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Bioscope S2: छह फ्लॉप के बाद यश चोपड़ा को ‘चांदनी’ में मिला जीवनदान, श्रीदेवी ने गाया ये हिट गाना

Wed, 15 Sep 2021 01:49 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 15 Sep 2021 01:49 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Chandni Sridevi Yash Chopra Rishi Kapoor Vinod Khanna Yash Raj Films
चांदनी - फोटो : अमर उजाला

हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस यशराज फिल्म्स के 50 साल पूरे होने के जश्न का मुंबई को अब भी इंतजार है। 1973 में रिलीज हुई पहली फिल्म ‘दाग’ से लेकर दिसबंर 2019 में रिलीज हुई फिल्म ‘मर्दानी 2’ तक यशराज फिल्म्स कुल 76 फिल्में बना चुकी है और इसकी आठ नई फिल्में निर्माणाधीन हैं। इन 81 फिल्मों में अगर किसी महिला किरदार के नाम पर बनी फिल्मों की बात करें तो ऐसी फिल्में सिर्फ दो हैं, ‘नूरी’ और ‘चांदनी’। महिला विषयक दो और फिल्में ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ भी यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन चुकी हैं। लेकिन, जिस फिल्म की बात मैं आज के बाइस्कोप में करने वाला हूं ये वो फिल्म है जिसने यशराज फिल्म्स को डूबने से बचाया। उधार के पैसे लेकर बनी यशराज फिल्म्स की शायद ये इकलौती फिल्म है। फिल्म में निर्माता के तौर पर यश चोपड़ा और सहायक निर्माता के तौर पर टी सुब्बीरामी रेड्डी का नाम है। अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, राखी, परवीन बाबी, नीतू सिंह और संजीव कुमार स्टारर फिल्म ‘काला पत्थर’ के बाद यशराज फिल्म्स की छह बैक टू बैक फिल्में ‘नाखुदा (1981)’, ‘सिलसिला (1981)’, ‘सवाल (1982)’, ‘मशाल (1984)’, ‘फासले (1985)’ और ‘विजय (1988)’ वैसा करिश्मा करने से चूक गई जैसी कि इनसे उम्मीद की गई थी। इनमें से ‘सिलसिला’, ‘फासले’ और ‘विजय’ ने बतौर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा की तिजोरी और साख दोनों को काफी चोट पहुंचाई। लेकिन, साल 1989 के सितंबर महीने में जब ‘चांदनी’ रिलीज हुई तो इसने आगे पीछे के सारे हिसाब बराबर कर दिए।



Bioscope with Pankaj Shukla Chandni Sridevi Yash Chopra Rishi Kapoor Vinod Khanna Yash Raj Films
यश चोपड़ा के साथ श्रीदेवी और रेखा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

यश चोपड़ा और ‘चांदनी’
‘रानी मेरा नाम’, ‘जूली’ और ‘सोलवा सावन’ जैसी छिटपुट फिल्मों में काम करने के बाद हिंदी सिनेमा को अपने करियर का अगला मुकाम बनाने का तय करके जब श्रीदेवी ने 1983 में जीतेंद्र के साथ फिल्म ‘हिम्मतवाला’ की तो पूरी हिंदी पट्टी में हंगामा हो गया था। इतनी मादक और इतनी मोहक अभिनेत्री इससे पहले हिंदी सिनेमा में कोई दूसरी उनको नजर ही नहीं आई थी। और, इसके बाद तो श्रीदेवी ने हिट फिल्मों की लाइन लगा दी। ‘आखिरी रास्ता’,  ‘नगीना’, ‘जांबाज’ और ‘कर्मा’ जैसी फिल्मों ने सिर्फ तीन साल में उन्हें नंबर वन की कुर्सी पर ला बिठाया और इसके बाद ‘मिस्टर इंडिया’, ‘निगाहें’ से होते होते उनके करियर का अगला टर्निंग प्वाइंट जो फिल्म बनी वो थी, ‘चांदनी’। ‘चांदनी’ का जिक्र जब भी श्रीदेवी के सामने होता था उनकी आखें तमक उठती थीं। यश चोपड़ा के लिए उनके मन में काफी सम्मान शुरू से रहा। यश चोपड़ा चाहते तो फिल्म ‘चांदनी’ के लिए श्रीदेवी को अपने कार्यालय में मुंबई बुला सकते थे। लेकिन, ये उनका बड़प्पन था कि वह खुद चेन्नई गए श्रीदेवी को ये फिल्म ऑफर करने और श्रीदेवी ये बात कभी नहीं भूलीं। फिल्म ‘चांदनी’ में श्रीदेवी का पूरा लुक ऑस्कर विनर कॉस्ट्यूम डिजानइर भानु अथैया ने तैयार किया है, हालांकि फिल्म के बीच में ही यश चोपड़ा से अनबन के चलते उन्होंने काम छोड़ दिया था। फिर भी, फिल्म ‘चांदनी’ की कॉस्ट्यूम्स का जिक्र वह अक्सर करती थीं। खास तौर से उस एक दिन का जिस दिन उन्होंने फिल्म की कॉस्ट्यूम पहन कर देखने के लिए ही पूरा एक दिन रखा और उस दिन 50 से ऊपर पोशाकें पहन कर देखीं। हर पोशाक में यश चोपड़ा ने खुद वहां बैठकर उनकी तस्वीरें खिंचवाईं। और, फिल्म के हर सीन के लिए महीनों पहले तय कर दिया कि कौन सी पोशाक पहननी है। यश चोपड़ा ने अपनी तमाम हीरोइनों को शिफॉन की साड़ियां पहनाईं, सफेद सलवार कुर्ते पहनाए लेकिन लुक जिस हीरोइन का देश भर में मशहूर हुआ तो वह हुआ, चांदनी लुक।

