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Bioscope S2: 'काला पत्थर' के दौरान बिग बी से पिटे शत्रुघ्न सिन्हा, ऋतिक के चाचा के फेवर में डटीं लता मंगेशकर

Tue, 24 Aug 2021 03:45 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 24 Aug 2021 03:45 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Kala Patthar Amitabh Bachchan shatrughan sinha Neetu Singh Shashi Kapoor
काला पत्थर - फोटो : अमर उजाला

गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ और नई फिल्म ‘चेहरे’ की रिलीज एक ही हफ्ते में होने को लेकर अमिताभ बच्चन ने ट्विटर पर खुशी जताई तो लोग लहालोट हो गए। इंस्टाग्राम पर अमिताभ बच्चन ने अपनी यादों का ताजा किया फिल्म ‘काला पत्थर’ का जिक्र करके। वह लिखते हैं, ‘फिल्म ‘काला पत्थर’ के 42 साल! अरसा हो गया। और, फिल्म में तमाम सारे किस्से तो ऐसे हैं जो मेरे अपने तब के निजी अनुभवों के हैं जब मैं कलकत्ता कंपनी के कोल डिपार्टमेंट में काम करता था। फिल्मों से आने से मेरा पहला काम था ये। धनबाद और आसनसोल की कोयला खदानों में काम करने का...।’ सिनेमा के इतिहास में खासतौर से हिंदी सिनेमा के इतिहास में तथ्यों पर आधारित आलेखों की भारी कमी रही है। अमिताभ बच्चन के इंस्टा पोस्ट पर तमाम खबरें बनीं। अमिताभ बच्चन के रुतबे और इसके निर्देशक यश चोपड़ा के ग्लैमर को देखते हुए भले अब की पीढ़ी फिल्म ‘काला पत्थर’ को भी हिट फिल्म लिखे लेकिन रिलीज के समय लोगों ने इसे ज्यादा पसंद नहीं किया। 1979 में रिलीज हुई फिल्मों में ‘सुहाग’, ‘जानी दुश्मन’, ‘सरगम’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘नूरी’, ‘सुरक्षा’ और ‘दादा’ ने ‘काला पत्थर’ से कहीं ज्यादा मुनाफा अपनी लागत के हिसाब से कमाया था। ‘काला पत्थर’ हादसों की कहानी कहती पहली हिंदी फिल्म भी मानी जा सकती है। हॉलीवुड की फिल्मों पर पली बढ़ी नई पीढ़ी को भले अब ऐसी डिजास्टर फिल्में खूब पसंद आती हों, लेकिन साल 1979 में ‘काला पत्थर’ को उस वक्त की पीढ़ी ने काफी ठंडा रेस्पांस दिया था।



Bioscope with Pankaj Shukla Kala Patthar Amitabh Bachchan shatrughan sinha Neetu Singh Shashi Kapoor
काला पत्थर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

चासनाला खदान हादसे को भुनाने की कोशिश
देश में जब भी कोई खदान हादसा होता है, ‘काला पत्थर’ का जिक्र जरूर आता है। कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘केजीएफ’ में भी खदानों की ही पृष्ठभूमि है। दावा यही किया जाता है कि फिल्म ‘काला पत्थर’ धनबाद की चासनाला कोयला खदानों में 1975 में हुई दुर्घटना पर आधारित है जिसमें 350 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी। लेकिन, फिल्म ‘काला पत्थर’ की आत्मा जोसेफ कोनराड के उपन्यास ‘लॉर्ड जिम’ के ज्यादा करीब है। हां, फिल्म का ट्रिगर प्वाइंट जरूर चासनाला खदान हादसा माना जा सकता है। फिल्म को हकीकत के करीब रखने के लिए यश चोपड़ा अपनी पूरी यूनिट के साथ झारखंड (तब बिहार) की गिद्दी खदानों मे शूटिंग करने पहुंचे थे। फिल्म की शूटिंग गिद्दी वॉशरी (कोयले की धुलाई वाली जगह) में हुई और फिल्म की यूनिट के मुख्य लोग यहीं के रेस्ट हाउस में रुके। बॉक्स ऑफिस पर अमिताभ बच्चन के हंगामे के बीच शत्रुघ्न सिन्हा भी तब तक ‘कालीचरण’, ‘विश्वनाथ’, ‘जानी दुश्मन’ और ‘हीरा मोती’ जैसी फिल्मों से सुपरस्टार बन चुके थे। अमिताभ बच्चन के सुपरस्टार बनने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनकी ये पहली फिल्म थी और दोनों के बीच पूरी फिल्म में कभी ट्यूनिंग नहीं बन पाई। हालांकि, दोनों इससे पहले फिल्म ‘परवाना’ में काम कर चुके थे।

