हिंदी सिनेमा में ‘मदर इंडिया’ और ‘वक्त’ जैसी मल्टीस्टारर फिल्मों के बाद अगर किसी फिल्मकार ने एक साथ दर्जनों सितारे एक ही फिल्म में इकट्ठा करने का काम किया तो वह रहे नासिर हुसैन। हिंदी की पहली मल्टीस्टारर मसाला फिल्म ‘यादों की बारात’ को माना जाता है। और, उन्हीं की फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ पर है आज का बाइस्कोप। सुपर डुपर हिट म्यूजिकल फिल्म फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ की शोहरत इसके हीरो ऋषि कपूर के चलते खूब हुई। फिल्म से लॉन्च हुईं हीरोइन काजल किरण ने साबित किया कि हुनर हो तो फिल्म इंडस्ट्री में हाइट कोई मायने नहीं रखती। रानी मुखर्जी ने भी बरसों बाद इसी लकीर को फिर से पक्का किया। काजल किरण औऱ ऋषि कपूर के अलावा फिल्म में तीसरा अहम किरदार था तारिक हुसैन का। तारिक और आमिर खान रिश्ते में चचेरे भाई हैं। फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ बनी है बिछड़ने और फिर मिलने के फॉर्मूले पर। हिंदी सिनेमा में इस फॉर्मूले की शुरूआत अशोक कुमार की फिल्म ‘किस्मत’ से मानी जाती है और निर्देशक यश चोपड़ा ने ‘लॉस्ट एंड फाउंड’ के फॉर्मूले को फिल्म ‘वक्त’ में कुदरती हादसों और जज्बात से जोड़ दिया। ‘यादों की बारात’ और ‘अमर अकबर एंथनी’ से होते होते ये मसाला ‘हम किसी से कम नहीं’ तक पहुंचा।
Bioscope S2: इस फॉर्मूले के चलते सुपरहिट हुई ‘हम किसी से कम नहीं’, ऋषि कपूर ने माना राइटर का एहसान
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फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ की कहानी अफ्रीका के एक रईस शख्स के अपनी सारी दौलत बेच उस रकम से ढेर सारे हीरे खरीद भारत लौटने की तैयारी से शुरू होती है। सारे हीरे उसने तरीके से छुपा रखे हैं लेकिन रास्ते में ही उसे दिल का दौरा पड़ जाता है। साथ सफर कर रहे एक अनजान मुसाफिर को वह ये हीरे अपने बेटे राजेश तक पहुंचा देने की गुजारिश करते हुए मर जाता है। राजेश दिल्ली के होटल में नाच गाकर जिंदगी बिता रहा है। उधर जिस बंदे को हीरे मिलते हैं, उसके पीछे बदमाश लग जाते हैं। बदमाशों से भागने के चक्कर में हीरे उससे भी गुम हो जाते हैं। काजल इसी अनजान मुसाफिर यानी सेठ किशोरीलाल की बेटी है और संजय से प्यार करती है। कहानी का खलनायक सौदागर सिंह अब राजेश को किसी तरह किशोरीलाल की बेटी के साथ सेट करके हीरे पाना चाहता है। कहानी में पेंच दर पेंच हैं और इसकी बुनावट ऐसी है कि ये फंदा दर फंदा उलझती तो जाती है लेकिन आगे भी बढ़ती जाती है। फिल्म लिखी है कमाल के राइटर सचिन भौमिक ने।