Bioscope with Pankaj Shukla Chandni Sridevi Yash Chopra Rishi Kapoor Vinod Khanna Yash Raj Films
चांदनी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बीच शूटिंग बदल गई कहानी
फिल्म ‘चांदनी’ की कहानी कामना चंद्रा की लिखी है। स्त्री पुरुष संबंधों पर उनकी लिखी कहानी ‘प्रेम रोग’ साल 1982 में सुपरहिट हो चुकी थीं। बीच में एक टेलीविजन धारावाहिक भी कामना ने लिखा ‘तृष्णा’ के नाम से। ‘चांदनी’ की कहानी जब यश चोपड़ा ने सुनी तो उन्हें तुरंत लगा कि इस कहानी में दम है और ये कहानी हिंदी सिनेमा में रोमांस, प्रेम और संगीत की वापसी करा सकती है। फिल्म की कहानी समाज के धनाढ्य वर्ग की कहानी है। ऐसी कहानियां आम जनता को बहुत पसंद आती रही हैं। जमाना आर्थिक उदारीकरण की तरफ बढ़ तो चला था लेकिन पैसा अब भी उच्च वर्ग और उच्च मध्यवर्ग के पास ही आ रहा था। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए अब भी जीवन मुश्किल ही था। अमीरी वह सिर्फ फिल्मों में देख पाता था और ऐसे अमीर लोगों की नसों को दबाने वाली कहानियों में उसे एक अलग तरह का सुख मिलता था। यश चोपड़ा ने हिंदी दर्शक वर्ग की ये नस अच्छे से पकड़ी हुई थी और उन्हें समझ आने लगा था कि बीती फिल्मों में वह गलतियां कहां कर रहे थे। इस बार वह ये गलती दोहराना नहीं चाहते थे। फिल्म की ओरीजनल कहानी में एक सीन होता है जहां विनोद खन्ना आग में फंसी श्रीदेवी को बचाते हैं। यश चोपड़ा ने ये सीन शूट भी कर लिया लेकिन जब वह इसे एडिट करने बैठे तो उनका विचार बदल गया। उन्होंने श्रीदेवी को फोन किया और कहा कि वह कहानी बदल रहे हैं। ऋषि कपूर पर उनको पहले से भरोसा था। विनोद खन्ना ने भी एतराज किया नहीं। हां, फिल्म वितरकों को जरूर विनोद खन्ना का एक्शन सीन फिल्म से हटाया जाना अच्छा नहीं लग रहा थो तो यश चोपड़ा ने उनको फिल्म के एडवांस में डिस्काउंट देकर पटा लिया। यश चोपड़ा ने इसके बाद कामना चंद्रा की लिखी कहानी अधिकतर बदल दी। कामना की कहानी में रोहित का किरदार चांदनी से शादी करने और एक बच्चे का बाप बनने के बाद अपाहिज होता है। फिल्म के क्लाइमेक्स में दोनों का बेटा चांदनी की दूसरी शादी में गुलदस्ता लेकर जाता है। लेकिन, यश चोपड़ा ने रोहित और चांदनी की प्रेम कहानी को सगाई के बाद ही ब्रेक कर दिया। बंबई में ललित और चांदनी में प्रेम तो कराया लेकिन क्लाइमेक्स में रोहित और चांदनी को फिर मिला दिया।

