फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ के मुंबई में हुए कार्यक्रम की मेजबानी अभिनेता राणा दग्गूबाती ने मंच पर पूरा समय रहते हुए की। राणा फिल्म के निर्देशक नाग अश्विन के कक्षा एक से सहपाठी रहे हैं। लेकिन, इस कार्यक्रम की परदे के पीछे से पूरी कमान दो युवतियों स्वप्ना दत्त और प्रियंका दत्त ने संभाली। दोनों बहनें अपने पिता अश्विनी सी दत्त की फिल्म कंपनी वैजयंती मूवीज की कमान संभालती हैं। अश्विनी सी दत्त वही निर्माता हैं जिनके पैर अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘कल्कि 2898’ में मुंबई में हुए कार्यक्रम में सबसे सामने छुए थे। स्वप्ना और प्रियंका इन दिनों फिल्म की रिलीज में दिन रात व्यस्त हैं और इस व्यस्त समय के बीच में इन दोनों से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने किस्तों में ये बातचीत की।
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किसी कलाकार का विकल्प नहीं सोचा गया
निर्माता अश्विनी सी दत्त की छोटी बेटी प्रियंका की शादी फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ के निर्देशक नाग अश्विन से हुई है। स्वप्ना और प्रियंका दोनों की सिनेमा को लेकर अपनी अपनी अलहदा सोच है पर दोनों जब साथ काम करती हैं तो एक ही धारा के दो किनारों की तरह नजर आती हैं। स्वप्ना बताती हैं, “ये फिल्म एक ऐसा सपना है जिसे इस फिल्म से जुड़ा हर शख्स बीते पांच साल से जी रहा है। हर कलाकार अपने किरदार के लिए वन एंड ओनली च्वाइस रहा है। किसी का कोई दूसरा विकल्प कभी सोचा नहीं गया।”
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हम हर फिल्म जी जान से बनाते हैं..
प्रियंका कहती हैं, “हमारे लिए किसी भी कहानी को कहने का एक आधार होना जरूरी है। एक बार हमें वह आधार मिल गया तो फिर इसे कहने का तरीका, इसे कहने के लिए जरूरी किरदार और इन किरदारों को परदे पर निभाने के लिए जरूरी कलाकार हमारी पहली प्राथमिकता हो जाते हैं। फिल्म कितने करोड़ में बनेगी, इसकी तरफ फिर हमारा ध्यान नहीं जाता। ये हम सबके जीवन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है और जो भी हम करते हैं, जी जान से करते हैं।”
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हमारी पहली प्राथमिकता कहानी
स्वप्ना और प्रियंका की जोड़ी को साउथ सिनेमा के निर्माताओं की सबसे प्यारी जोड़ी इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वह सितारों से ज्यादा कहानी को तवज्जो देती हैं। स्वप्ना कहती भी हैं, “हम संभवत: इसलिए सफल होते रहे हैं क्योंकि दर्शकों को फिल्म पसंद आने से पहले हमें अगर फिल्म पसंद नहीं आती है तो हम पहला कदम ही नहीं बढ़ाते हैं। हमें फिल्म की कहानी से प्यार हो जाना चाहिए और अगर ऐसा हो जाए तो फिर नतीजा ‘सीतारामम्’ जैसा होता ही है।”
हम हर फैसले में साथ साथ हैं!
क्या नाग अश्विन अपनी फिल्म के अलावा दत्त परिवार की दूसरी फिल्मों में भी मदद करते हैं? ये पूछने पर प्रियंका बताती हैं, “उन्हें करना ही होगा। हमारे बीच कुछ भी खांचों में बंटा हुआ नहीं है। कंपनी की फिल्मों के कलाकार हम तीनों मिलकर तय करते हैं। कभी कभी पिताजी की भी मदद हम लेते हैं, लेकिन हमारे जो भी फैसले होते हैं, उनमें हम सबकी सहमति शामिल होती है। हम समावेशी फैसले लेने में आनंद का अनुभव करते हैं। इसे ही हमारी कामयाबी का राज भी आप कह सकते हैं।”