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बाइस्कोप: राजकुमार ने इसलिए सुल्तान अहमद का नाम रखा ‘जानी मुगल ए आजम’, के आसिफ की बेटी बनी हीरोइन

Fri, 14 Aug 2020 02:36 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 14 Aug 2020 02:36 AM IST
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dharam kanta this day that year by pankaj shukla 13 august 1982 bioscope rajesh khanna jeetendra
धर्मकांटा - फोटो : सोशल मीडिया

सन 82 का साल हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन का साल माना जा सकता है। उनकी पांच फिल्मों ‘नमक हलाल’, ‘खुद्दार’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘शक्ति’, और ‘देश प्रेमी’ ने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में जगह बनाई। उस साल नंबर वन फिल्म रही थी दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, संजीव कुमार, सारिका, पद्मिनी कोल्हापुरे और संजय दत्त की फिल्म ‘विधाता’। संजीव कुमार की एक प्रेम कहानी तो दुनिया को पता है कि मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी ने उनको ठुकरा कर धर्मेंद्र से शादी कर ली थी।



लेकिन, जितना प्यार संजीव कुमार ने एक तरफा हेमा मालिनी को किया, उससे कहीं ज्यादा प्यार संजीव कुमार से किया उस दौर की मशहूर अदाकारा और गायिका सुलक्षणा पंडित ने। ये वो दौर था जब रेडियो पर किसी न किसी कार्यक्रम में दिन में एक बार फिल्म ‘आहिस्ता आहिस्ता’ का वो गाना बज ही जाता था, ‘माना तेरी नजर में तेरा प्यार हम नहीं, कैसे कहें कि तेरे तलबगार हम नहीं...।’ खय्याम के संगीतबद्ध किए और नक्श लायलपुरी के लिखे इस गाने में बतौर गायिका सुलक्षणा पंडित ने अपना पूरा दर्द उड़ेल दिया था।

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dharam kanta this day that year by pankaj shukla 13 august 1982 bioscope rajesh khanna jeetendra
धर्मकांटा - फोटो : सोशल मीडिया

सुलक्षणा पंडित कभी किसी की राह की दीवार नहीं बनीं। निर्माता निर्देशक सुल्तान अहमद की जो फिल्म ‘धर्मकांटा’ 13 अगस्त 1982 को रिलीज हुई, उसमें भी वह किनारा ही बनीं और बस अपनी मोहब्बत का दूसरा किनारा तलाशती रहीं। ‘धर्मकांटा’ के मायने उन सबको तो मालूम होंगे जिन्होंने कभी न कभी कोई न कोई सामान जाकर सार्वजनिक तराजू पर तौलाया होगा। बाद में शहरों में ट्रकों और दूसरे सामान ढोने वाले वाहनों का वजन तौलने की जगह का नाम भी धर्मकांटा उसी तराजू के नाम पर ही पड़ा। यहां फिल्म ‘धर्मकांटा’ में जो तुलने वाला था, उसकी झलक दी थी मोहम्मद रफी और भूपेंद्र सिंह ने अपने एक दोगाने में जिसके बोल थे, ‘दुनिया छूटे यार न छूटे जान से बढ़कर यारी है, दिल के धर्मकांटे पर देखा प्यार का पल्ला भारी है…’


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dharam kanta this day that year by pankaj shukla 13 august 1982 bioscope rajesh khanna jeetendra
धर्मकांटा - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म की कहानी डाकुओं की कहानी है जिसमें एक बाल बच्चेदार डाकू अमीरों के बच्चों का अपहरण कर उनसे फिरौती वसूलता है। लेकिन, एक दिन फिरौती के लिए अपहृत किया गया एक बच्चा गलती से मारा जाता है और उसके बाद आए आंधी तूफान में डाकुओं के इस सरगना का पूरा परिवार बिछड़ जाता है। दोनों बच्चे बड़े होकर चोर उचक्के बनते हैं और बेटी पलने लगती है उसी घर में जिस घर का चिराग इस डाकू ने छीन लिया था। वह जेल से छूटता और कैसे अपने परिवार से मिलता है, यही फिल्म ‘धर्मकांटा’ की कहानी है। मशहूर निर्देशक के आसिफ के असिस्टेंट रहे सुल्तान अहमद ने साल 1970 में अपने प्रोडक्शन हाउस की नींव रखी और ये साल उनके प्रोडक्शन हाउस का गोल्डन जुबली साल है। सुल्तान अहमद का जन्मदिन भी 15 अगस्त को ही मनाया जाता है।

