28 दिसंबर 2013 को दुबई में इंतकाल हुआ। आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके करियर के 10 दमदार किरदारों के बारे में...
Farooq Sheikh: नाम के मुताबिक फारूक बने अदाकारी की सबसे बड़ी कसौटी, इन 10 किरदारों में दिखे अभिनय के सारे सबक
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फिल्म : गर्म हवा (1 मई 1974)
किरदार : सिकंदर मिर्जा
अभिनेता फारूक शेख ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म 'गर्म हवा' से की। एमएस सथ्यू के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारत के विभाजन के बाद मुसलमानों की दुर्दशा पर आधारित सबसे सबसे मार्मिक फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में फारूक शेख ने बलराज साहनी के छोटे बेटे सिकंदर मिर्जा की भूमिका निभाई थी। जो अपने अधिकारों के लिए लड़ता है। अपनी पहली ही फिल्म से फारूक शेख ने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था।
फिल्म: शतरंज के खिलाड़ी (3 अक्टूबर 1977)
किरदार : अकील
सत्यजित रे के निर्देशन में बनी फिल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' की कहानी अवध के नवाब वाजिद अली शाह और शतरंज के खेल मे पागल दो मंत्रियों मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली के इर्द-गिर्द घूमती है। नवाब एक बेपरवाह कलाप्रेमी होता है जिसे बाद में अंग्रेजी सेना परास्त कर देती है। इस फिल्म में अवध के नवाब वाजिद अली शाह की भूमिका अमजद खान, मिर्जा सज्जाद अली की भूमिका संजीव कुमार और मीर रोशन अली की भूमिका सईद जाफरी ने निभाई थी। इस फिल्म में फारूक शेख का भी एक छोटा सा किरदार अकील का निभाया था, जिसमें उन्होंने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से जान फूंक दी थी।
फिल्म : गमन (2 मई 1978)
किरदार : गुलाम हसन
फिल्म 'गमन' मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। इस फिल्म में फारूक शेख ने गुलाम हसन का किरदार निभाया था, जो उत्तर प्रदेश के बदायूं से मुंबई जैसे बड़े शहर में टैक्सी चला कर जीवन यापन करने की कोशिश करता है। इस फिल्म में स्मिता पाटिल ने फारूक शेख की पत्नी खैरुन की भूमिका निभाई थी। गुलाम हसन अपनी बीमार मां और पत्नी को छोड़ कर मुंबई आया है, लेकिन कड़े संघर्ष के बाद ही इतने पैसे इकट्ठा नहीं कर पाता है कि वापस अपने परिवार से मिलने जा सके। इस फिल्म के माध्यम से उत्तर प्रदेश से मुंबई आए एक प्रवासी की कहानी को मुजफ्फर अली ने बहुत ही गहराई से पेश किया और फारूक शेख ने गुलाम हसन का किरदार को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था।
फिल्म : नूरी (11 मई 1979)
किरदार : युसूफ फकीर मोहम्मद
देखा जाए तो सही मायने में फारूक शेख को पहचान यश चोपड़ा की फिल्म 'नूरी' से मिली। इस फिल्म का निर्माण यश चोपड़ा और निर्देशन मनमोहन कृष्ण ने किया था। फारूक शेख ने इस फिल्म में युसूफ फकीर मोहम्मद की भूमिका निभाई थी, जिसे नूरी से इश्क हो जाता है और नूरी से उसकी शादी भी तय हो जाती है, लेकिन किसी कारणवश शादी नहीं हो पाती है। इस फिल्म में नूरी की भूमिका पूनम ढिल्लों ने निभाई थी। यह फिल्म भारत में सुपरहिट थी ही, साथ ही उस समय चीन में सबसे सफल भारतीय फिल्मों में से एक रही है।