इस बार बॉन्ड सीरीज की 25वीं फिल्म में ब्रिटिश सीक्रेट एजेंट 007 के किरदार में कोई पुरुष नहीं, बल्कि महिला दिख सकती हैं। ब्रिटिश अखबार द डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार ब्रिटिश एक्टर लशाना लिंच, 007 का किरदार निभाएंगी। दरअसल पिछले 10-15 सालों में जेम्स बॉन्ड की भारत में अपनी एक फैन फॉलोइंग बन चुकी है। ऐसे में इस पैकेज में बात करते हैं 'बॉन्ड' के बारे में...
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इस स्पेशल सीरीज की बात करें तो 1973 में रोजर मूर के आने के बाद बॉन्ड की फिल्मों ने भारतीय दर्शकों में दिलचस्पी जगानी शुरू की। 'लिव एंड लेट डाइ', 'डायमंड्स आर फॉरएवर' व 'द मैन विथ द गोल्डेन गन' जैसी फिल्में दर्शकों ने खूब पसंद की। फिल्म 'आक्टोपसी' की तो काफी शूटिंग भारत में हुई थी और कबीर बेदी फिल्म के मुख्य खलनायक थे।
इसके बाद पियर्स ब्रासनन के आते-आते बॉन्ड की फिल्में भारत में धूम-धाम के साथ रिलीज होने लगीं और दर्शकों का प्यार भी बढ़ गया। दरअसल बॉन्ड का किरदार शीतयुद्ध की उपज है। जिस वक्त बॉन्ड की फिल्मों ने भारतीय दर्शकों के दिलो-दिमाग पर असर डालना शुरू किया तो देश दो-तीन युद्धों से गुजर चुका था। उसकी जमीन पर पॉपुलर कल्चर ने हमारे अपने नायक और खलनायक तैयार कर दिए थे। अक्सर जासूसी उपन्यास में चीनी वैज्ञानिकों की साजिशों से भरे होते थे। सत्तर के दशक में ही उर्दू के कथाकार कृश्न चंदर तक ने जेम्स बॉन्ड जैसे एक किरदार को लेकर बेहद खूबसूरत उपन्यास 'हांगकांग की हसीना' लिख डाला।
हॉलीवुड के जेम्स बॉन्ड ने जब धूम मचाना शुरू किया तो बॉलीवुड ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की। लेकिन ज्यादातर मामलों में वह बॉन्ड फिल्मों की मूर्खतापूर्ण नकल बनकर रह गईं। सबसे पहली कोशिश ट्रिक फोटोग्राफी में महारत रखने वाले निर्देशक-फोटोग्राफर रविकांत नागाइच ने की। उन्होंने जितेंद्र के साथ एक फिल्म 'फर्ज' बनाई। इसमें जितेंद्र ने जेम्स बांड जैसे एक किरदार एजेंट 116 का रोल निभाया था। संयोग से यह फिल्म सुपरहिट हुई और इससे जितेंद्र के करियर को भी काफी सहारा मिला। जीतू ने इस फिल्म के जरिए टाइट फिटिंग वाली पैंट, सफेद जूते और टी-शर्ट को एक फैशन ट्रेंड में बदल दिया।
नागाइच ने इसके बाद एजेंट 116 को लेकर दो और फिल्में बनाईं- 'कीमत' और 'रक्षा'। 'कीमत' में एजेंट 116 बने थे धर्मेंद्र और रक्षा में दोबारा जितेंद्र सामने आए। रवि नागाइच ने ही बाद में मिथुन चक्रवर्ती को लेकर 'सुरक्षा' और 'वारदात' फिल्में बनाईं। इसमें उन्होंने गन मास्टर G-9 को प्रस्तुत किया था। 'सुरक्षा' हिट रही मगर 'वारदात' फ्लॉप हो गई। दोनों ही फिल्मों में एजेंट की मुठभेड़ देश को तबाह करने की साजिश रच रहे एक सनकी वैज्ञानिक से होती है। एक तरफ जितेंद्र जहां अपने चॉकलेटी चेहरे के चलते रोजर मूर का विकल्प लगते थे, धर्मेंद्र की ही-मैन वाली छवि सीन कॉनरी की याद दिलाती थी।