Web Series Review: ब्लैक विडोज
सिनेमा और टेलीविजन का फर्क बस लार्जर दैन लाइफ का ही होता है। इधर, कुछ वेब सीरीज ने इन दोनों के फासले को पाटा है। खास तौर से अगर वेब सीरीज ‘ब्लैक विडोज’ जैसी हो। फिनलैंड की एक चर्चित वेबसीरीज ‘मुस्टट लेस्केट’ के इस हिंदी रूपांतरण से भारतीय ओटीटी मनोरंजन चार कदम आगे न सही कम से कम तीन कदम तो आगे जरूर बढ़ा है। सीरीज के केंद्र में शुरू से आखिर तक बरकरार तीनों महिला किरदार समाज की वो हकीकत बयां करती हैं, जिनके बारे में अक्सर बात की ही नहीं जाती। किसी रईस से शादी कर जिंदगी में सैटल हो जाने का ख्वाब देखने वाली युवतियां जब सपनों की दुनिया उतनी हसीन नहीं पाती हैं तो क्या करती हैं? वेब सीरीज ‘ब्लैक विडोज’ इसी की परतें खोलती है। इसमें रहस्य और रोमांच कहानी का मुख्य केंद्रबिंदु नहीं है। यहां कहानी के किरदार खुद पर हंसते हैं। खुद को कोसते हैं और दर्शकों को उनसे न तो हमदर्दी हो पाती है और न ही नफरत। यही असल स्याह कॉमेडी है।
Black Widows On ZEE5 Review: बिंज वॉच के लिए परफेक्ट मर्डर मिस्ट्री, आखिर तक कहानी छोड़ नहीं पाएंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जी5 की क्रिएटिव टीम की मेहनत इस विदेशी सीरीज के देसी रूपांतरण में साफ दिखती है। कहानी को एक बहुत ही चित्ताकर्षक लोकेशन पर शुरू करके जिन जिन गलियों, मोड़ों और चौराहों से गुजारा गया है, वही कहानी का असली आनंद है। राधिका आनंद को इसके लिए दाद दी जानी चाहिए कि वह कहानी के सेटअप से लेकर इसके विस्तार तक कहीं से भी ये एहसास नहीं होने देती हैं कि ये कहानी देसी नहीं है। कालजयी कहानियों की शायद यही असल पहचान भी होती है कि वह देश, काल और परस्थितियों से परे होती हैं। करीब आधे आधे घंटे के 12 एपीसोड की ये कहानी जहां रुकती भी है वहां बताती है कि इसका दूसरा सीजन भी जरूर बनना चाहिए।
वेब सीरीज ‘ब्लैक विडोज’ की कहानी शुरू होती है तीन सहेलियों की आत्मकथा से। तीनों अपने अपने पतियों की असलियत सुना रही हैं और साथ ही ये भी दिखा रही हैं कि कैसे वह तीनों इनके साथ खुश रहने का प्रहसन करती रही हैं। कविता, जयती और वीरा अपनी जवानी की कहानी बदलने का प्लान बनाती हैं। अपने पतियों को एक धमाके में इस तरह खत्म कर देने का षडयंत्र रचती हैं कि किसी को उन पर शक न हो। लेकिन, मामला तब बिगड़ता है जब उनकी योजना सौ फीसदी कामयाब नहीं हो पाती। 33 प्रतिशत विफल दिख रही इस योजना में तीनों पतियों में से एक लौट आता है। और, उससे पहले ही उनकी जिंदगी का कोना कोना कोटक करती दिखने लगती है पुलिस अफसरों की एक ऐसी जोड़ी जिनके बीच का तारतम्य आपको करमचंद जासूस और किटी की याद दिला सकता है। कहानी में एक एक करके और किरदार भी आते रहते हैं और कहानी का विस्तार करते जाते हैं। पुलिस जांच का दबाव तीनों सहेलियों पर भी दिखना शुरू होता है और फिर..!
सीरीज के लेखन की तारीफ मैंने रिव्यू की शुरूआत में ही कर दी है। वेब सीरीज ‘ब्लैक विडोज’ की तकनीकी टीम ने यहां वाकई एक ऐसी चुस्त टीम की तरह काम किया है जो दूसरी वेब सीरीज बनाने वालों के लिए उदाहरण हो सकती है। एडिटिंग टेबल से जो बाहर निकला है उसमें इसके वीडियो एडिटर सुमित चौधरी के साथ साथ पूरी टीम की मेहनत दिखती है। निर्देशक बिरसा दासगुप्ता के विजन को काबिले तारीफ समर्थन शुभांकर भर की सिनेमैटोग्राफी का भी मिला है। उन्होंने हर सीन की लाइटिंग ऐसी रखी है कि उसमें थोड़ा सा खुला प्रकाश भी बना रहे और थोड़ा सी रहस्यमयी छाया भी।
वेब सीरीज ‘ब्लैक विडोज’ के टाइटल रोल करने वाली तीनों अभिनेत्रियों शमिता शेट्टी, स्वास्तिका मुखर्जी और मोना सिंह हिंदी मनोरंजन जगत को भी एक राह दिखाती हैं कि किरदार ढंग से लिखे जाएं तो हिंदी फिल्म जगत में तमाम और अभिनेत्रियां भी ऐसा कुछ लीक से हटकर करने को तैयार बैठी हैं। चढ़ती उम्र के बढ़ते जादू जैसी इन तीनों की मौजूदगी सीरीज को एक जरूरी आभा प्रदान करती हैं।