फिल्म 'भ्रष्टाचार' का गीत 'तेरे नैना मेरे नैनों से, मीठी मीठी बातें करते हैं' हिंदी सिनेमा के बेहद लोकप्रिय गीतों में शुमार होता है। फिल्म में यह गीत अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी और अभिनेत्री शिल्पा शिरोडकर पर फिल्माया गया। वही, अभिनव जिन्होंने ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे पर्दे के चर्चित धारावाहिक 'हम लोग' में नन्हे के किरदार से की। अभिनव को हिंदी सिनेमा में जब खूब मौके मिल रहे थे, तो एकाएक कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें मुंबई छोड़नी पड़ी। देश में प्रसारित हुए पहले धारावाहिक ‘हम लोग’ का सबसे प्यारा किरदार निभाने वाले अभिनव हाल ही में 60 साल के हुए हैं। आइये जानते हैं, नन्हे की कहानी, अभिनव चतुर्वेदी की जुबानी..
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हाशिये के सुपरस्टार 14: ‘हम लोग’ का नन्हे अब 60 साल का, लीड हीरो के तौर पर लॉन्च होने के बाद छोड़ दी इंडस्ट्री
Sat, 27 Jan 2024 08:47 PM IST
दीक्षा पाठक
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Sat, 27 Jan 2024 08:47 PM IST
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अभिनव चतुर्वेदी
- फोटो : अमर उजाला
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हम लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शेखर कपूर घर आए तो पिताजी को लगा..
मेरे पिता अभय चतुर्वेदी दिल्ली के मॉर्डन स्कूल में हिंदी के अध्यापक रहे हैं। वह अपने जमाने के मशहूर हिंदी कमेंटेटर भी रहे। मेरी मां डॉक्टर विनीता चतुर्वेदी हिंदी साहित्य में पीएचडी की हैं। पिता जी ने शेखर कपूर को मॉर्डन स्कूल में पढ़ाया है। एक दिन शेखर कपूर का फोन आया कि वह मिलने आ रहे हैं। तब तक 'हम लोग' शुरू हो चुका था और 'बुनियाद' आना अभी बाकी था। पिताजी को लगा कि शेखर कपूर मुझे अपनी फिल्म के लिए साइन करने आ कहे हैं लेकिन वह आए और पिताजी से बोले, आपको फिल्म में लेना है। अब मेरे पिताजी परेशान कि क्या जवाब दें? फिर, फिल्म 'मासूम' का मुहूर्त शॉट पिताजी पर ही फिल्माया गया।
मेरे पिता अभय चतुर्वेदी दिल्ली के मॉर्डन स्कूल में हिंदी के अध्यापक रहे हैं। वह अपने जमाने के मशहूर हिंदी कमेंटेटर भी रहे। मेरी मां डॉक्टर विनीता चतुर्वेदी हिंदी साहित्य में पीएचडी की हैं। पिता जी ने शेखर कपूर को मॉर्डन स्कूल में पढ़ाया है। एक दिन शेखर कपूर का फोन आया कि वह मिलने आ रहे हैं। तब तक 'हम लोग' शुरू हो चुका था और 'बुनियाद' आना अभी बाकी था। पिताजी को लगा कि शेखर कपूर मुझे अपनी फिल्म के लिए साइन करने आ कहे हैं लेकिन वह आए और पिताजी से बोले, आपको फिल्म में लेना है। अब मेरे पिताजी परेशान कि क्या जवाब दें? फिर, फिल्म 'मासूम' का मुहूर्त शॉट पिताजी पर ही फिल्माया गया।
परबत के उस पार { अभिनव चतुर्वेदी}
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विवेक के जरिये मिली पहली फिल्म