नरगिस की फिल्म ‘लाजवंती’ से बतौर फिल्म राइटर अपना करियर शुरू करने वाले सचिन भौमिक 2011 में अपने निधन के कुछ साल पहले रिलीज हुई ‘कृष’ तक में सक्रिय रहे थे। सचिन भौमिक और ऋषि कपूर दोनों एक दूसरे का काफी सम्मान करते थे। 12 अप्रैल 2011 को जब सचिन भौमिक का निधन हुआ तो मेरे फोन करने पर ऋषि कपूर ने अपने करियर में उनके योगदान को लेकर देर तक बातचीत की। ऋषि कपूर ने हमेशा अपनी हिट फिल्मों का क्रेडिट सबसे पहले इन फिल्मों के लेखकों को दिया। दोनों का साथ ऋषि कपूर के करियर की दूसरी ही फिल्म ‘खेल खेल में’ से जो शुरू हुआ तो ‘हम किसी से कम नहीं’, ‘कर्ज’, ‘जमाने को दिखाना है’ और ‘आ अब लौट चलें’ तक जारी रहा। ऋषि कपूर को जब मैंने फोन करके सचिन भौमिक के बारे में कुछ कहने को कहा तो उनके शब्द थे, ‘शुक्लाजी, जिसने दूसरों के लिए इतने सारे शब्द लिखे, उसके लिए मैं दो शब्द क्या कहूं। वह एक ऐसे इंसान थे जिनकी कहानियों में इंसानियत पहली कलाकार होती थी। वह अपने हर किरदार को ऐसे गढ़ते थे जैसे कि वह हमारा कोई जानने वाला ही हो। उनकी कहानियों में जिंदगी होती थी और जिंदगी का एक अलग ही फलसफा होता था। मैं इस शख्स को सलाम करता हूं।’
नासिर हुसैन की फिल्मों का संगीत शुरू से कमाल रहा। बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ में ही नासिर ने कहानी और अपनी संगीत पर अपनी पकड़ साबित कर दी थी। ‘पेइंग गेस्ट’ और ‘मुनीमजी’ जैसी फिल्में लिखने के बाद नासिर हुसैन ने निर्देशन में कदम रखा था और अपनी हर फिल्म का संगीत ऐसा रखा जो समय के साथ कभी मुर्झाने ना पाए। ‘दिल देके देखो’, ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘फिर वही दिल लाया हूं’ में सातवें दशक का सुनहरा संगीत बनवाने वाले नासिर हुसैन ने बीती सदी के आठवें दशक में ‘यादों की बारात’ , ‘हम किसी से कम नहीं’ और ‘जमाने को दिखाना है’ जैसी फिल्मों में बिल्कुल मॉडर्न संगीत तैयार कराया। फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ का संगीत देखा जाए तो साठ और सत्तर के दशकों का संगम है। यहां आपको किशोर कुमार का जोश भी मिलेगा और मोहम्मद रफी का होश भी। मजरूह सुल्तानपुरी के सदाबहार नगमों को आर डी बर्मन ने ऐसी धुनों पर सजाया है कि ये गाने आज भी बिल्कुल ताजा लगते हैं।
फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ ने उस साल दो पुरस्कार और जीते थे। एक तो मिला था बेस्ट सिनेमैटोग्राफी के लिए मुनीर खान को और दूसरा बेस्ट आर्ट डायरेक्शन के लिए शांति दास को। और, इन दोनों हुनरमंदों का काम आपको फिल्म के सबसे हिट गाने ‘बचना ऐ हसीनों लो मैं आ गया....’ में दिख जाता है। मुनीर खान ने इस गाने में अपनी सारी कलाबाजियां दिखा रखी हैं। शीश महल से शीशों से लेकर बालकनी की रेलिंग पर बैठकर आंख मारते ऋषि कपूर का शरारतीपन मुनीर ने बहुत ही खूबसूरती से कैमरे में कैद किया। उनकी इनडोर शूटिंग की लाइटिंग की टेकनीक कमाल की रही है और फिल्म इसी वजह से परदे पर इतनी भव्य भी दिखती है। नासिर हुसैन लंदन में शूटिंग के दौरान एक नाइट क्लब चले गए थे, वहीं उन्होंने वह गानो की मेडले भी सोची जिसे आर डी बर्मन ने बैक टू बैक चार ओरीजनल गानों के साथ फिल्म में रचा भी। उन्हीं नाइट क्लब से रंगीन सेट्स भी नासिर हुसैन ने फिल्म में शांति दास से बनवाए थे।