Bioscope with Pankaj Shukla Kala Patthar Amitabh Bachchan shatrughan sinha Neetu Singh Shashi Kapoor
काला पत्थर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

शत्रुघ्न सिन्हा ने खोले किस्से
शत्रुघ्न सिन्हा की बायोग्राफी 'एनीथिंग बट खामोश' में उन दिनों के किस्से पढ़ने को मिलते हैं। अमिताभ बच्चन उन दिनों शत्रुघ्न सिन्हा से किस कदर असुरक्षित महसूस करते थे और मन ही मन कितना उनसे ईर्ष्या करते थे, इसका एक नमूना किताब में इस तरह मिलता है। शत्रुघ्न सिन्हा बताते हैं, 'फिल्म काला पत्थर के एक फाइट सीक्वेंस में अमिताभ बच्चन ने मेरी बुरी तरह पिटाई की थी। वह मुझे तब तक मारते रहे जब तक शशि कपूर ने बीच में आकर हमें अलग नहीं किया। मुझे इस सीन के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया था।' यही नहीं काला पत्थर के सेट पर अमिताभ के बगल वाली कुर्सी कभी शत्रुघ्न सिन्हा को ऑफर नहीं की गई। दोनों एक साथ ही सेट के लिए निकलते थे लेकिन अमिताभ ने कभी शत्रुघ्न को अपने साथ तब गाड़ी में नहीं बिठाया। तब के लोग ये भी बताते है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान जो लोग वहां आते थे, वे सब शत्रुघ्न सिन्हा को देखने के लिए ज्यादा लालायित रहते थे। इस फिल्म के बाद दोनों ने ‘दोस्ताना’, ‘नसीब’ और ‘शान’ में भी साथ काम किया।

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Bioscope with Pankaj Shukla Kala Patthar Amitabh Bachchan shatrughan sinha Neetu Singh Shashi Kapoor
काला पत्थर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

नहीं मिला एक भी फिल्मफेयर पुरस्कार
अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और यश चोपड़ा की तिकड़ी फिल्म ‘काला पत्थर’ से पहले  ‘दीवार’, ‘कभी कभी’ और ‘त्रिशूल’ में भी साथ काम कर चुकी थी। चौथी बार जब ये तीनों साथ आए तो फिल्म की शूटिंग के समय से ही काफी चर्चा होने लगी थी। लेकिन फिल्म के बनते बनते इसका आकर्षण लगातार कम होता गया। नौबत यहां तक आई कि अगले साल के फिल्मफेयर पुरस्कारों में ये फिल्म एक भी पुरस्कार नहीं जीत पाई हालांकि इसे नामित सात कैटेगरी में किया गया। अभिनेत्री नीतू सिंह ने अपने करियर का एक मात्र फिल्मफेयर नामांकन इसी फिल्म के लिए पाया।

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Bioscope with Pankaj Shukla Kala Patthar Amitabh Bachchan shatrughan sinha Neetu Singh Shashi Kapoor
काला पत्थर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

कहानी रवि, विजय और मंगल की
फिल्म की कहानी विजय के इर्द गिर्द बुनी गई है जो मर्चेंट नेवी छोड़कर आया है, उसका अतीत उसे चैन से नहीं जीने देता। अपने साथियों को मझधार में छोड़कर भाग आने का दाग उसके दामन पर है। इसे भुलाने के लिए वह कोयला खदान में काम करता है। खदान के इंजीनयर रवि से उसकी दोस्ती होती है। यहीं मंगल नाम का एक खदान कर्मचारी और है। मंगल का भी अपना अतीत है। वह पुलिस से भाग रहा है। मंगल का अपना रुतबा है और जब वह दूसरे मजदूरों पर रौब गालिब करने की कोशिश करता है तो विजय से उसका टकराव होता है। बाद में विजय ही मंगल को एक हादसे में बचाता है और दोनों दोस्त बन जाते हैं। इन खदान मजदूरों की मदद की देखरेख के लिए तैनात डॉ. सुधा कोशिश करती है कि किसी तरह विजय अपने अतीत की यादों पर काबू पा सके। उधर रवि और अनीता करीब आते हैं तो मंगल को चन्नो के रूप में हमदर्द मिल जाता है। ये सब धीरे धीरे एक साथ आते हैं और खदान के मालिक सेठ धनराज की ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इसी बीच खदान में हादसा होता है।

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