ये उन दिनों की बात है जब विवेक वासवानी का एक सीरियल 'नई दिशाएं' आने वाला था। उस समय उसकी शूटिंग मुंबई में चल रही थी और मैं दिल्ली में था। विवेक वासवानी दिल्ली मेरे घर आए। उनके टीवी सीरियल को लेकर दिल्ली दूरदर्शन में कुछ मसला चल रहा था और दूरदर्शन का वह मसला मैंने हल करा दिया। एक दिन विवेक वासवानी के सीरियल के सेट पर मेरी मुलाकात कैमरा मैन नदीम खान से हुई। नदीम खान ने ही निर्देशक रमन कुमार से मुलाकात कराई जिन्होंने मुझे मेरी पहली फिल्म 'परबत के उस पार' में लॉन्च किया।
ये उन दिनों की बात है जब विवेक वासवानी का एक सीरियल 'नई दिशाएं' आने वाला था। उस समय उसकी शूटिंग मुंबई में चल रही थी और मैं दिल्ली में था। विवेक वासवानी दिल्ली मेरे घर आए। उनके टीवी सीरियल को लेकर दिल्ली दूरदर्शन में कुछ मसला चल रहा था और दूरदर्शन का वह मसला मैंने हल करा दिया। एक दिन विवेक वासवानी के सीरियल के सेट पर मेरी मुलाकात कैमरा मैन नदीम खान से हुई। नदीम खान ने ही निर्देशक रमन कुमार से मुलाकात कराई जिन्होंने मुझे मेरी पहली फिल्म 'परबत के उस पार' में लॉन्च किया।
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अभिनव चतुर्वेदी और अशोक मेहता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शाहरुख से पहले मुझे मिला मौका
वैसे तो चर्चे शाहरुख खान के खूब होते हैं लेकिन मैं पहला टीवी एक्टर हूं जिसे फिल्मों में लीड रोल मिला। इससे पहले के कलाकार फिल्मों से टीवी पर आते थे। मेरी पहली फिल्म 'परबत के उस पार' में खय्याम साहब का संगीत था। मशहूर फिल्म लेखक जावेद सिद्दीकी की बेटी लुबना फिल्म में मेरी हीरोइन थी। यह फिल्म हमने कश्मीर में शूट की थी। लेकिन वह फिल्म फ्लॉप हो गई। मैं बहुत दुखी और निराश हो गया, मुंबई में कोई बात नहीं करता था। मैं बहुत उदास रहता था। एक तरह से डिप्रेशन में आ गया था।
वैसे तो चर्चे शाहरुख खान के खूब होते हैं लेकिन मैं पहला टीवी एक्टर हूं जिसे फिल्मों में लीड रोल मिला। इससे पहले के कलाकार फिल्मों से टीवी पर आते थे। मेरी पहली फिल्म 'परबत के उस पार' में खय्याम साहब का संगीत था। मशहूर फिल्म लेखक जावेद सिद्दीकी की बेटी लुबना फिल्म में मेरी हीरोइन थी। यह फिल्म हमने कश्मीर में शूट की थी। लेकिन वह फिल्म फ्लॉप हो गई। मैं बहुत दुखी और निराश हो गया, मुंबई में कोई बात नहीं करता था। मैं बहुत उदास रहता था। एक तरह से डिप्रेशन में आ गया था।
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रमेश सिप्पी { बुनियाद के सेट पर}
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रमेश सिप्पी का एहसान हमेशा रहेगा
निर्देशक रमेश सिप्पी अगर नहीं होते 'बुनियाद' का जय और 'भ्रष्टाचार’ का गोपाल नहीं होता। 'हम लोग' और 'बुनियाद' के लेखक मनोहर श्याम जोशी जी ने ur फिल्म 'भ्रष्टाचार' लिखी थी। इस फिल्म में फिल्म में रेखा जी, मिथुन दा और रजनीकांत जी के साथ काम करने का मौका मिला। शिल्पा शिरोडकर की यह पहली थी। इस फिल्म में मेरा गाना 'तेरी नैना मेरी नैनो से मीठी मीठी बातें करते हैं' बहुत ही हिट हुआ।
निर्देशक रमेश सिप्पी अगर नहीं होते 'बुनियाद' का जय और 'भ्रष्टाचार’ का गोपाल नहीं होता। 'हम लोग' और 'बुनियाद' के लेखक मनोहर श्याम जोशी जी ने ur फिल्म 'भ्रष्टाचार' लिखी थी। इस फिल्म में फिल्म में रेखा जी, मिथुन दा और रजनीकांत जी के साथ काम करने का मौका मिला। शिल्पा शिरोडकर की यह पहली थी। इस फिल्म में मेरा गाना 'तेरी नैना मेरी नैनो से मीठी मीठी बातें करते हैं' बहुत ही हिट हुआ।