‘धर्मकांटा’ बनाने से ठीक पहले सुल्तान अहमद ने अमिताभ बच्चन और रेखा को लेकर फिल्म ‘गंगा की सौगंध’ बनाई थी और इसमें भी अमिताभ बच्चन डाकू ही बने थे। फिल्म ‘धर्मकांटा’ में उन्होंने उस वक्त के सितारों की लाइन लगा दी थी। राजेश खन्ना, जीतेंद्र, रीना रॉय, सुलक्षणा पंडित, राजकुमार, वहीदा रहमान और अमजद खान के साथ तमाम दूसरे सितारों का पूरा मेला था इस फिल्म में। फिल्म का मुहूर्त शॉट देने के लिए सुल्तान अहमद ने अमिताभ बच्चन को बुलावा भेजा था, और वह आने को तैयार भी हो गए थे। लेकिन, ऐन मुहूर्त के दिन सुल्तान अहमद को भी दोनों को एक साथ एक फ्रेम में लाने में पसीने छूट गए। हुआ यूं कि अमिताभ बच्चन लगातार लोकेशन पर फोन करते ये पूछते  रहे कि राजेश खन्ना आए कि नहीं और राजेश खन्ना बार बार ये पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि अमिताभ बच्चन पहुंचे कि नहीं। दोनों में से कोई भी दूसरे से पहले लोकेशन पर नहीं पहुंचना चाहता था। फिर किसी तरह दोनों एक साथ लोकेशन पर पहुंचे और फिल्म का मुहूर्त शॉट सम्पन्न हुआ।

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धर्मकांटा - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म ‘धर्मकांटा’ बननी शुरू हुई तो शूटिंग के दौरान भी राजेश खन्ना और जीतेंद्र के बीच खूब किस्से हुए। दोनों तब भी अपने अपने खेल के मास्टर थे और हिंदी सिनेमा में अब भी इन लोगों की तूती बोलती थी। सुल्तान अहमद ने सितारों को हैंडिल करने में मास्टर माने जाते थे। अपने गुरु के आसिफ से सीखा भी उन्होंने यही था या कहें कि के आसिफ को अगर सितारों की मिजाजपुर्सी करने के लिए अपने किसी शागिर्द पर भरोसा हुआ करता था तो वह सुल्तान अहमद ही थे। के आसिफ की तीसरी बीवी निगार सुल्ताना (फिल्म ‘मुगले ए आजम’ की बहार) भी सुल्तान अहमद को बहुत मानती थीं और सुल्तान अहमद ने उनकी बेटी हीना कौसर का ख्याल भी काफी रखा। हीना कौसर ने फिल्म ‘धर्मकांटा’ में राज कुमार और वहीदा रहमान की बेटी गंगा का किरदार निभाया है।

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धर्मकांटा - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म में राजकुमार ने ठाकुर भवानी सिंह का किरदार किया और उनकी धर्मपत्नी राधा सिंह बनीं वहीदा रहमान। दोनों के बेटों के नाम बचपन में तो राम लक्ष्मण होते हैं लेकिन बड़े होकर ये अलग अलग उस्तादों के साथ जरायम के नए नए दांव पेंच सीखते हैं और तब तक इनके नाम पड़ जाते हैं शिवा और शंकर। फिल्म में कादर खान ने अभिनय तो नहीं किया लेकिन उनके लिए संवाद खासे दमदार रहे। ये वही फिल्म है जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला जुमला ‘लंबू’ दूसरे कलाकार पर फिट करने की विफल कोशिश की। हां, फिल्म में उनके लिखे संवाद राज कुमार पर खूब जमे। संवादों के अलावा फिल्म के तकनीकी पक्ष में सुल्तान अहमद को ‘मुगल ए आजम’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्में शूट करने वाले मशहूर सिनेमैटोग्राफर आर डी माथुर के साथ साथ स्टंट डायरेक्टर एस अजीम और कोरियोग्राफर मास्टर कमल और गोपी किशन से भी काफी मदद मिली। और, इन पूरी टीम का मिला जुला कमाल देखने को मिला फिल्म के इस सुपरहिट गाने में...

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