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Bioscope S2: सनी देओल से समझिए कैसे बदला गया ‘गदर एक प्रेमकथा’ का क्लाइमेक्स, फिल्म के 20 साल पूरे

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 15 Jun 2021 08:43 AM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Gadar Ek Premkatha Sunny Deol Anil Sharma Shaktiman Amisha Patel Zee
फिल्म गदर एक प्रेमकथा का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

क्या आप जानते हैं कि ‘गदर एक प्रेमकथा’ एक सच्ची कहानी का फिल्मी रूपांतरण है? ये फिल्म आधारित है द्वितीय विश्व युद्द के दौरान बर्मा (अब म्यांमार) में ब्रिटिश सेना में नौकरी करने वाले फौजी बूटा सिंह की प्रेम कहानी पर। बंटवारे के वक्त जब सांप्रदायिक दंगे शुरू हुए तो उसने एक मुस्लिम लड़की की जान बचाई थी। दोनों में प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली। बाद में लड़की की शिनाख्त होने पर उसे नए नए बने पाकिस्तान भेज दिया गया। इसी के बाद बूटा सिंह अपनी पत्नी को लाने पाकिस्तान चला गया बिना जरूरी कागजात के। लड़की पर घर वालों का दबाव पड़ा तो उसने वापस भारत आने से मना कर दिया। कहते हैं कि बूटा सिंह ने पाकिस्तान में ही एक चलती ट्रेन के आगे छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली। लेकिन, फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ में ये नहीं होता। यहां ढाई किलो के हाथ वाले सनी देओल हैं। उनका दोनों मुल्कों के ‘ज़िंदाबाद’ रहने वाला मशहूर डॉयलॉग है और है वह कालजयी सीन जिसमें वह पूरा का पूरा हैंडपंप उखाड़ लेते हैं।



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गदर एक प्रेमकथा का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बहन के घर पर सनी ने सुनाई कहानी
फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ रिलीज होने से पहले ही इतना चर्चा में आ चुकी थी कि लोग फिल्म का इंतजार महीने भर पहले से कर रहे थे। फिल्म रिलीज होने को आई तो आदतन मैं फिल्म के दिल्ली और उत्तर प्रदेश के वितरकों के संपर्क में था। पुरानी दिल्ली के भगीरथ पैलेस में फिल्म वितरकों के पास फिल्म इंडस्ट्री की हर जानकारी होती थी। नई नई फिल्मों के पोस्टर और कैसेट होते थे। और, किसी भी हिंदी फिल्म का फोटो ‘अमर उजाला’ की फिल्म पत्रिका ‘रंगायन’ में छापने का ये मेरा नियमित स्रोत हुआ करता था। भगीरथ पैलेसे से ही एक दिन फिल्म वितरक गिन्नी चड्ढा का फोन आया कि सनी देओल से शाम को मीटिंग फिक्स हुई है। हम लोग सनी देओल की बहन विजेयता के घर सैनिक फॉर्म पहुंचे। वहां देर तक हम लोगों ने फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ को लेकर बातें की। सनी देओल का मोबाइल फोन भी तब ढाई किलो का हुआ करता था। ये जानकर कि मैं ‘अमर उजाला’ की फिल्म पत्रिका ‘रंगायन’ का संपादन करता हूं, सनी बोले, “आपके मथुरा के अनिल शर्मा ही फिल्म के निर्देशक हैं।” फिल्म की कहानी का भी हल्का सा इशारा उन्होंने दिया। लेकिन तब बायोपिक शब्द फैशन में नहीं था नहीं तो सनी देओल इसका भी जिक्र जरूर करते बातचीत में।

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गदर एक प्रेमकथा का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

असली प्रेम कथा पर आधारित फिल्म
फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ का विचार सबसे पहले इसके लेखक शक्तिमान को आया। शक्तिमान ने ही बूटा सिंह की प्रेमकथा अनिल शर्मा को सुनाई। अनिल शर्मा उन दिनों कोई ऐसी कहानी तलाश रहे थे जिसमें देशप्रेम तो हो लेकिन वह मनोज कुमार जैसी फिल्म न हो। कारगिल युद्ध के चलते देश में पाकिस्तान के खिलाफ लोगों में नफरत फैल ही रही थी और ऐसे में अनिल शर्मा को मिल गई ये कहानी। अनिल शर्मा ने मुंबई में ही पढ़ाई के बाद निर्देशक बी आर चोपड़ा के सहायक के रूप में बरसों काम किया। शुरूआती फिल्में भी उन्होंने ‘श्रद्धांजलि’ और ‘बंधन कच्चे धागों’ का के रूप में सोशल ड्रामा ही बनाईं। लेकिन, उनको एक्शन का चस्का लगा धर्मेंद्र की फिल्म ‘हुकूमत’ से।

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गदर एक प्रेमकथा का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

ऐसे सनी से मिले अनिल शर्मा
‘हुकूमत’ की जबर्दस्त कामयाबी ने अनिल शर्मा के सिनेमा का रंग, रूप सब बदल दिया। इसके बाद अनिल शर्मा ने लगातार ‘एलान ए जंग’, ‘फरिश्ते’, ‘तहलका’ और ‘पुलिस वाला गुंडा’ जैसी फिल्में बनाईं। लेकिन फिल्म ‘फरिश्ते’ के बाद अनिल शर्मा और धर्मेंद्र की जोड़ी का असर कम होने लगा था। अनिल शर्मा ने जीतेंद्र के साथ फिल्म ‘मां’ बनाई और गोविंदा के साथ ‘महाराजा’। गोविंदा को ही अनिल शर्मा ने सबसे पहले फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ की कहानी सुनाई थी। गोविंदा को पसंद भी बहुत आई। लेकिन, फिल्म में पैसा लगाने वाली कंपनी को गोविंदा इस फिल्म की कहानी के हिसाब से फिट नहीं लगे। ये हुआ कि इसके लिए सनी देओल से बात की जाए। अनिल शर्मा ने इसके लिए धर्मेंद्र की मदद ली और धर्मेंद्र के कहने पर ही सनी देओल ने ये कहानी सुनी।

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गदर एक प्रेमकथा का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सनी ने इसलिए बदल दिया क्लाइमेक्स
सनी देओल बताते हैं, “हां, ये फिल्म लेकर मेरे पास नितिन केनी, अनिल शर्मा जी, कमल मुकुट और शक्तिमान आए थे। कहानी मुझे अच्छी लगी और मैंने तुरंत ही इसके लिए हां भी कर दी। लेकिन उन दिनों मेरे पास फिल्में इतनी थीं कि इस फिल्म के लिए समय निकालना बहुत मुश्किल हो रहा था, लेकिन फिर किसी तरह ये फिल्म बनी और बहुत अच्छी फिल्म बनी।” कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म के राइटर शक्तिमान और निर्देशक अनिल शर्मा ने फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ के अंत में बूटा सिंह की ओरीजनल कहानी को 180 डिग्री घुमा दिया था यानी कि फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से फिल्म की हीरोइन सकीना को मर जाना था। लेकिन, फिल्म की शूटिंग के वक्त सनी देओल ने इस फिल्म का क्लाइमेक्स बदल दिया। सनी देओल बताते हैं, “फिल्म की ओरीजनल कहानी ये थी कि गोली लगने से सकीना की मौत हो जाएगी। लेकिन इस बारे में जब हमने आपस में चर्चा की तो लगा कि इससे पब्लिक नाराज हो सकती है और प्रेमकथा के इस अंत को लेकर ही गदर मच जाएगा तो हमने फिल्म को सुखांत रखने का फैसला किया।”

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