डिजिटल रिव्यू: अभय 2 (Abhay 2)
'सेक्रेड गेम्स' और 'पाताल लोक' जैसी वेब सीरीज को पसंद करने वालों के लिए इस सीजन का नया सरप्राइज है वेब सीरीज 'अभय' का दूसरा सीजन। अभी अभी तो लोगों ने इसके हीरो कुणाल खेमू को बेहतरीन कॉमेडी फिल्म 'लूटकेस' देखी है और अभी ही आ गई है, ये वेब सीरीज। 37 साल का बंदा 27 साल से तो दबा के एक्टिंग कर रहा है और उनका फैन बेस भी हिंदी पट्टी में काफी अच्छा है। 'अभय 2' को इसके मुख्य किरदार एसटीएफ अफसर अभय प्रताप सिंह यानी कुणाल खेमू के अपने करिश्मे का तो फायदा मिल ही रहा है, इस बार पुलिस के सामने चुनौतियां भी खतरनाक हैं, किसने सोचा होगा कि चंकी पांडे, बिदिता बाग, राम कपूर और राघव जुयाल जैसे लोगों को परदे पर लोग इन रूपों में भी देखेंगे।
AbhayOnZEE5: अभय प्रताप की दमदार क्राइम थ्रिलर में हुई वापसी, यूपी की ताजा घटनाओं की दिखी झलक
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सीरीज के अब तक तीन एपीसोड ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर रिलीज हो चुके हैं। इस बार का सीजन शुरू होते ही सीधे दर्शकों को अपनी मुट्टी में कर लेता है। साइनबोर्ड पर लिखी लखनऊ की अंग्रेजी वर्तनी और उत्तर प्रदेश जैसी न दिखती भौगोलिक परिस्थितियों से ज्यादा ध्यान दर्शकों का चंकी पांडे पर रहता है। वह सीरीज के पहले साइको किलर है। पहला एपिसोड राम कपूर की एंट्री से खत्म होता है और दूसरा एपिसोड बिदिता बाग के एक आदमी को मरता देख मिलने वाले चरमसुख से शुरू होता है। समझ पहले एपिसोड से ही आ जाता है कि इस बार का पैकेज धांसू है। हर एपिसोड में देखने को मिलने वाला है एक नया साइको किलर। चंकी पांडे को मरने वाले का भेजा बहुत पसंद है, ऐसी ही रुह कंपा देने वाली पसंदें दूसरे साइको किलर्स की भी हैं।
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'अभय 2' के रिव्यू में आगे बढ़ने से पहले ये वैधानिक चेतावनी भी जरूरी है कि ये सीरीज सिर्फ 18 साल या उससे ऊपर के लोगों के लिए है। सीरीज में एक्शन है, इमोशन है, ड्रामा है और इसके अलावा वह सब कुछ भी है जिसे देखने की सलाह बच्चों को नहीं दी जाती। सीरीज के तीन एपिसोड रिलीज हो चुके हैं, उम्मीद है वीकएंड तक बाकी भी आ ही जाएंगे। घर में छोटे बच्चे नहीं है तो स्मार्ट टीवी पर इस वीकएंड बिंज वॉचिंग के लिए 'अभय 2' सही सीरीज लगती है। वैसे, मोबाइल और लैपटॉप तो है ही।
छोटे परदे पर अपराध आधारित तमाम सीरीज के निर्माता बी पी सिंह ने इस बार इस सीजन के लिए लेखकों की पूरी फौज खड़ी कर दी है। हर एपीसोड में पुलिस टीम वही है बस अपराध बदलते जाते हैं। बी पी सिंह का क्राइम कंटेंट का ये सेट फॉर्मूला है और अब तक उनके काम भी आता रहा है। 'अभय 2' का पहला एपिसोड चंकी पांडे के कमाल के अभिनय से अपना रंग जमाने में कामयाब रहता है। अपने पिता के तानों से परेशान कोई शख्स कैसे दूसरों का भेजा फ्राई (या कहें कि ब्वॉयल) करने लगता है, देखने-समझने वाली बात है। 'अभय 2' की पुलिस की संघटना भले उत्तर प्रदेश पुलिस जैसी न दिखती हो लेकिन इसमें दिखाए जा रहे अपराधों में दर्शकों को हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में हुए ताबड़तोड़ अपराधों की झलक जरूर मिलती है।
'अभय 2' जैसी सीरीज का अपना एक मनोविज्ञान है, और अगर बी पी सिंह के अब तक बनाए कंटेंट पर रिसर्च की जाए तो अपराध मनोविज्ञान का एक नया साहित्य तैयार हो सकता है। 'अभय 2' में कुणाल खेमू का काम एक नंबर पर है और दूसरे नंबर पर हैं राम कपूर। बिदिता बाग अपना असर छोड़ने में कामयाब रहीं। जी5 की ही ओरीजनल फिल्म 'शोले गर्ल' के बाद ये उनकी इस ओटीटी पर वापसी है। सीरीज अभी जारी है और जाहिर है कि अभिनय के कुछ और तुरुप के पत्ते जी5 ने सीने से लगाकर रखे हैं। इनके खुलने का इंतजार रहेगा।
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