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चांदनी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

10 फ्लॉप के बाद ऋषि कपूर की 'चांदनी'
फिल्म ‘चांदनी’ की कहानी में तब्दीली तब हुई जब यश चोपड़ा फिल्म की शूटिंग करने दिल्ली पहुंच चुके थे। यहीं यश चोपड़ा ने जब ऋषि कपूर को बताया कि वह फिल्म का कहानी इसकी बेहतरी के लिए बदल रहे हैं तो ऋषि कपूर ने बस इतना ही कहा कि एक बार आप सारे नए सीन्स सुना दीजिएगा, बाकी जैसा आप उचित समझें वैसा करें। यश चोपड़ा के साथ फिल्म ‘कभी कभी’ में काम कर चुके ऋषि कपूर को यश चोपड़ा के हुनर पर भरोसा था। ये दो हीरो वाली फिल्म ऋषि ने तब साइन की थी जब सोलो हीरो के तौर पर उनकी बॉक्स ऑफिस पर तूती बोल रही थी। 1982 में ‘प्रेम रोग’ की कामयाबी से पहले वह 1979 में ‘सरगम’ और 1980 में ‘कर्ज’ में धूम मचा चुके थे। और, ‘प्रेम रोग’ के बाद भी ‘कुली’, ‘तवायफ’ और ‘सागर’ जैसी फिल्मों से ऋषि कपूर ने जमाने को अपना दीवाना बनाकर रखा हुआ था। ‘एक चादर मैली सी’, ‘नगीना’ और ‘खुदगर्ज’ में ऋषि कपूर ने पैसा और शोहरत जमकर कमाए। लेकिन, फिर ‘खुदगर्ज’ के बाद और ‘चांदनी’ से ठीक पहले 10 फ्लॉप फिल्में भी उन्होंने लाइन से दीं। ‘चांदनी’ ने न सिर्फ यश चोपड़ा का करियर बतौर निर्माता निर्देशक डूबने से बजाया बल्कि इसने ऋषि कपूर को भी हिंदी सिनेमा में नया जीवन दान दिया और उनका करियर कम से कम 10 साल और रफ्तार से चलते रहने भर का धक्का दे दिया। विनोद खन्ना के लिए भी ‘चांदनी’ किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं रही। ओशो के आश्रम से लौटने के बाद साल 1987 और 1988 में उनकी कुछ औसत और कुछ अच्छी फिल्में तो रिलीज हुईं लेकिन करियर की सेकेंड इनिंग्स में पहली सुपरहिट फिल्म उनको भी ‘चांदनी’ ही मिली।

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चांदनी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

श्रीदेवी की पराठों की फरमाइश
थोड़ी देर पहले जब मैं फिल्म ‘चांदनी’ की कहानी सुना रहा था तो बात यश चोपड़ा और श्रीदेवी के आपसी रिश्तों की भी चल निकली थी। यश चोपड़ा के निधन से ठीक पहले एक खबर बाजार में तैरी थी कि श्रीदेवी ने यश चोपड़ा की फिल्म के लिए मना कर दिया है। श्रीदेवी ने खुद इस बारे में चर्चा की थी और माना था कि यश चोपड़ा उनके साथ ‘चांदनी’ और  ‘लम्हे’ के बाद एक और महिलाप्रधान फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन उनकी दोनों बच्चियां तब छोटी थीं और वह फिल्मों में वापसी करने का तब तक मन भी नहीं बना पा रही थीं। वह मानती रहीं कि ये फिल्म मना करके नुकसान उनका ही ज्यादा हुआ। श्रीदेवी ने हमेशा यश चोपड़ा को अपने पिता का दर्जा दिया। फिल्म ‘चांदनी’ की शूटिंग के दौरान यश चोपड़ा ने श्रीदेवी की फरमाइश पर उन्हें स्विटजरलैंड में पराठे बनवाकर खिलाए थे।’

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