स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आज पुण्यतिथि है। 6 फरवरी 2022 को आज के ही दिन लता मंगेशकर पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों को छोड़कर चली गईं। लेकिन, उनके गाए गीत जब तक चांद और सूरज रहेंगे, हमारे कानों में उनकी मधुर आवाज के साथ खनकते रहेंगे। लता मंगेशकर ने अपने करियर में छोटे बड़े से लेकर हर संगीतकार के लिए गीत गाए। वह सबको समान सम्मान देती थीं और नए संगीतकारों की बातें व उनके सुझावों को गौर से सुनती थीं। उनकी पुण्यतिथि पर आइए बताते हैं आपको 10 संगीतमयी कहानियां...
Lata Mangeshkar: जब ‘आके मुझे छेड़ जाए’ पर अटका लता का जिया, और, राकेश रोशन को समझाना पड़ा कितनी चढ़ी ‘जवानी’
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तेज बुखार में भी गाया गीत: आनंद जी (कल्याण जी आनंद जी)
संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी उन प्रमुख संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने करियर के अधिकतर समय लता मंगेशकर के साथ काम किया। कल्याण जी आनंद जी जोड़ी के संगीतकार आनंद जी भाई कहते हैं, 'मुझे याद है हमें फिल्म 'कोरा कागज' के लिए एक गाना रिकॉर्ड करना था। लता जी अस्वस्थ थीं, उन्हें तेज बुखार था और फिल्म 'कोरा कागज' की शूटिंग चल रही थी। इस फिल्म के लिए गाने की जरूरत थी। हमने लता जी से मदद करने का अनुरोध किया। वह आई और एक घंटे के अंदर 'रूठे रूठे पिया' गा कर चली गई। इस गाने के लिए लता जी को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।'
वो सरस्वती मां हैं: प्यारे लाल (लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल)
संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और दिवंगत गायिका लता मंगेशकर ने एक साथ 700 से अधिक गानों पर काम करके इतिहास रच दिया। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के प्यारेलाल ने हाल ही हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान लता मंगेशकर को सरस्वती का अवतार बताया। प्यारेलाल कहते हैं, ‘लता जी मेरे जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण का हिस्सा थीं। वह मेरे लिए मां की तरह थीं। लता जी ने हमेशा हमारा साथ दिया। हमने एक साथ 712 गाने रिकॉर्ड करके इतिहास रचा। वह खुशमिजाज और मौज-मस्ती करने वाली थी, लेकिन कभी-कभी हमें डांट भी देती थी। वो हमारे लिए सरस्वती मां हैं।'
उनकी आवाज में पाकीजगी: खय्याम
लंबे समय पहले संगीतकार खय्याम ने लता मंगेशकर के बारे में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, ‘एक गायिका के रूप में मैं हमेशा मानता हूं कि लता जी का सबसे बड़ा गुण पाकीजगी, उनकी आवाज की शुद्धता है। एक और बात जो मुझे प्रभावित करती है वह है अपनी कला के प्रति उनकी ईमानदारी। उनका उच्चारण, विशेषकर कठिन उर्दू शब्दों का उच्चारण बहुत उत्तम होता है। यह वास्तव में एक सामान्य मराठी पृष्ठभूमि से आने वाली महिला के लिए सराहनीय है और ऐसा केवल इसलिए है क्योंकि उसने विशेषज्ञों से उर्दू सीखने के लिए वास्तविक कष्ट उठाया है।'
अभिनेता कुमार गौरव की फिल्म 'दिल तुझको दिया' से जुड़ा एक किस्सा शेयर करते हुए संगीतकार राजेश रोशन कहते हैं, ‘इस फिल्म फिल्म के गीत ‘वादा ना तोड़ वादा ना तोड़' को गाने से लता मंगेशकर ने इंकार कर दिया था क्योंकि इस गाने के कुछ बोल उन्हें अश्लील लग रहे थे। फिर मैंने उन्हें अपने पिता की फिल्म चित्रलेखा में गाया गाना ‘सखी री मेरा मन उलझे तन डोले’ याद दिलाया और बताया कि इस गाने के भाव भी वैसे ही है। तब जाकर लता जी ने उस गीत को गाया। उनको शायद जवानी शब्द से गलतफहमी हो रही है।'